दीपिंदर गोयल के नए हेल्थ ट्रैकर पर डॉक्टरों ने उठाए सवाल, मांगे वैज्ञानिक सबूत

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जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल के नए वियरेबल डिवाइस Temple को लेकर डॉक्टरों ने सवाल उठाए हैं। गोयल ने इसे फिटनेस ट्रैकर बताया है, जबकि एम्स दिल्ली के डॉक्टर ऋषभ जैन ने इसकी सटीकता के वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं।

Tech: जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल का नया वियरेबल डिवाइस Temple लॉन्च से पहले ही चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डॉक्टर इसकी तकनीक और स्वास्थ्य से जुड़े दावों पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच गोयल ने साफ किया है कि Temple किसी बीमारी की जांच करने वाला मेडिकल उपकरण नहीं, बल्कि फिटनेस और वेलनेस ट्रैकर है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि किसी डिवाइस पर करोड़ों रुपये खर्च करना उसकी सटीकता का सबूत नहीं माना जा सकता।

Temple को लेकर डॉक्टरों और दीपिंदर गोयल में क्यों छिड़ी बहस?

दीपिंदर गोयल पिछले कुछ समय से Temple नाम के एक नए वियरेबल डिवाइस पर काम कर रहे हैं। इसे सिर के किनारे, कनपटी के पास पहना जाता है। कंपनी का दावा है कि यह शरीर से जुड़े कुछ खास संकेतों को रिकॉर्ड कर सकता है। इनमें दिमाग में खून के बहाव से संबंधित Brain Flow जैसे मेट्रिक्स भी शामिल हैं।

दीपिंदर गोयल के नए हेल्थ ट्रैकर पर डॉक्टरों ने उठाए सवाल, मांगे वैज्ञानिक सबूत

इन्हीं दावों को लेकर डॉक्टरों ने सवाल उठाने शुरू किए हैं। उनका कहना है कि किसी नए उपकरण के जरिए शरीर के अंदर होने वाले बदलावों को मापने का दावा किया जा रहा है, तो उसकी सटीकता की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच भी होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर बढ़ती आलोचना के बाद गोयल ने 5 नवंबर को X पर लंबी पोस्ट लिखकर डॉक्टरों को जवाब दिया। उन्होंने बताया कि Temple को तैयार करने के पीछे उनका मकसद केवल पैसा कमाना नहीं है। कंपनी इसकी तकनीक पर लंबे समय से काम कर रही है और आगे भी रिसर्च जारी रखेगी।

गोयल बोले- Temple कोई मेडिकल डिवाइस नहीं

डॉक्टरों के सवालों के बीच गोयल ने Temple के इस्तेमाल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनके मुताबिक, यह एक फिटनेस और वेलनेस डिवाइस है। इसे फिलहाल मेडिकल जांच या किसी बीमारी की पहचान करने वाले उपकरण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में डिवाइस के किसी मेट्रिक का क्लीनिकल परीक्षण पूरा होता है और उसकी पुष्टि होती है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

गोयल के इस जवाब के बाद बहस का केंद्र यह बन गया है कि Temple को फिटनेस ट्रैकर बताने के बावजूद उसके स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों पर कितना भरोसा किया जा सकता है।

Temple बनाने में खर्च हुए 30 मिलियन डॉलर

अपने पक्ष में गोयल ने डिवाइस तैयार करने की लागत का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, Temple के विकास पर अब तक 30 मिलियन डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। इसमें 20 मिलियन डॉलर उनका निजी निवेश है।

गोयल ने कहा कि कुछ हजार डिवाइस बेचने से इतनी बड़ी रकम वापस नहीं मिल सकती। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले 20 साल में बनाई अपनी कारोबारी साख को थोड़े समय के फायदे के लिए खतरे में नहीं डालना चाहते।

इसके अलावा उन्होंने Temple की 14 दिनों की नो-क्वेश्चन रिटर्न पॉलिसी का जिक्र किया। इस सुविधा के तहत ग्राहक तय शर्तों के अनुसार डिवाइस वापस कर सकेंगे।

गोयल का तर्क है कि अगर प्रोडक्ट लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, तो ग्राहकों को जल्द इसका पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने काम और रिसर्च को लेकर भरोसे में है।

एम्स के डॉक्टर ऋषभ जैन ने क्या जवाब दिया?

गोयल की पोस्ट पर एम्स दिल्ली के डॉक्टर ऋषभ जैन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर Temple में लगाए गए पैसों या कंपनी के कारोबारी रिकॉर्ड के बारे में सवाल नहीं कर रहे हैं। उनकी चिंता डिवाइस की वैज्ञानिक सटीकता को लेकर है।

डॉक्टर जैन के मुताबिक, 14 दिनों की रिटर्न पॉलिसी से यह साबित नहीं होता कि कोई उपकरण शरीर से जुड़ी जानकारी सही तरीके से माप रहा है।

उन्होंने 30 मिलियन डॉलर के निवेश पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि मेडिकल क्षेत्र में पहले भी कई महंगी तकनीकें आई हैं, लेकिन वैज्ञानिक परीक्षण के दौरान उनके दावे सही नहीं पाए गए।

डॉक्टर जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नई तकनीक या इनोवेशन के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि स्वास्थ्य से जुड़े दावों के समर्थन में ऐसे रिसर्च डेटा उपलब्ध कराए जाएं, जिनकी जांच दूसरे वैज्ञानिक भी कर सकें।

उनके अनुसार, केवल कंपनी का भरोसा या ग्राहकों का अनुभव किसी डिवाइस की मेडिकल सटीकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

वैज्ञानिक जांच को लेकर क्या है असली सवाल?

Temple को लेकर डॉक्टरों की मुख्य चिंता उसके Brain Flow मेट्रिक से जुड़ी है। डिवाइस कनपटी के पास पहना जाता है और कंपनी इसे दिमाग में खून के बहाव से संबंधित संकेतों को समझने का एक तरीका बताती है।

डॉक्टर जानना चाहते हैं कि सिर की सतह से मिले संकेतों के आधार पर दिमाग के अंदर खून के बहाव का कितना सही अनुमान लगाया जा सकता है।

ऐसी तकनीक की सटीकता जांचने के लिए नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होते हैं। इनमें उपकरण के नतीजों की तुलना स्थापित जांच विधियों से की जाती है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि अलग-अलग लोगों और परिस्थितियों में माप कितने भरोसेमंद रहते हैं।

गोयल ने कहा है कि कंपनी अपने रिसर्च से जुड़े प्रीप्रिंट और दूसरे अध्ययन सामने लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि डिवाइस उपलब्ध होने के बाद स्वतंत्र संस्थान भी इसकी जांच करेंगे।

Temple की कीमत और उपलब्धता

Temple के लिए भारत में प्री-ऑर्डर शुरू होने की खबर है। इसकी बताई जा रही कीमत करीब 85,000 रुपये है। हालांकि, यह डिवाइस आम फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच से काफी अलग तरह का प्रोडक्ट है।

कंपनी इसे वेलनेस ट्रैकिंग के लिए पेश कर रही है, लेकिन इसके स्वास्थ्य संबंधी मेट्रिक्स की क्लीनिकल सटीकता को लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

ऐसे में Temple खरीदने की योजना बना रहे लोगों को इसके फीचर्स, सीमाओं और रिटर्न पॉलिसी की जानकारी पहले देखनी चाहिए। किसी बीमारी की पहचान या इलाज के फैसले के लिए केवल इस तरह के वियरेबल डिवाइस की रीडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

Temple से जुड़ी आगे की रिसर्च और वैज्ञानिक परीक्षणों के नतीजे ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि कंपनी के दावे कितने भरोसेमंद हैं।

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