Zohran Mamdani Tax: न्यूयॉर्क में अमीरों के दूसरे घरों पर लगेगा टैक्स, कोर्ट से मेयर को बड़ी राहत

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को लग्जरी घरों पर टैक्स मामले में कोर्ट से राहत मिली है। जानें नए टैक्स से जेफ बेजोस जैसे अमीरों पर क्या असर पड़ सकता है।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को लग्जरी घरों पर नए टैक्स के मामले में कोर्ट से राहत मिली है। अपील कोर्ट ने मकान मालिकों की याचिका खारिज कर दी है। इस टैक्स का असर जेफ बेजोस और माइकल डेल जैसे अरबपतियों पर भी पड़ सकता है।

न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में महंगे घर रखने वाले अमीर लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मेयर जोहरान ममदानी की सरकार को लग्जरी सेकंड होम पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। राज्य की अपील कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलट दिया है। इस फैसले को ममदानी की बड़ी जीत माना जा रहा है। हालांकि, टैक्स की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

चार जजों की बेंच ने क्यों खारिज की याचिका?

न्यूयॉर्क की अपील कोर्ट ने बुधवार, 4 नवंबर को लग्जरी घरों पर लगाए जाने वाले नए टैक्स से जुड़े मामले में फैसला सुनाया। चार जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से मकान मालिकों की याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले 29 सितंबर को स्टेटन आइलैंड की एक अदालत ने टैक्स लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। अदालत का कहना था कि शहर प्रशासन ने मकान मालिकों को नोटिस भेजने और नई व्यवस्था लागू करने में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई। इसके बाद प्रशासन को दोबारा प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया था।

Zohran Mamdani Tax: न्यूयॉर्क में अमीरों के दूसरे घरों पर लगेगा टैक्स, कोर्ट से मेयर को बड़ी राहत

लेकिन अपील कोर्ट इस फैसले से सहमत नहीं हुई। जजों ने कहा कि याचिका दाखिल करने वाले लोग यह साबित नहीं कर पाए कि प्रशासन की कार्रवाई से उन्हें कोई वास्तविक नुकसान पहुंचा है।

कोर्ट के मुताबिक, किसी संपत्ति का नाम सरकारी सूची में आना या उसके मालिक को टैक्स से जुड़ा नोटिस मिलना अपने आप में कानूनी नुकसान का सबूत नहीं है। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

क्या है नया टैक्स और किन लोगों पर पड़ेगा असर?

न्यूयॉर्क सरकार के इस टैक्स को 'Pied-à-Terre Tax' कहा जाता है। यह उन महंगी संपत्तियों के लिए बनाया गया है जिनका इस्तेमाल मालिक अपने मुख्य घर के बजाय दूसरे घर के रूप में करते हैं।

इसके तहत 50 लाख डॉलर या उससे अधिक कीमत वाले दूसरे घर टैक्स के दायरे में आ सकते हैं। कुछ कॉन्डो और को-ऑपरेटिव अपार्टमेंट के लिए 10 लाख डॉलर से अधिक मूल्य की अलग सीमा भी रखी गई है।

इसका मतलब है कि केवल महंगा मकान खरीदने से किसी व्यक्ति पर यह टैक्स नहीं लगेगा। संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

इस प्रस्तावित टैक्स से प्रभावित हो सकने वाले अमीर लोगों में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और डेल टेक्नोलॉजीज के प्रमुख माइकल डेल जैसे बड़े कारोबारियों के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन व्यक्तियों पर वास्तव में कितना टैक्स लगेगा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

जुलाई में भेजे गए थे मकान मालिकों को नोटिस

ममदानी प्रशासन ने जुलाई 2026 में ही इस टैक्स को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी थी। शहर में ऐसी संपत्तियों के मालिकों को नोटिस भेजे गए थे, जिन पर नया टैक्स लागू होने की संभावना थी।

24 जुलाई को ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया था कि 50 लाख डॉलर से अधिक कीमत वाले दूसरे घरों के मालिकों को प्रशासन की ओर से पत्र भेजे जा रहे हैं।

इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हुआ। मकान मालिकों का आरोप था कि प्रशासन ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भी नोटिस भेज दिए, जिन पर टैक्स लागू नहीं होना चाहिए।

उनका कहना था कि शहर की गलती के कारण लोगों को यह साबित करने की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है कि वे अपने घर में नियमित रूप से रहते हैं।

कोर्ट के फैसले पर ममदानी ने क्या कहा?

अपील कोर्ट के फैसले के बाद मेयर जोहरान ममदानी ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही बेहद अमीर लोग अपनी संपत्ति बचाने और शहर को अधिक योगदान देने से बचने के लिए कानूनी रास्ते अपना रहे हैं।

ममदानी का कहना है कि जिन लोगों के पास न्यूयॉर्क में करोड़ों डॉलर के दूसरे घर हैं, उन्हें शहर की सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं के लिए भी योगदान देना चाहिए।

दूसरी तरफ मकान मालिकों के वकील रैंडी मास्ट्रो ने फैसले पर नाराजगी जताई। उनके मुताबिक, अदालत ने प्रशासन की प्रक्रिया में हुई गलतियों पर फैसला देने के बजाय याचिकाकर्ताओं के कानूनी अधिकार के आधार पर मामला खारिज कर दिया।

टैक्स से न्यूयॉर्क को कितनी कमाई हो सकती है?

ममदानी प्रशासन को उम्मीद है कि इस टैक्स से शहर को हर साल करीब 50 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। इस पैसे का इस्तेमाल सार्वजनिक सेवाओं और शहर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।

हालांकि, वास्तविक कमाई को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं। न्यूयॉर्क के कंप्ट्रोलर मार्क लेविन ने इससे लगभग 38 करोड़ डॉलर तक का राजस्व मिलने का अनुमान लगाया था।

फिलहाल कोर्ट के नए आदेश से टैक्स लागू करने की प्रक्रिया में आई एक बड़ी कानूनी रुकावट दूर हो गई है। लेकिन दो अन्य मुकदमे अभी बाकी हैं, जिनमें इस टैक्स की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

इसलिए अपील कोर्ट के फैसले को टैक्स पर अंतिम कानूनी मुहर नहीं माना जा सकता। अब अगली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि न्यूयॉर्क में महंगे दूसरे घर रखने वालों पर इस टैक्स का भविष्य क्या होगा।

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