ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ट्रंप के बयान के बाद ईरान की संसद ने चेतावनी दी है कि अगर सैन्य हमला हुआ, तो इजरायल और अमेरिकी ठिकाने वैध लक्ष्य होंगे।
America: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। इस बार मामला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टिप्पणियों और ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया, तो इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान के लिए वैध निशाना होंगे।
घालीबाफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के कई शहरों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों की मांगें और हिंसक घटनाओं ने देश में तनाव का माहौल बना दिया है।
संसद में 'डेथ टू अमेरिका' के नारे
ईरान की संसद में घालीबाफ के बयान के दौरान हंगामेदार माहौल देखने को मिला। कई सांसद मंच के पास पहुंच गए और जोर-जोर से 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगाने लगे। इस दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए हैं। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
घालीबाफ ने कहा कि अमेरिका को किसी भी गलत कदम से बचना चाहिए और ईरान पहले से ही आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने दोहराया कि अगर ईरान पर हमला किया गया तो इजरायल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे और जहाज ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान पहले से कहीं ज्यादा आजादी के करीब है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर आवश्यकता पड़ी तो अमेरिका ईरान में संभावित सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को ईरान पर सैन्य हमले के विकल्प दिखाए गए हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति के बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अमेरिकी सेना ने कहा है कि मध्य पूर्व में उसकी सेनाएं अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी
ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। स्थानीय मीडिया और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लगभग 2600 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव से जुड़ी हैं। इसके बावजूद इंटरनेट और फोन सेवाओं पर पाबंदी के कारण स्थिति की पूरी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है।
अमेरिका-ईरान तनाव के ऐतिहासिक संदर्भ
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले दशकों में दोनों देशों के बीच कई बार राजनीतिक और सैन्य टकराव के मामले सामने आए हैं। अमेरिकी सैन्य और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। वहीं, ईरान ने अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखने के लिए कई बार कड़े कदम उठाए हैं।
घालीबाफ का बयान इस ऐतिहासिक तनाव को और बढ़ा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका ने कोई सैन्य कार्रवाई की तो इसका जवाब सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसका मतलब यह है कि ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए पहले से ही तैयार है और किसी भी आक्रामक कदम को नजरअंदाज नहीं करेगा।










