ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन तेज हो गया है। महंगाई और आर्थिक संकट से नाराज लोग सड़कों पर उतरे। सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हालात बिगड़े। इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं। हिंसा में अब तक 42 लोगों की मौत की खबर आई है।
Iran Protest: ईरान में एक बार फिर सरकार के खिलाफ गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। देश के कई बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में उग्र विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाइयों के खिलाफ खुलकर विरोध जता रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं (international phone services) बंद करनी पड़ीं। इस पूरे आंदोलन के दौरान अब तक 42 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है।
महंगाई और आर्थिक संकट से नाराज जनता
ईरान में आम लोगों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। खाने-पीने के सामान से लेकर ईंधन तक, हर चीज आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों (economic sanctions) और कमजोर नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था दबाव में है। लोगों का कहना है कि उनकी आय घट रही है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसी असंतोष ने अब बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का रूप ले लिया है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई से और भड़के हालात
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल कर रही है। कई शहरों से ऐसी खबरें सामने आई हैं, जहां प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया। आंसू गैस, लाठीचार्ज और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाइयों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। लोगों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ भी सख्ती बरती जा रही है, जिससे गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया है।
8 जनवरी की रात बढ़ा तनाव, इंटरनेट सेवा बंद
8 जनवरी की रात ईरान में हालात अचानक और बिगड़ गए। जैसे ही विरोध प्रदर्शन तेज हुए, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए देशभर में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल सेवाएं बंद कर दीं।

सरकार का तर्क है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह लोगों की आवाज दबाने की कोशिश है। इंटरनेट बंद होने से न सिर्फ संवाद प्रभावित हुआ, बल्कि सही जानकारी तक पहुंच भी मुश्किल हो गई।
न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों की सख्त चेतावनी
ईरान की न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के प्रमुखों ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शन नहीं रुके तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आजादी और आजादी जैसे नारों के बीच सरकार का यह रुख लोगों में डर के साथ-साथ गुस्सा भी पैदा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि देश की स्थिरता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी बुनियादी मांगों को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
रजा पहलवी के आह्वान से बढ़ी हलचल
इस पूरे आंदोलन के बीच ईरान के पूर्व शाह के बेटे युवराज रजा पहलवी (Reza Pahlavi) ने भी प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। रजा पहलवी के पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले ईरान छोड़कर चले गए थे। उनके आह्वान के बाद कई इलाकों में प्रदर्शन और तेज हो गए, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई।
तेहरान समेत कई शहरों में गूंजे नारे
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही घड़ी में रात 8 बजे, तेहरान के अलग-अलग इलाकों में नारे गूंजने लगे। लोग अपने घरों की बालकनियों और सड़कों पर निकलकर सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। कई प्रदर्शनकारी रजा पहलवी के समर्थन में भी नजर आए। भीड़ में ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए। कुछ जगहों पर यह भी सुनने को मिला कि ‘यह आखिरी लड़ाई है’ और ‘पहलवी वापस लौटेगा’।
हर शहर और कस्बे तक फैला आंदोलन
विरोध प्रदर्शन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे। ईरान के छोटे शहरों और ग्रामीण कस्बों में भी लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बाजार और दुकानें बंद रहीं। इससे साफ है कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैला हुआ है। आम नागरिकों से लेकर व्यापारी वर्ग तक, सभी अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
42 लोगों की मौत और हजारों गिरफ्तार
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 2,270 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठनों ने इन मौतों और गिरफ्तारियों पर चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। सरकार की ओर से हालांकि मौतों के आंकड़ों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।











