ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग 15 दिन से जारी है। अमेरिका ने अब तक 12 अरब डॉलर खर्च किए। 11 सैनिक मारे गए और फ्यूल भरने वाले 5 विमान क्रैश हुए। तेल सप्लाई प्रभावित हुई।
America: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध 15 दिन से ज्यादा समय से जारी है। इस दौरान दोनों पक्षों ने गंभीर तबाही मचाई है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी कर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस सप्लाई को प्रभावित किया। वहीं अमेरिका और इजराइल ने लगातार हवाई हमले कर ईरान में भारी नुकसान पहुँचाया। इस जंग की वजह से दोनों पक्षों को मानवीय और आर्थिक तौर पर भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
युद्ध की स्थिति
अमेरिका को इस संघर्ष में अब तक कम से कम 11 सैनिकों की जान गंवानी पड़ी है। इसके अलावा युद्ध के दौरान फ्यूल भरने वाले पांच विमान भी क्रैश हो चुके हैं। अमेरिका ने B52 बमबर के जरिए तेहरान से इसफान तक लगातार बमबारी की है। इस हमले में ईरान की बुनियादी ढांचा और सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान हुआ है।
युद्ध का आर्थिक पहलू भी बेहद गंभीर है। अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद (NEC) के निदेशक केविन हैट ने बताया कि इस संघर्ष पर अमेरिका ने अब तक लगभग 12 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर दिए हैं। यह खर्च केवल सैन्य कार्रवाई, विमानों और हथियारों के संचालन तथा सैनिकों के रखरखाव पर हुआ है।
ओएमबी और अतिरिक्त बजट की संभावना
केविन हैट ने कहा कि फिलहाल अमेरिकी सरकार के पास युद्ध के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त धन के लिए कांग्रेस से अनुमति लेना पड़ सकता है, लेकिन इस समय स्थिति नियंत्रण में है। अमेरिका का प्रबंधन और बजट कार्यालय (OMB) और इसके निदेशक रसेल वॉट इस विषय की निगरानी कर रहे हैं।
इस खर्च और तबाही के बावजूद सवाल यह है कि इस संघर्ष से अमेरिका को क्या हासिल हुआ है। युद्ध ने केवल मानव और आर्थिक नुकसान बढ़ाया है, जबकि शांति की संभावना कम ही दिखाई दे रही है।

ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रोक लगाकर दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया। हालांकि उसने अमेरिका और इजराइल के सहयोगियों के लिए मार्ग खोला ताकि पूरी दुनिया को आर्थिक नुकसान कम से कम हो। फिर भी, इस कदम ने वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी।
ईरान ने अपने सैन्य ढांचे को मजबूत किया और अमेरिका-इजराइल के हमलों का जवाब देने के लिए मिसाइल और ड्रोन का उपयोग किया। इस जंग के चलते क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है और पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर भी असर पड़ा है।
क्या है अमेरिकी रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष में खुद को शांति दूत के रूप में पेश किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति ने इसे प्रश्नचिह्न में बदल दिया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों ने केवल ईरान में विनाश फैला दिया, जिससे मानव और आर्थिक क्षति बढ़ी।
इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी रणनीति का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्रीय प्रभुत्व बनाए रखना था। लेकिन इस रणनीति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इतनी भारी लागत और नुकसान के बाद भी लक्ष्य हासिल हो पाएगा।
आर्थिक और मानविक प्रभाव
12 अरब डॉलर के खर्च के अलावा, अमेरिका को अपने सैनिकों और विमानन उपकरणों का भी नुकसान हुआ। युद्ध ने न केवल ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में आर्थिक अस्थिरता पैदा की है। तेल की कीमतें बढ़ी हैं और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। मानव स्तर पर, इस संघर्ष ने स्थानीय आबादी के लिए जीवन मुश्किल बना दिया है।







