सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इज़राइल का समर्थन करने पर सहमति बना ली है। इस जानकारी की पुष्टि Middle East Eye ने अपनी रिपोर्ट में की है।
World News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के खिलाफ बढ़ते संघर्ष में अमेरिका और इजरायल को अप्रत्यक्ष समर्थन देने के संकेत दिए हैं। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक कई खाड़ी देश खुद को इस संघर्ष में तटस्थ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को अपने एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जबकि यूएई ने संकेत दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति के लिए तैयार है।
किंग फहद एयर बेस खोलने की चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने पश्चिमी क्षेत्र ताइफ में स्थित King Fahd Air Base को अमेरिकी सैन्य उपयोग के लिए उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। यह एयरबेस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेस पहले इस्तेमाल किए जा रहे Prince Sultan Air Base की तुलना में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों की मारक क्षमता से ज्यादा दूर स्थित है, जिससे यहां से सैन्य अभियान चलाना सुरक्षित माना जाता है।
यह एयरबेस जेद्दाह के करीब है, जो लाल सागर के किनारे स्थित एक बड़ा लॉजिस्टिक केंद्र बन चुका है, खासकर तब से जब Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने के कारण समुद्री आपूर्ति प्रभावित हुई है।

अमेरिका को नए ठिकानों की जरूरत
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका को नए सैन्य अड्डों की जरूरत महसूस हो रही है। रिपोर्टों में कहा गया है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो खाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त एयरबेस और लॉजिस्टिक सपोर्ट की आवश्यकता होगी। इसी कारण सऊदी अरब का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिका ने एशिया और अन्य क्षेत्रों से सैनिकों और उपकरणों को पश्चिम एशिया की ओर भेजना शुरू कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि सैन्य तैयारी बढ़ाई जा रही है।
UAE ने जताई लंबी लड़ाई की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, United Arab Emirates ने भी अमेरिका को संकेत दिया है कि वह इस संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना के लिए तैयार है।बताया जा रहा है कि यूएई के विदेश मंत्री Abdullah bin Zayed Al Nahyan ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत में कहा कि उनका देश नौ महीने तक चलने वाले युद्ध की स्थिति के लिए तैयार है और जल्दबाजी में संघर्ष खत्म करने के पक्ष में नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि खाड़ी देशों का धैर्य अब खत्म हो रहा है। पहले कई देश ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना चाहते थे, लेकिन लगातार हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण उनका रुख सख्त होता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हाल के हफ्तों में खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण तेल, गैस और समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है, जिससे क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा चिंता बढ़ गई है।









