एशियन गेम्स पदक विजेता हरमिलन बैंस ने उठाए सवाल: खेलों में सुधार, लेकिन असमानता अब भी बरकरार

एशियन गेम्स पदक विजेता हरमिलन बैंस ने खेलों में सुधार के दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रगति के बावजूद खिलाड़ियों के बीच असमानता अब भी बनी हुई है।

भारतीय एथलेटिक्स की जानी-मानी मध्यम दूरी धाविका और एशियन गेम्स पदक विजेता हरमिलन बैंस ने देश की खेल व्यवस्था को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने भारतीय खेलों में हो रहे सुधारों की सराहना करते हुए यह भी कहा कि खिलाड़ियों के बीच अवसर, सम्मान और करियर ग्रोथ को लेकर अब भी समानता की कमी बनी हुई है।

स्पोर्ट्स न्यूज़: Harmilan Bains, जो एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं, ने भारतीय खेलों की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि देश में खेलों का स्तर तेजी से सुधर रहा है, लेकिन खिलाड़ियों को मिलने वाले अवसर और सम्मान अब भी समान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सुविधाओं और खेल ढांचे में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन हर खिलाड़ी तक इसका लाभ एक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। 

हरमिलन बैंस के अनुसार, अगर सभी खिलाड़ियों को बराबरी से समर्थन, संसाधन और मौके मिलें, तो भारतीय खेलों का स्तर और भी तेजी से आगे बढ़ सकता है।

खेलों में सुधार, लेकिन असमानता अब भी बरकरार

हरमिलन बैंस ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में खेल ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने चिंता जताई कि सभी खिलाड़ियों को समान अवसर और पहचान नहीं मिलती। उनके अनुसार, “आज सुविधाएं पहले से बेहतर हैं, लेकिन हर खिलाड़ी को समान समर्थन और सम्मान नहीं मिलता।”

सरकारी नौकरियों और खेल करियर के बाद मिलने वाले अवसरों पर बात करते हुए हरमिलन ने स्पष्ट कहा कि सफलता पाने वाले खिलाड़ियों के बीच भी असमानता देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों को पदक जीतने के बाद तुरंत उच्च पदों पर नियुक्तियां मिल जाती हैं, जबकि समान प्रदर्शन करने वाले अन्य खिलाड़ियों को वही सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले के समय में पदक विजेताओं को सीधे उच्च प्रशासनिक पदों जैसे डीएसपी आदि पर नियुक्ति मिल जाती थी, जबकि अब ऐसे अवसर अपेक्षाकृत कम हो गए हैं।

खेलों से जन्म से जुड़ा सफर

अपने व्यक्तिगत जीवन को याद करते हुए हरमिलन बैंस ने बताया कि उनका खेलों से रिश्ता जन्म से पहले ही शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि उनकी मां गर्भावस्था के दौरान भी खेल ट्रायल्स में हिस्सा ले रही थीं, जिससे उनके जीवन की शुरुआत ही खेलों के वातावरण में हुई। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने बचपन से ही उन्हें खेलों के लिए प्रेरित किया और लगभग दो दशकों से अधिक समय से खेल उनके जीवन का हिस्सा रहा है।

हरमिलन ने आधुनिक खेलों में फिटनेस, रिकवरी और पोषण को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी एथलीट के प्रदर्शन के लिए ट्रेनिंग के बाद रिकवरी बेहद जरूरी है। सही आहार, प्रोटीन और पोषण खिलाड़ी की निरंतरता और प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में खिलाड़ियों को खेल विज्ञान को समझकर ही आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

छोटे स्तर की अकादमियों की भूमिका अहम

भारतीय खेलों के भविष्य पर बात करते हुए हरमिलन ने कहा कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने देश में खिलाड़ियों के लिए मजबूत मंच तैयार किया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जमीनी स्तर पर अभी और काम की जरूरत है। उनके अनुसार, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्पोर्ट्स अकादमियां इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ये अकादमियां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शुरुआती मार्गदर्शन और सही दिशा दे सकती हैं।

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