जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर बिना नाम लिए तंज कसा। उन्होंने कहा कि यदि वे चाय पी लेते तो काम समझ आता, लेकिन वे खुद को “तीस मार खां” समझते हैं।
जोधपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंगलवार को जोधपुर पहुंचे, जहां उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य और केंद्र सरकार दोनों पर जमकर निशाना साधा। अपने बयान में उन्होंने कई अहम मुद्दों—पानी की समस्या, विकास परियोजनाओं की धीमी गति, चुनाव प्रक्रिया में देरी और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति—को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
इस दौरान गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम लिए बिना उन पर तीखा तंज भी कसा, जिससे राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।
पानी संकट और विकास परियोजनाओं पर सरकार को घेरा
अशोक गहलोत ने जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी नहर और लिफ्ट कैनाल परियोजना के जरिए जोधपुर तक पानी पहुंचाने के लिए पिछले दो दशकों में व्यापक प्रयास किए गए थे, लेकिन वर्तमान में इन योजनाओं के प्रभावी संचालन में कमी देखी जा रही है।
गहलोत ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं, जिनमें जल आपूर्ति के तीसरे चरण के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये शामिल थे। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस पर उचित मॉनिटरिंग नहीं कर रही है, जिससे शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट बढ़ता जा रहा है।
अधूरी परियोजनाओं और सुविधाओं पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जोधपुर में पब्लिक लाइब्रेरी, सड़क किनारे पार्किंग, मेडिकल यूनिवर्सिटी और विभिन्न अस्पताल भवन जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, लेकिन उनमें न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कई अस्पताल भवन तैयार होने के बावजूद खाली पड़े हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। गहलोत के अनुसार यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी को दर्शाती है।
सामाजिक योजनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता
अशोक गहलोत ने राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई जगह पेंशन वितरण में देरी हो रही है और कुछ क्षेत्रों में महीनों से भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा, उन्होंने आरजीएचएस और चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
उनका कहना था कि इन योजनाओं के तहत अस्पतालों में इलाज और भुगतान व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं और मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा है।
पंचायत और नगर निकाय चुनावों पर टिप्पणी
गहलोत ने पंचायत और नगर निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के प्रावधानों की अनदेखी कर रही है, जबकि न्यायालय भी इस मुद्दे पर टिप्पणी कर चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और चुनाव प्रक्रिया में देरी चिंताजनक संकेत है। उनके अनुसार, यदि लोकतंत्र की संस्थाएं कमजोर होती हैं तो इसका सीधा असर आम जनता के अधिकारों पर पड़ेगा।

शेखावत पर बिना नाम लिए तीखा तंज
मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम लिए बिना उन पर राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि “यदि वे हमारे साथ एक-दो चाय पी लेते, तो हम उन्हें बता देते कि काम कैसे करवाए जाते हैं।”
गहलोत ने आगे कहा कि जोधपुर के विकास को लेकर अनुभव साझा करने की आवश्यकता थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “ये तो तीस मार खां हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।”
उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक बड़े तंज के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
विकास कार्यों के क्रेडिट पर विवाद
गहलोत ने जोधपुर में चल रहे एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया और कहा कि यह परियोजना उनके सुझाव पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा आगे बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में वर्तमान प्रतिनिधित्व होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर क्रेडिट को लेकर राजनीति की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोजती गेट और हैदर बिल्डिंग क्षेत्र के पुनर्विकास की डीपीआर पहले ही तैयार कर ली गई थी और यह एक महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजना है, जिसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
राजनीतिक बयान से बढ़ा सियासी तापमान
गहलोत के बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आगामी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों—पानी संकट, स्वास्थ्य सेवाएं, अधूरी परियोजनाएं और चुनावी देरी—ने राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।









