यूरोपियन चैंपियनशिप में केट ओ’कॉनर का ऐतिहासिक गोल्ड, हेप्टाथलॉन में रचा नया रिकॉर्ड

आयरलैंड की केट ओ’कॉनर ने बर्मिंघम यूरोपियन चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 6,751 अंकों के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ खिताब अपने नाम किया।

आयरलैंड की केट ओ’कॉनर ने बर्मिंघम यूरोपियन चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 6,751 अंक जुटाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। अंतिम 800 मीटर में दबाव के बावजूद उन्होंने जरूरी अंतर बनाए रखा और नीदरलैंड्स की एमा ओस्टरवेल को पीछे छोड़ा।

यूरोपियन चैंपियनशिप: आयरलैंड की एथलीट केट ओ’कॉनर ने बर्मिंघम में आयोजित यूरोपियन चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन का स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर की बड़ी उपलब्धि हासिल की। 25 वर्षीय ओ’कॉनर ने आखिरी इवेंट 800 मीटर में दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 6,751 अंक जुटाए, जो नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

800 मीटर में तय हुआ चैंपियन का फैसला

हेप्टाथलॉन के सातवें और अंतिम इवेंट 800 मीटर से पहले ओ’कॉनर अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी नीदरलैंड्स की एमा ओस्टरवेल के मुकाबले 51 अंक आगे थीं। स्वर्ण पदक सुनिश्चित करने के लिए उन्हें ओस्टरवेल से 3.4 सेकंड से ज्यादा पीछे नहीं रहना था।

फाइनल रेस में ओस्टरवेल ने 2 मिनट 10.87 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि ओ’कॉनर 2:11.74 के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इटली की स्वेवा गेरेविनी भी उनसे आगे रहीं। हालांकि, ओ’कॉनर ने जरूरी अंतर बनाए रखा और कुल 6,751 अंकों के साथ यूरोपियन चैंपियन बन गईं।  ओस्टरवेल ने 6,713 अंकों के साथ रजत पदक जीता, जबकि नीदरलैंड्स की सोफी डॉक्टर 6,664 अंकों के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

दो हफ्तों में दूसरा बड़ा गोल्ड

केट ओ’कॉनर के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में नॉर्दर्न आयरलैंड के लिए स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया था।

लगातार बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीतने के बाद ओ’कॉनर ने माना कि पिछले दो साल उनके लिए आसान नहीं रहे। उन्होंने कहा कि हर प्रतियोगिता के साथ दबाव बढ़ता गया और इस प्रतियोगिता में भी उन्हें शुरुआत से अंत तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

उनकी मौजूदा सफलता बताती है कि ओ’कॉनर ने दबाव के बावजूद अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखी है। यूरोपियन चैंपियनशिप का स्वर्ण उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

सात स्पर्धाओं में ऐसा रहा प्रदर्शन

हेप्टाथलॉन में खिलाड़ियों को सात अलग-अलग स्पर्धाओं में प्रदर्शन के आधार पर अंक मिलते हैं। ओ’कॉनर ने प्रतियोगिता के पहले दिन 100 मीटर हर्डल्स और 200 मीटर में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

उन्होंने 100 मीटर हर्डल्स में 13.30 सेकंड और 200 मीटर में 23.79 सेकंड का समय दर्ज किया। हाई जंप में उन्होंने 1.86 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि की बराबरी की, जबकि शॉटपुट में 13.96 मीटर का थ्रो किया।

दूसरे दिन भी उनकी शानदार फॉर्म जारी रही। लॉन्ग जंप में उन्होंने 6.55 मीटर की छलांग लगाई, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इसके बाद जैवलिन थ्रो में 50.16 मीटर का प्रदर्शन किया।

इन छह स्पर्धाओं के बाद ओ’कॉनर के खाते में 5,812 अंक थे और वह ओस्टरवेल से 51 अंक आगे थीं। अंतिम फैसला 800 मीटर में होना था, जहां ओ’कॉनर को अपनी बढ़त बचानी थी।

निर्णायक रेस में बढ़ गया था दबाव

800 मीटर की शुरुआत में ओ’कॉनर ने तेज रफ्तार के साथ बढ़त बनाने की कोशिश की। बाद में ओस्टरवेल ने रेस की कमान संभाल ली और आगे निकल गईं। ओ’कॉनर उनके पीछे बनी रहीं और लगातार अंतर पर नजर रखती रहीं।

ओस्टरवेल ने रेस जीत ली, लेकिन ओ’कॉनर जरूरी समय के भीतर फिनिश लाइन पार करने में सफल रहीं। आखिरी कुछ मीटर में उनका लक्ष्य रेस जीतने के बजाय स्वर्ण पदक सुरक्षित करना था।

ओ’कॉनर ने इस रेस को अपने जीवन की सबसे तनावपूर्ण 800 मीटर दौड़ में से एक बताया। उनके मुताबिक, उन्हें पता था कि पदक बचाने के लिए उन्हें कितने अंतर के भीतर रहना है। आयरिश समर्थकों की आवाज ने उन्हें आखिरी दो लैप में आगे बढ़ने का हौसला दिया।

दादी को समर्पित किया स्वर्ण पदक

ओ’कॉनर की इस जीत के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी है। इस साल की शुरुआत में उनकी दादी का निधन हो गया था। उन्होंने जीत के बाद कहा कि उनकी दादी परिवार में उनकी और उनके पिता की सबसे बड़ी समर्थकों में से एक थीं।

ओ’कॉनर ने अपने पिता की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में उनके पिता ने ट्रेनिंग के दौरान जिस तरह उनका साथ दिया, उसके लिए वह उन्हें पर्याप्त श्रेय नहीं दे पातीं। उनके लिए यह सपना केवल उनका अपना नहीं बल्कि उनके पिता का भी है।

उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह इस पदक को अपनी दादी को समर्पित करना चाहती हैं और उन्हें विश्वास है कि अगर उनकी दादी इस पल को देख पातीं तो खुशी से झूम उठतीं।

दबाव के बीच हासिल की बड़ी उपलब्धि

केट ओ’कॉनर के लिए बर्मिंघम की यह जीत सिर्फ एक स्वर्ण पदक नहीं है। यह उनके पिछले दो वर्षों की मेहनत, लगातार बढ़ते दबाव और व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच हासिल की गई उपलब्धि है।

25 साल की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण, वर्ल्ड चैंपियनशिप का रजत और अब यूरोपियन चैंपियनशिप का स्वर्ण उनके हालिया प्रदर्शन की निरंतरता को दर्शाता है। न्यूरी में जन्मी ओ’कॉनर ने इस प्रतियोगिता में 6,751 अंकों के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी कायम किया। सात स्पर्धाओं में उनके संतुलित प्रदर्शन और अंतिम 800 मीटर में दबाव संभालने की क्षमता ने उन्हें खिताब दिलाया।

उनकी जीत आयरलैंड के एथलेटिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण है। ओ’कॉनर ने दिखाया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के लिए केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि रणनीति, मानसिक मजबूती और दबाव को संभालने की क्षमता भी जरूरी होती है।

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