फर्जी नियुक्ति लेने वाला सहायक अध्यापक गिरफ्तार, कंपोजिट विद्यालय कालिक मवैया में अवैध अभिलेखों के सहारे पाई थी नौकरी

कंपोजिट विद्यालय कालिक मवैया में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले सहायक अध्यापक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले की जांच जारी है

उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले में शिक्षा विभाग को बदनाम करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहायक अध्यापक की नियुक्ति लेने वाले आरोपी शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कंपोजिट विद्यालय कालिक मवैया में अवैध और कूटरचित अभिलेखों का सहारा लेकर सरकारी नौकरी हासिल की थी और लंबे समय से विद्यालय में कार्यरत था।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग को कुछ समय पहले इस नियुक्ति को लेकर शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि कंपोजिट विद्यालय कालिक मवैया में तैनात एक सहायक अध्यापक की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज संदिग्ध हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच शुरू कराई गई। प्रारंभिक जांच में ही कई दस्तावेजों में गड़बड़ी के संकेत मिले, जिसके बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई।

जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी अभिलेखों में हेराफेरी कर उन्हें वैध दिखाने की कोशिश की थी। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर उसने न केवल नियुक्ति प्राप्त की, बल्कि लंबे समय तक वेतन और अन्य सरकारी सुविधाओं का भी लाभ उठाता रहा। जब संबंधित संस्थानों और बोर्ड से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी सेवा में छलपूर्वक नियुक्ति प्राप्त करने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सहायक अध्यापक को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने प्रारंभिक तौर पर अपने अपराध को स्वीकार किया है। उसने बताया कि नौकरी पाने के लिए उसने फर्जी अभिलेखों का सहारा लिया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में कोई गिरोह या अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। आशंका जताई जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने में किसी दलाल या नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि अब जिले के अन्य विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी दोबारा जांच कराई जा सकती है, ताकि इस तरह की फर्जीवाड़े की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। विभाग ने साफ किया है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले लोग न केवल योग्य उम्मीदवारों का हक मारते हैं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है, वहीं पुलिस और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटे हुए हैं। प्रशासन का दावा है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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