FCI का बड़ा वित्तीय कदम: खाद्यान्न आपूर्ति स्थिर रखने के लिए जुटाएगा 50,000 करोड़ रुपये

Food Corporation of India ने खाद्यान्न आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए बड़ा वित्तीय कदम उठाने की योजना बनाई है। संस्था लगभग ₹50,000 करोड़ जुटाकर स्टोरेज, खरीद

Food Corporation of India (FCI) तीन महीने की अवधि के लिए देश के विभिन्न अनुसूचित बैंकों से 50,000 करोड़ रुपये का अल्पकालिक कर्ज जुटाने जा रही है।

बिजनेस न्यूज़: देश की प्रमुख खाद्य प्रबंधन एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने वित्तीय स्थिरता और खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। FCI देशभर के अनुसूचित बैंकों से 50,000 करोड़ रुपये का अल्पकालिक कर्ज जुटाने जा रहा है। यह कर्ज तीन महीने की अवधि के लिए होगा और इसे खाद्यान्न की खरीद एवं वितरण से जुड़े नकदी प्रवाह असंतुलन को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।

22 मई को खुलेंगी निविदाएं, ग्रीन शू विकल्प भी शामिल

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस कर्ज प्रक्रिया के तहत 22 मई को जमा निविदाएं (bids) खोली जाएंगी। इसमें अतिरिक्त 25,000 करोड़ रुपये का ग्रीन शू विकल्प भी शामिल किया गया है, जिससे कुल संभावित उधारी सीमा 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह व्यवस्था बैंकिंग प्रणाली से आवश्यक तरलता जुटाने के लिए बनाई गई है ताकि FCI की परिचालन जरूरतों में कोई बाधा न आए।

यह अल्पकालिक उधारी बिना किसी प्रतिभूति (unsecured borrowing) के आधार पर ली जाएगी। खास बात यह है कि खाद्य ऋण के लिए भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 6,000 करोड़ रुपये की गारंटी इस नई उधारी पर लागू नहीं होगी। इससे स्पष्ट है कि यह व्यवस्था मुख्य रूप से बाजार-आधारित वित्तीय प्रबंधन मॉडल पर आधारित होगी।

चरणबद्ध तरीके से होगा धन का उपयोग

निविदा की शर्तों के अनुसार, कर्ज का वितरण FCI की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव 31 अगस्त तक वैध रहेंगे।सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीद और वितरण प्रणाली में किसी प्रकार की नकदी की कमी न हो और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) सुचारु रूप से चलती रहे।

भारतीय खाद्य निगम देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ है। यह संस्था, किसानों से MSP पर अनाज की खरीद करती है. राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है. विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करती है. इसलिए इसके वित्तीय प्रवाह में स्थिरता राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

2026-27 में 3.449 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य

सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 3.449 करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान सत्र में FCI और राज्य एजेंसियों ने अब तक 2.297 करोड़ टन गेहूं की खरीद कर ली है। राज्यों के अनुसार खरीद स्थिति इस प्रकार है:

  • पंजाब: 1.051 करोड़ टन (सबसे अधिक योगदान)
  • मध्य प्रदेश: 67.2 लाख टन
  • हरियाणा: 25.8 लाख टन
  • राजस्थान: 17.7 लाख टन

पंजाब अब भी देश का सबसे बड़ा गेहूं आपूर्तिकर्ता राज्य बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि FCI की यह उधारी व्यवस्था बढ़ती खरीद लागत और वितरण दबाव को संतुलित करने के लिए आवश्यक कदम है। बड़े पैमाने पर MSP खरीद और सब्सिडी आधारित वितरण प्रणाली के कारण संस्था पर नकदी प्रवाह का दबाव बढ़ता रहता है।

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