सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिनों की बढ़ी हलचल, शावकों के साथ दिखीं ST-19 और ST-2302

सरिस्का बफर जोन में बाघिन ST-19 और ST-2302 अपने शावकों के साथ नजर आई। बढ़ते मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग ने लोगों के लिए अलर्ट और एडवाइजरी जारी की है।

सरिस्का बफर जोन में बाघिन ST-19 और ST-2302 अपने शावकों के साथ लगातार नजर आ रही हैं। वन विभाग ने सुरक्षा को देखते हुए अलर्ट जारी किया है और लोगों से बिना अनुमति जंगल में प्रवेश न करने की अपील की है।

अलवर: राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्र Sariska Tiger Reserve में इन दिनों बाघिनों की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। बफर जोन और आसपास के इलाकों में बाघिन ST-19 और ST-2302 अपने शावकों के साथ लगातार मूवमेंट कर रही हैं, जिसके बाद वन विभाग ने सुरक्षा को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है।

इस बढ़ती गतिविधि ने जहां वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों में उत्साह बढ़ाया है, वहीं वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बफर जोन में लगातार दिख रहीं बाघिनें

वन विभाग के अनुसार सरिस्का के बफर क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 11 बाघ और बाघिन सक्रिय रूप से विचरण कर रहे हैं। इनमें बाघिन ST-19 और ST-2302 की गतिविधियां सबसे अधिक देखी जा रही हैं।

बाघिन ST-19 अपने चार शावकों के साथ बारा लिवारी, श्योदानपुरा, फायरिंग रेंज और जम्मुशाना क्षेत्र में मूव कर रही है। वहीं दूसरी बाघिन ST-2302 अपने दो शावकों के साथ बाला किला, अंधेरी चौड़ की होदी, किशन कुंड नाला और जयविलास के आसपास सक्रिय है।

शावकों के साथ बाघिनों का व्यवहार क्यों होता है आक्रामक?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जब बाघिनें अपने शावकों के साथ होती हैं, तो वे सामान्य से अधिक सतर्क और आक्रामक हो जाती हैं। इस दौरान किसी भी तरह की मानवीय गतिविधि या हस्तक्षेप उन्हें खतरे के रूप में दिखाई दे सकता है।

इसी कारण वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:

  • जंगलों में बिना अनुमति प्रवेश न करें
  • पैदल ट्रैकिंग या ऑफ-ट्रेल गतिविधियों से बचें
  • वन क्षेत्रों में शोर या भीड़ न करें
  • किसी भी वन्यजीव के करीब जाने की कोशिश न करें

लापरवाही की स्थिति में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

वन विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट

Rajasthan Forest Department ने बाघिनों की बढ़ती मूवमेंट को देखते हुए बफर जोन में विशेष निगरानी बढ़ा दी है। वनकर्मियों की टीम लगातार गश्त कर रही है और संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप और ट्रैकिंग सिस्टम को सक्रिय किया गया है।

विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों को सलाह दी है कि वे वन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश न करें और निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें।

पर्यटकों में बढ़ा उत्साह, टाइगर सफारी में बढ़ी भीड़

बाघिनों और शावकों की लगातार साइटिंग के बाद सरिस्का में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई वन्यजीव प्रेमी और फोटोग्राफर इस समय टाइगर सफारी के लिए पहुंच रहे हैं।

वन क्षेत्र में हाल के दिनों में कई बार बाघिन ST-2302 को पानी के स्रोतों के पास देखा गया, जहां वह अपने शावकों के साथ आराम करती हुई नजर आई।

फोटोग्राफरों ने कैद किए दुर्लभ पल

प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और बॉलीवुड से जुड़े राहुल दत्ता ने सरिस्का में कई दिनों तक सफारी की और बाघिनों तथा उनके शावकों के दुर्लभ क्षणों को कैमरे में कैद किया।

उन्होंने बताया कि कई बार बाघिन अपने शावकों के साथ वाटर प्वाइंट के आसपास दिखाई दी, जहां वे पानी पीते और आराम करते नजर आए। इस दौरान शावकों की हरकतें और बाघिन का सतर्क व्यवहार कैमरे में रिकॉर्ड किया गया।

गर्मी के मौसम में क्यों बढ़ती है बाघों की गतिविधि?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल से जून के बीच गर्मी के मौसम में बाघ अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इस दौरान पानी के स्रोत सीमित हो जाते हैं, जिससे बाघ और बाघिन बार-बार वाटर प्वाइंट के आसपास आते हैं।

Wildlife behavior seasonal movement के अनुसार, गर्मी के मौसम में शिकार और पानी की उपलब्धता के कारण वन्यजीवों की गतिविधि केंद्रित हो जाती है।

शावकों की मौजूदगी से बढ़ता जोखिम

ST-2302 और ST-19 दोनों बाघिनें अपने-अपने शावकों के साथ देखी जा रही हैं। वन विभाग के अनुसार शावकों की मौजूदगी के कारण बाघिनें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं और किसी भी बाहरी हलचल पर तेजी से प्रतिक्रिया कर सकती हैं।

  • इसी वजह से बफर जोन में:
  • पैदल आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित
  • ट्रैकिंग पर विशेष निगरानी
  • सफारी रूट्स पर सीमित प्रवेश
  • सुरक्षा गार्डों की तैनाती बढ़ाई गई
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका

वन विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि लोग नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं। पिछले वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां जंगल के भीतर या आसपास मानव गतिविधियों के कारण दुर्घटनाएं हुई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि बाघों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

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