डमी कैंडिडेट से परीक्षा दिलाकर बना वनरक्षक, एसओजी जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा

Jodhpur में वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 में डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया। एसओजी ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।

वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 में डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। एसओजी जांच के बाद जोधपुर के महामंदिर थाने में आरोपी युवक और उसके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

जोधपुर: राजस्थान वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। एसओजी जांच में खुलासा हुआ कि एक युवक ने लिखित परीक्षा में अपनी जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर चयन हासिल किया और बाद में कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी प्राप्त कर वेतन भी लेता रहा।

एसओजी जांच में खुला भर्ती फर्जीवाड़े का मामला

राजस्थान में वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जांच में पता चला है कि एक युवक ने लिखित परीक्षा में खुद की जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर परीक्षा पास की और बाद में सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

जांच रिपोर्ट के आधार पर जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के महामंदिर थाने में आरोपी विकास बिश्नोई और उसके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

फोटो और हस्ताक्षर के मिलान में सामने आई सच्चाई

एसओजी को कर्मचारी चयन बोर्ड से मिले दस्तावेजों की जांच के दौरान गड़बड़ी का पता चला। जांच में सामने आया कि लोहावट थाना क्षेत्र के कालीराना गांव निवासी विकास बिश्नोई ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया था।

13 नवंबर 2022 को सेंट एनी बीसेंट स्कूल परीक्षा केंद्र पर हुई लिखित परीक्षा के रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि आवेदन पत्र में लगी फोटो और हस्ताक्षर परीक्षा केंद्र के उपस्थिति पत्रक से मेल नहीं खा रहे थे। इसके बाद एसओजी ने निष्कर्ष निकाला कि परीक्षा में विकास की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने बैठकर पेपर दिया था।

फर्जी दस्तावेजों से हासिल की सरकारी नौकरी

एसओजी जांच में यह भी सामने आया कि लिखित परीक्षा के बाद आरोपी ने मई 2023 में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में हिस्सा लिया और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस दौरान कथित तौर पर दस्तावेजों में कांट-छांट कर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए।

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आरोपी ने वनरक्षक के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से सरकारी वेतन भी ले रहा था।

पुलिस अब गिरोह की तलाश में जुटी

मामले में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद एसओजी के डीआईजी परिस अनिल देशमुख ने जोधपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद महामंदिर थाना पुलिस ने आरोपी और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पुलिस ने राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक, अब इस मामले की विस्तृत जांच एडीसीपी (पूर्व) वीरेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है।

पुलिस अब डमी कैंडिडेट और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भर्ती परीक्षा में इस तरह का फर्जीवाड़ा किसी बड़े गिरोह के जरिए किया गया था या नहीं।

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