FTA के बाद यूरोप में भारत का फायदा, पड़ोसी देशों की घटेगी प्रतिस्पर्धा

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से भारतीय उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस, पाकिस्तान और बांग्लादेश की यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।

भारत-ईयू FTA से भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिली है। इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश के टेक्सटाइल निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रभावित होगी और दक्षिण एशियाई व्यापारिक समीकरण बदलेंगे।

India-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। यह समझौता न केवल भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि इसके पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए चुनौती भी खड़ी करता है। भारत-ईयू FTA के तहत भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा, जिससे पाकिस्तान और बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रभावित होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता दक्षिण एशिया में टेक्सटाइल और वस्त्र निर्यात के परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाएगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश यूरोपीय बाजार के सबसे बड़े निर्यातक रहे हैं। लेकिन अब भारतीय माल को 93% उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलने से उनकी यह बढ़त कम हो जाएगी।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के टेक्सटाइल बाजार में खतरा

पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा टेक्सटाइल और परिधान पर निर्भर है। यूरोपीय बाजार इनके लिए सबसे बड़ा निर्यात केंद्र रहा है। पाकिस्तान के ट्रेडिंग संगठन ने इसे भारत द्वारा खोला गया "आर्थिक मोर्चा" बताया है। भारत-ईयू FTA के कारण इन देशों को यूरोपीय बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

पहले तक, पाकिस्तान और बांग्लादेश को यूरोपीय बाजार में विशेष छूट और कोटा मिलते थे। पाकिस्तान को GSP प्लस और बांग्लादेश को EBA (Everything But Arms) जैसी योजनाओं के तहत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला था। इसके कारण दोनों देशों के टेक्सटाइल निर्यातकों को लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिला।

भारत को कैसे मिला फायदा

FTA के बाद यूरोप में भारत का फायदा, पड़ोसी देशों की घटेगी प्रतिस्पर्धा

भारत को अब यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि पहले उसे MFN (Most Favoured Nation) टैरिफ दरों का सामना करना पड़ता था। टेक्सटाइल पर लगभग 12% और समुद्री उत्पादों पर 26% टैरिफ लगता था। FTA के बाद भारतीय उत्पाद बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यूरोप भेजे जा सकेंगे। इससे भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पड़ोसी देशों के लिए चुनौती खड़ी होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। 2024 में भारत-ईयू का द्विपक्षीय व्यापार लगभग €120 बिलियन था। अब FTA के साथ भारतीय उत्पाद यूरोप में बेहतर कीमत और गुणवत्ता के साथ पहुंचेंगे, जिससे उनकी हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की चिंता

पाकिस्तान के EU निर्यात का लगभग 75.8% टेक्सटाइल और कपड़े हैं। वहीं, बांग्लादेश के EU आयात का 94% हिस्सा टेक्सटाइल का है। दोनों देशों की विदेशी मुद्रा आय का एक बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है। भारत को FTA के तहत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से यूरोपीय खरीदार अब भारतीय माल की ओर रुख कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए अपनी विदेशी आय बचाने की चुनौती को बढ़ा देता है। यूरोपीय खरीदार अब अधिक स्थिर और प्रतिस्पर्धी भारतीय बाजार को प्राथमिकता देंगे।

पाकिस्तान और बांग्लादेश के EU व्यापार संबंध

पाकिस्तान और EU का व्यापार 2004 के सहयोग समझौते पर आधारित है। पाकिस्तान को 2014 से GSP प्लस दर्जा मिला हुआ है। इसके तहत यूरोपीय संघ लगभग 85% पाकिस्तानी निर्यात पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस देता है। 2024 में पाकिस्तान का EU के साथ कुल द्विपक्षीय व्यापार €12 बिलियन था।

बांग्लादेश को भी LDC (Least Developed Country) का दर्जा मिलने के कारण EBA व्यवस्था के तहत ड्यूटी-फ्री और कोटा-फ्री पहुंच मिली है। 2023 में बांग्लादेश का €17.1 बिलियन का निर्यात इससे प्रभावित हुआ। EU बांग्लादेश का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।

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