G20 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में बाजारों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और कम कीमत वाले सामान की भरमार के मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
G20 Trade Talks: अमेरिका के मिल्वॉकी में हुई G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में वैश्विक व्यापार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन औद्योगिक जरूरत से ज्यादा उत्पादन और वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी जैसे विषयों पर व्यापक सहमति नहीं बन सकी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बैठक को रचनात्मक बताया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि कुछ कठिन मुद्दे अभी समाधान से दूर हैं।
अमेरिका की मेजबानी में हुई इस बैठक के एजेंडे में structural excess capacity and production, forced labor, Most-Favored-Nation (MFN) व्यवस्था और खाद्य व्यापार से जुड़े प्रतिबंध प्रमुख विषय रहे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, वॉशिंगटन इन मुद्दों पर G20 देशों के बीच कार्रवाई की जरूरत को लेकर सहमति बनाने की कोशिश कर रहा था।
जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर बनी चिंता, लेकिन समाधान पर मतभेद
बैठक में औद्योगिक क्षमता और मांग के बीच असंतुलन यानी excess capacity का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि जब किसी देश में घरेलू मांग की तुलना में उत्पादन बहुत अधिक होता है, तो अतिरिक्त सामान वैश्विक बाजारों में पहुंचता है। इससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और दूसरे देशों के उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धी परिस्थितियां बदल सकती हैं।
अमेरिका ने विशेष रूप से चीन की औद्योगिक नीतियों और स्टील समेत कई क्षेत्रों में अतिरिक्त उत्पादन को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, इस मुद्दे से निपटने के तरीके को लेकर G20 के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण बने हुए हैं। बैठक के बाद भी इस विषय पर कोई व्यापक समझौता सामने नहीं आया।
इसी बीच, G20 बैठक से अलग Global Forum on Steel Excess Capacity की मंत्रिस्तरीय बैठक में 28 बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं ने स्टील की अतिरिक्त वैश्विक क्षमता से निपटने के लिए एक अलग ढांचे पर सहमति बनाई। इसे Milwaukee Framework नाम दिया गया है। हालांकि, यह व्यवस्था G20 के सभी सदस्यों के बीच समझौते के समान नहीं है।
अमेरिका-चीन व्यापार मतभेद भी एजेंडे में

अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से चीन की औद्योगिक नीतियों को लेकर सवाल उठाता रहा है। वॉशिंगटन का कहना है कि स्टील के अलावा ऑटोमोबाइल, बैटरी, पेपर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है। ग्रीर ने अपने संबोधन में कहा कि excess capacity कोई नया मुद्दा नहीं है और G20 देशों ने करीब एक दशक पहले भी इस समस्या से निपटने की प्रतिबद्धता जताई थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, अब इसे लेकर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव ने बढ़ाई जटिलता
G20 बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों में भी तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच टैरिफ और आयात प्रतिबंधों को लेकर विवाद चल रहा है। बैठक के दौरान अमेरिकी और कनाडाई अधिकारियों ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर भी चर्चा की। कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने नियम-आधारित और पूर्वानुमान योग्य व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। दूसरी ओर, ग्रीर ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी लंबित हैं और उनका समाधान आसान नहीं है।
फोर्स्ड लेबर पर भी नहीं बनी व्यापक सहमति
G20 वार्ता में forced labor यानी जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के वैश्विक व्यापार पर रोक लगाने का मुद्दा भी शामिल था। अमेरिकी प्रशासन ने इसे अपनी प्राथमिकताओं में रखा था और चाहता है कि वैश्विक सप्लाई चेन में ऐसे श्रम का इस्तेमाल रोकने के लिए देश अधिक ठोस कदम उठाएं। हालांकि, इस विषय पर भी G20 स्तर पर व्यापक सहमति नहीं बन सकी। अमेरिकी पक्ष ने कुछ देशों के ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की प्रतिबद्धता नहीं जताने पर आपत्ति दर्ज की।











