झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। इससे पहले अमन साहू भी एनकाउंटर में मारा गया था। दोनों कभी अपराध की दुनिया में सहयोगी थे, लेकिन बाद में गैंगवार के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए।
धनबाद: Gangster Sujit Sinha की पुलिस मुठभेड़ में मौत के साथ झारखंड के सबसे चर्चित गैंगवार का अंत माना जा रहा है। कभी एक साथ अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे अमन साहू और सुजीत सिन्हा बाद में वर्चस्व की लड़ाई में आमने-सामने आ गए थे। अब दोनों का अंत पुलिस एनकाउंटर में होने से यह मामला फिर चर्चा में है।
जेल शिफ्टिंग के दौरान मुठभेड़ में हुई सुजीत सिन्हा की मौत
सुजीत सिन्हा की मौत के बाद झारखंड के अपराध जगत का एक और बड़ा अध्याय समाप्त होता नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज जेल से धनबाद जेल ले जाते समय जामताड़ा के पास पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया। इसी दौरान सुजीत सिन्हा ने शौच जाने का बहाना बनाकर भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि उसने एक जवान का हथियार छीनने का भी प्रयास किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में हुई मुठभेड़ में वह मारा गया।

इससे पहले कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू की भी पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। दोनों घटनाओं के बाद यह संयोग चर्चा का विषय बन गया है कि झारखंड के दो बड़े गैंगस्टरों की कहानी लगभग एक जैसे घटनाक्रम के साथ समाप्त हुई।
पलामू से शुरू हुआ अपराध का नेटवर्क
सुजीत सिन्हा ने अपने अपराध की शुरुआत पलामू जिले से की थी। धीरे-धीरे उसने रांची, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद और कोयलांचल क्षेत्र तक अपना नेटवर्क फैला लिया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ रंगदारी, उगाही, ठेकेदारी में दखल और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज थे।
जांच एजेंसियों का आरोप रहा कि जेल में बंद रहने के बावजूद वह अपने गिरोह का संचालन करता था। कारोबारी, ठेकेदार और कई उद्योगों से जुड़े लोगों से रंगदारी मांगने के आरोप भी उस पर लगते रहे। लंबे समय तक वह झारखंड पुलिस के लिए सबसे वांछित अपराधियों में शामिल रहा।
दोस्ती से शुरू हुई दुश्मनी
अमन साहू और सुजीत सिन्हा कभी अपराध जगत में एक-दूसरे के करीबी माने जाते थे। समय के साथ दोनों के बीच प्रभाव क्षेत्र और गैंग के विस्तार को लेकर विवाद बढ़ने लगा। यही मतभेद बाद में खूनी गैंगवार में बदल गया। दोनों गिरोहों के बीच लंबे समय तक वर्चस्व की लड़ाई चलती रही और कई आपराधिक घटनाओं में दोनों का नाम सामने आता रहा।
झारखंड के अपराध जगत में इन दोनों गैंगस्टरों की प्रतिद्वंद्विता लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। पुलिस लगातार दोनों गिरोहों के नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश करती रही और कई सहयोगियों को गिरफ्तार भी किया गया।
झारखंड के अपराध इतिहास का एक अध्याय समाप्त
सुजीत सिन्हा की मौत के बाद पुलिस का मानना है कि राज्य के संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी भी उसके गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
अमन साहू और सुजीत सिन्हा, दोनों कभी झारखंड के सबसे प्रभावशाली गैंगस्टरों में गिने जाते थे। कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच उनके नाम का खौफ था। अब दोनों की मौत के साथ राज्य के अपराध इतिहास का एक चर्चित अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन पुलिस के सामने चुनौती अब उनके नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की बनी हुई है।












