गयाजी में आज से दो दिवसीय किसान मेले का आयोजन शुरू हो गया है, जिसे लेकर किसानों में उत्साह का माहौल है। जिले के विभिन्न प्रखंडों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में किसान इस मेले में भाग लेने पहुंचे हैं। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस मेले का उद्देश्य खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।
मेले का उद्घाटन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कृषि अधिकारियों द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि आज के समय में एक सशक्त व्यवसाय भी बन चुकी है। यदि किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
इस मेले की सबसे खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक खेती करने वाले अनुभवी किसान अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कई ऐसे किसान मंच पर आए जिन्होंने वर्षों से रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए प्राकृतिक तरीकों से खेती की और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि देसी बीज, फसल चक्र, मिश्रित खेती और पशुपालन को साथ जोड़कर खेती करने से लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
जैविक खेती से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। विभिन्न स्टॉलों पर जैविक धान, गेहूं, दालें, सब्जियां, फल, शहद, अचार, मसाले और मिलेट्स जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। कई स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी अपने उत्पादों के साथ मेले में शामिल हुए हैं। यहां आने वाले किसान न केवल उत्पादों को देख रहे हैं, बल्कि उनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के तरीकों की भी जानकारी ले रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मिट्टी परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। किसान अपनी मिट्टी के नमूने लेकर आए हैं, जिनकी जांच कर उन्हें उर्वरता की स्थिति और उपयुक्त फसल के बारे में सलाह दी जा रही है। इसके अलावा जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
मेले में कृषि यंत्रीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। आधुनिक कृषि उपकरणों जैसे मिनी ट्रैक्टर, पावर टिलर, रीपर, सीड ड्रिल और मल्चिंग मशीन की प्रदर्शनी लगाई गई है। किसानों को बताया जा रहा है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत इन उपकरणों पर अनुदान उपलब्ध है। मौके पर ही संबंधित विभाग के अधिकारी किसानों को आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दे रहे हैं।
सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए अलग काउंटर बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना, जैविक खेती प्रोत्साहन योजना और कृषि यंत्रीकरण योजना से जुड़ी जानकारी किसानों को दी जा रही है। कई किसानों ने मौके पर ही पंजीकरण कराया और योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन भी किया।
मेले में महिला किसानों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जैविक खाद, अचार, पापड़, मसाले और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है। इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
विशेषज्ञों ने किसानों को बाजार से जुड़ने के नए तरीकों के बारे में भी जानकारी दी। ई-नाम पोर्टल, ऑनलाइन मार्केटिंग और सीधे उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुंचाने के मॉडल पर चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि यदि वे गुणवत्ता और पैकेजिंग पर ध्यान दें तो जैविक उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मेले किसानों को नई दिशा देते हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही खेती को टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है। मेले में आयोजित संवाद सत्रों में किसानों ने अपनी समस्याएं भी रखीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया।
गयाजी का यह किसान मेला केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन गया है जहां किसान आपस में अनुभव साझा कर रहे हैं, नई तकनीक सीख रहे हैं और भविष्य की खेती की दिशा तय कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस मेले से प्रेरित होकर अधिक से अधिक किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा।











