गाजा शांति योजना पर फिर अटका पेंच, कुशनर की इजरायल-हमास वार्ता से नहीं निकला रास्ता

गाजा शांति योजना को आगे बढ़ाने के लिए जेरेड कुशनर ने इजरायल और हमास से बातचीत की, लेकिन हमास के निरस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी पर सहमति नहीं बनी।

गाजा शांति योजना को बचाने के लिए अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर ने हमास और इजरायल से बातचीत की, लेकिन दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर कायम हैं। हमास पहले इजरायली वापसी चाहता है, जबकि इजरायल पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त मान रहा है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच उनके विशेष दूत जेरेड कुशनर ने इजरायल और हमास के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन दो दिनों की कूटनीतिक कवायद के बाद भी कोई बड़ा समझौता सामने नहीं आया। वार्ता में सबसे बड़ा विवाद हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा से इजरायली सेना की वापसी के क्रम को लेकर है।

हमास और इजरायल के बीच मुख्य मतभेद

जेरेड कुशनर ने रविवार को मिस्र में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हय्या से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन उन्होंने यरुशलम में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कई घंटे तक बातचीत की। इन बैठकों का उद्देश्य ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित शांति रूपरेखा को फिर से पटरी पर लाना था। हालांकि, बातचीत के बाद दोनों पक्ष अपनी मूल मांगों पर कायम दिखाई दिए।

अमेरिका की प्रस्तावित योजना में हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण के बदले इजरायली सैनिकों की गाजा से चरणबद्ध वापसी का प्रावधान है। योजना में गाजा के भविष्य के प्रशासन और पुनर्निर्माण को लेकर भी व्यवस्था की बात कही गई है। लेकिन इसके क्रियान्वयन का सबसे अहम सवाल यह है कि पहले कौन कदम उठाएगा—हमास हथियार छोड़ेगा या इजरायल अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा।

इजरायल की शर्त पर अड़े नेतन्याहू

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण से पहले इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इजरायल का तर्क है कि हमास के पास हथियार और सैन्य क्षमता रहने की स्थिति में सेना की वापसी से भविष्य में फिर बड़े हमले का खतरा पैदा हो सकता है।

इजरायली पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि गाजा का व्यापक पुनर्निर्माण हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण और क्षेत्र के सैन्यीकरण के अंत के बाद ही शुरू होना चाहिए। बैठक के बाद दायर किए गए बयानों में निरस्त्रीकरण और गाजा में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग कार्य समूह बनाने की बात सामने आई है।

हमास की अलग मांग

दूसरी ओर, हमास ने अमेरिकी रोडमैप पर सिद्धांत रूप में सहमति जताई है, लेकिन उसका कहना है कि योजना लागू करने से पहले इजरायल को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी। हमास इजरायली हमलों को रोकने और गाजा से इजरायली सैन्य बलों की वापसी की मांग कर रहा है।

यही मुद्दा वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। दोनों पक्ष शांति योजना के अंतिम लक्ष्य से अधिक उसके क्रम और समयसीमा पर असहमत हैं। इजरायल पहले पूर्ण निरस्त्रीकरण चाहता है, जबकि हमास इजरायली सैन्य कार्रवाई और कब्जे में कमी को शुरुआती कदम के रूप में देखता है।

अमेरिकी दूत ने दोनों पक्षों को साधने की कोशिश की

कुशनर की हालिया कूटनीतिक सक्रियता को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने लंबे अंतराल के बाद हमास के नेताओं के साथ सीधे बातचीत की। इसके बाद नेतन्याहू के साथ उनकी बैठक हुई। इससे अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों के बीच सीधे संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश का संकेत मिलता है।

कुशनर ने बातचीत के बाद सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर किसी निर्णायक समझौते की घोषणा नहीं हुई। एक अमेरिकी अधिकारी ने बैठकों को उपयोगी और विस्तृत बताया, जबकि अन्य रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच अभी भी महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।

गाजा के पुनर्निर्माण पर भी अटका मामला

गाजा के पुनर्निर्माण को लेकर भी शांति योजना में बड़ा सवाल बना हुआ है। युद्ध के कारण क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पुनर्निर्माण के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट करना जरूरी होगा।

इजरायल का कहना है कि हमास के हथियारबंद ढांचे को समाप्त किए बिना बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण शुरू करना जोखिम भरा होगा। इसके विपरीत, फिलिस्तीनी पक्ष का तर्क है कि नागरिक आबादी की तत्काल जरूरतों को सुरक्षा संबंधी लंबी बातचीत से अलग नहीं किया जा सकता। इसी कारण शांति योजना के सुरक्षा और मानवीय पहलुओं को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव

इस कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी है। इजरायल में आगामी अक्टूबर चुनाव को देखते हुए गाजा नीति उनके लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गई है। ऐसे में नेतन्याहू के लिए हमास के खिलाफ सैन्य रुख में बड़ी नरमी करना राजनीतिक रूप से मुश्किल माना जा रहा है।

इजरायली सरकार के भीतर भी हमास के भविष्य और गाजा से सेना की वापसी को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। यही वजह है कि अमेरिकी प्रस्ताव पर चर्चा के बावजूद इजरायल तत्काल सैन्य वापसी की प्रतिबद्धता से बचता दिखाई दे रहा है।

शांति योजना का अगला रास्ता क्या?

अमेरिकी प्रयासों के बाद अब निगाह इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष चरणबद्ध समझौते के लिए कोई व्यावहारिक फार्मूला स्वीकार कर सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में हमास के हथियारों को हटाने और गाजा के सैन्यीकरण को समाप्त करने की प्रक्रिया को सत्यापित करने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय या अमेरिकी निगरानी व्यवस्था की संभावना भी चर्चा में है।

साथ ही, गाजा में स्वच्छ पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर काम करने के लिए अलग कार्य समूह बनाने की योजना सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत केवल सैन्य मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के बाद नागरिक प्रशासन और पुनर्निर्माण की रूपरेखा पर भी विचार किया जा रहा है।

अभी क्यों नहीं बना समझौता?

पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी समस्या भरोसे की कमी है। इजरायल को आशंका है कि हमास हथियार छोड़ने का वादा पूरा नहीं करेगा, जबकि हमास को डर है कि निरस्त्रीकरण के बाद भी इजरायल गाजा में सैन्य मौजूदगी बनाए रख सकता है। इसी कारण दोनों पक्ष पहले दूसरे से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

कुशनर की बैठकें इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश जरूर हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें निर्णायक सफलता नहीं मिली है। रॉयटर्स के अनुसार, दोनों दिनों की वार्ता के बाद तत्काल किसी बड़े समझौते के संकेत नहीं मिले।

आगे की चुनौती

गाजा में स्थायी शांति के लिए केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षा, हमास का भविष्य, इजरायली सैन्य वापसी, फिलिस्तीनी प्रशासन, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण जैसे कई मुद्दों पर एक साथ सहमति बनानी होगी। अमेरिका इन सभी मुद्दों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

फिलहाल कुशनर की यात्रा ने बातचीत का चैनल जरूर सक्रिय किया है, लेकिन इजरायल और हमास के बीच मूलभूत मतभेद बरकरार हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या दोनों पक्ष चरणबद्ध समझौते को स्वीकार करते हैं या गाजा में जारी संघर्ष और राजनीतिक गतिरोध और लंबा खिंचता है।

Leave a comment