गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। महानगर क्षेत्र के 21 विद्यालयों में केवल एक-एक शिक्षक तैनात हैं, जिससे सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त शिक्षकों की मांग शासन को भेजी है।
गाजियाबाद: सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की चुनौती शिक्षकों की कमी के कारण लगातार बढ़ती जा रही है। जिले के महानगर क्षेत्र के 21 विद्यालय केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में पढ़ाई के साथ प्रशासनिक और विभागीय कार्यों का बोझ भी इन्हीं शिक्षकों पर है, जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
एक शिक्षक पर सैकड़ों छात्रों की जिम्मेदारी
गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। सरकार जहां निपुण भारत मिशन के तहत प्राथमिक स्तर पर भाषा और गणित की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से इन प्रयासों पर असर पड़ रहा है। जिले के महानगर क्षेत्र में 21 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक-एक शिक्षक की तैनाती है। इनमें कुछ विद्यालयों में छात्रों की संख्या 400 से भी अधिक है, जिससे एक शिक्षक के लिए सभी कक्षाओं को संभालना बेहद कठिन हो गया है।

नगर क्षेत्र के कुल 93 सरकारी स्कूलों में लगभग 230 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा विभागीय बैठकों में भाग लेना, विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल और ऐप पर जानकारी अपडेट करना, नामांकन अभियान चलाना और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। इससे कक्षाओं में पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय और कम हो जाता है।
कैला बालक विद्यालय और सराय पुख्ता की स्थिति सबसे चिंताजनक
सबसे अधिक समस्या कंपोजिट विद्यालय कैला बालक में देखी जा रही है, जहां 425 विद्यार्थियों के लिए केवल एक शिक्षिका तैनात हैं। विद्यालय में एक शिक्षामित्र और दो अनुदेशक सहयोग करते हैं, लेकिन सभी कक्षाओं का शैक्षणिक संचालन एक ही शिक्षिका को करना पड़ता है। कई बार बड़ी कक्षाओं के मेधावी विद्यार्थियों की मदद लेकर छोटी कक्षाओं को पढ़ाया जाता है। उपस्थिति दर्ज करना, विभागीय रिकॉर्ड तैयार करना और ऑनलाइन जानकारी अपडेट करने जैसे कार्य शिक्षिका को विद्यालय समय के बाद भी करने पड़ते हैं।
वहीं प्राथमिक विद्यालय सराय पुख्ता में प्रधानाध्यापिका विमलेश यादव अकेले पूरे विद्यालय का संचालन कर रही हैं। विद्यालय में न तो कोई शिक्षामित्र है और न ही अनुदेशक। ऐसे में उन्होंने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए निजी स्तर पर एक शिक्षक की सहायता ले रखी है। यदि उन्हें किसी बैठक या प्रशासनिक कार्य के लिए विद्यालय से बाहर जाना पड़ता है तो पढ़ाई प्रभावित होती है।
शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग, विभाग ने भेजा प्रस्ताव
जिले में प्राथमिक विद्यालय बम्हैटा-2, कविनगर, लालकुआं, हरसांव, मोरटा-2, सदरपुर, सिकरोड़, सराय नजर अली और कंपोजिट विद्यालय रईसपुर बालक सहित कई विद्यालय एकल शिक्षक व्यवस्था पर चल रहे हैं। वहीं पांच विद्यालय ऐसे भी हैं, जहां नियमित शिक्षक नहीं हैं और अस्थायी व्यवस्था के तहत शिक्षकों की तैनाती की गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी अधिक है, वहां अस्थायी शिक्षकों की तैनाती कर व्यवस्था संभाली जा रही है। साथ ही हर वर्ष शासन को शिक्षकों की आवश्यकता का प्रस्ताव भेजा जाता है। नगर क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की गई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों को सफल बनाना है तो केवल स्मार्ट क्लास और आधुनिक संसाधन पर्याप्त नहीं होंगे। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। इससे न केवल पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।











