गोरखपुर में AMRUT 2.0 के तहत पेयजल परियोजनाएं भूमि उपलब्ध न होने से प्रभावित हैं। 28 स्थानों पर ओवरहेड टैंक और नलकूपों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है, जिससे शहर में बेहतर जलापूर्ति की योजना में देरी हो रही है।
गोरखपुर: AMRUT 2.0 योजना के तहत शहर की पेयजल व्यवस्था मजबूत करने का काम भूमि उपलब्ध न होने से धीमा पड़ गया है। नगर निगम से जमीन नहीं मिलने के कारण कई प्रस्तावित परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। जल निगम ने जिला प्रशासन और नगर निगम से जल्द विवादमुक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा हो सके।
भूमि नहीं मिलने से पेयजल परियोजनाओं की रफ्तार धीमी

गोरखपुर में शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चलाई जा रही AMRUT 2.0 योजना भूमि उपलब्ध न होने के कारण अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। नगर निगम के विस्तारित और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नई जलापूर्ति संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीन की अनुपलब्धता के चलते कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरुआती चरण में ही अटक गई हैं। जल निगम ने योजना के लिए कुल 47 स्थानों पर सरकारी या निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था। जांच और प्रक्रिया के बाद अब तक केवल 19 स्थानों पर ही सहमति बन सकी है, जबकि शेष 28 स्थानों पर भूमि विवाद, अभिलेख संबंधी दिक्कतों और वैकल्पिक जमीन नहीं मिलने की वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
ओवरहेड टैंक और नलकूपों के निर्माण में बढ़ी देरी
योजना के अंतर्गत शहर के विभिन्न इलाकों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए कई नई संरचनाएं बनाई जानी हैं। इसमें आठ नए ओवरहेड टैंक, 28 स्थानों पर ओवरहेड टैंक और नलकूप तथा पांच अंडरग्राउंड जलाशयों के निर्माण का प्रस्ताव शामिल है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ती आबादी को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, भूमि संबंधी समस्याओं के कारण न केवल निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है, बल्कि टेंडर प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जमीन का हस्तांतरण और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी नहीं होंगी, तब तक परियोजनाओं को धरातल पर उतारना संभव नहीं होगा।
प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद
जल निगम ने जिलाधिकारी और नगर आयुक्त से अनुरोध किया है कि जिन 19 स्थानों पर भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां जल्द कब्जा दिलाकर अभिलेखीय कार्य पूरे कराए जाएं। साथ ही शेष 28 स्थानों के लिए विवादमुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों पर राजस्व अभिलेखों में सुधार, भूमि की श्रेणी परिवर्तन और स्वामित्व से जुड़े मामलों के कारण देरी हो रही है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।
इसके अलावा नगर निगम के 12 हैंडपंपों को भी जल निगम के अधीन लाने की योजना है, जिससे मौजूदा पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यदि भूमि संबंधी अड़चनें जल्द दूर हो जाती हैं, तो AMRUT 2.0 योजना की गति तेज होगी और शहर के हजारों लोगों को बेहतर एवं नियमित पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। वहीं, यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो परियोजना की समयसीमा और लागत दोनों प्रभावित हो सकती हैं, जिससे शहर के विकास कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना है।











