नोएडा: निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। नोएडा में एक कारोबारी से कथित तौर पर 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोपियों ने कारोबारी को निवेश में अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया और अलग-अलग खातों में रकम जमा करवाई। जब कारोबारी ने अपनी जमा रकम और मुनाफा निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने उससे संपर्क करना बंद कर दिया।
पीड़ित कारोबारी के मुताबिक, शुरुआत में उसे निवेश से जुड़ी जानकारी देने के लिए संपर्क किया गया। आरोपियों ने निवेश की एक ऐसी योजना बताई, जिसमें कम समय में अच्छा रिटर्न मिलने का दावा किया गया था। बातचीत के दौरान उसे भरोसा दिलाया गया कि निवेश की गई रकम सुरक्षित रहेगी और जरूरत पड़ने पर वह आसानी से अपना पैसा निकाल सकेगा।
आरोपियों की बातों पर भरोसा करके कारोबारी ने निवेश करना शुरू किया। शुरुआती चरण में उसे निवेश और रिटर्न से संबंधित जानकारी दी जाती रही, जिससे उसका भरोसा और बढ़ गया। इसके बाद उससे बड़ी रकम अलग-अलग किस्तों में जमा कराई गई।
धीरे-धीरे कारोबारी ने कुल 1.13 करोड़ रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। इतनी बड़ी रकम निवेश करने के बाद जब उसने अपनी रकम वापस लेने की कोशिश की तो स्थिति बदल गई।
कारोबारी ने जब निवेश की रकम निकालने के लिए आरोपियों से संपर्क किया तो पहले उसे अलग-अलग कारण बताए गए। कुछ समय बाद आरोपियों ने बातचीत करना ही बंद कर दिया। फोन कॉल और मैसेज का जवाब नहीं मिला। इसके बाद कारोबारी को समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
मामले की शिकायत पुलिस से की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। साइबर अपराध से जुड़े इस मामले में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और आरोपियों के संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कारोबारी से रकम किन-किन बैंक खातों में जमा कराई गई थी। अगर रकम आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई है तो उन खातों की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
साइबर ठगी के मामलों में अक्सर अपराधी पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं। शुरुआत में छोटी रकम निवेश कराकर या सीमित रिटर्न दिखाकर उसे विश्वास दिलाया जाता है कि योजना वास्तविक है। जब पीड़ित बड़ी रकम लगाने लगता है, तब उसके लिए रकम वापस निकालना मुश्किल कर दिया जाता है।
इस मामले में भी कारोबारी के साथ कथित तौर पर इसी तरह की रणनीति अपनाई गई। पहले निवेश का भरोसा दिलाया गया और बाद में बड़ी रकम जमा कराई गई। जब कारोबारी ने पैसे निकालने की कोशिश की तो संपर्क तोड़ दिया गया।
पुलिस अब कारोबारी के बैंक खातों से हुए सभी ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटा सकती है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इन साक्ष्यों से आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि आरोपियों ने कारोबारी से संपर्क किस माध्यम से किया था। अगर उसे किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप या फोन कॉल के जरिए निवेश का ऑफर दिया गया था तो उस डिजिटल कड़ी को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
1.13 करोड़ रुपये की रकम होने के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है। इतनी बड़ी रकम की ठगी में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पैसे को ट्रैक कर उसे सुरक्षित करना होगी। अगर रकम अभी भी किसी बैंक खाते में फ्रीज की जा सकती है तो पीड़ित को आर्थिक राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
हालांकि साइबर ठगी में रकम की वापसी कई कारकों पर निर्भर करती है। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होती है, उतनी जल्दी संबंधित बैंक खातों पर रोक लगाने की कोशिश की जा सकती है। रकम कई खातों में ट्रांसफर होने या निकाल लिए जाने के बाद रिकवरी अधिक मुश्किल हो जाती है।
पुलिस लोगों को लगातार सलाह देती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें। खासकर सोशल मीडिया या फोन के जरिए मिलने वाली ऐसी निवेश योजनाओं से सावधान रहना चाहिए, जिनमें बहुत कम समय में असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा किया जाता है।
निवेश करने से पहले कंपनी, ऐप, वेबसाइट और बैंकिंग विवरण की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है। केवल व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट या किसी व्यक्ति के बताए रिटर्न के आधार पर बड़ी रकम निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
इस घटना से यह भी साफ है कि साइबर अपराधी अब केवल OTP या बैंकिंग जानकारी चुराने तक सीमित नहीं हैं। वे निवेश के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये तक की ठगी कर रहे हैं।
नोएडा पुलिस अब मामले में आरोपियों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच में यह भी सामने आ सकता है कि इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया है या नहीं।
फिलहाल कारोबारी के साथ हुई 1.13 करोड़ रुपये की ठगी ने निवेश के नाम पर होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपी कौन हैं, रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो उसे तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर सूचना मिलने से संदिग्ध खातों में गई रकम को फ्रीज कराने की कोशिश की जा सकती है।










