ब्लाइंड स्कूल में 8वीं के छात्र की मौत, पिता बोले- दुनिया घूमाने का सपना था

गोरखपुर के ब्लाइंड स्कूल में 8वीं के छात्र की मौत से परिवार में मातम है। पिता बोले- बेटा जन्म से देख नहीं सकता था और दुनिया घूमने का सपना देखता था।
ब्लाइंड स्कूल में 8वीं के छात्र की मौत, पिता बोले- दुनिया घूमाने का सपना था
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गोरखपुर के लालडिग्गी स्थित स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक इंटर कॉलेज में आठवीं कक्षा के एक छात्र की मौत से हड़कंप मच गया। बुधवार सुबह छात्र का शव स्कूल के बाथरूम में मिला। पुलिस ने प्रथमदृष्टया आत्महत्या की आशंका जताई है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है और छात्र का मोबाइल भी कब्जे में लेकर जांच की जा रही है।

मृतक छात्र की पहचान देवरिया के रामगुलाम टोला निवासी अनूप कुमार के रूप में हुई है। वह दोनों आंखों से दृष्टिबाधित था और वर्ष 2019 से गोरखपुर के इस आवासीय स्कूल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। स्कूल में ही उसके रहने और पढ़ने की व्यवस्था थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग गोरखपुर पहुंचे तो घर का इकलौता या चहेता बेटा इस तरह दुनिया छोड़ चुका था। परिवार के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी।

अनूप के पिता रामआसरे ने बताया कि उनका बेटा जन्म से ही देख नहीं सकता था, लेकिन उसकी इच्छाएं और सपने बिल्कुल आम बच्चों जैसे थे। वह दुनिया घूमना चाहता था। पिता के मुताबिक अनूप अक्सर उनसे दुनिया देखने और अलग-अलग जगहों पर घूमने की बातें करता था। बेटे की इन बातों को याद करके पिता का दर्द और बढ़ गया है कि जिस बच्चे के लिए उन्होंने भविष्य के सपने देखे थे, वह अचानक उनके बीच नहीं रहा।

स्कूल में छात्र की मौत की सूचना बुधवार सुबह सामने आई। जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात करीब 10 बजे अनूप बाथरूम गया था। इसके बाद सुबह काफी देर तक बाथरूम का दरवाजा बंद रहा। सफाईकर्मी विनोद ने जब दरवाजा बंद देखा तो उसे संदेह हुआ। उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को जानकारी दी गई।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खोलने पर छात्र का शव अंदर मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराने और उसकी वीडियोग्राफी कराने की बात सामने आई है।

पुलिस ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। जांच में छात्र को गमछा और बाल्टी लेकर अकेले बाथरूम की तरफ जाते हुए देखा गया। पुलिस इसी आधार पर प्रथमदृष्टया आत्महत्या की आशंका जता रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह और घटना से पहले छात्र की मानसिक स्थिति क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

पुलिस ने छात्र का मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया है। मोबाइल की कॉल डिटेल और उसमें मौजूद अन्य जानकारियों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले छात्र की किन लोगों से बातचीत हुई थी और क्या वह किसी परेशानी या तनाव में था। स्कूल के शिक्षकों और दूसरे छात्रों से भी जानकारी ली जा रही है।

परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अनूप ने इतना बड़ा कदम उठाया। अभी तक पुलिस की जांच में किसी स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हुई है। न ही यह सामने आया है कि छात्र को स्कूल में किसी तरह की परेशानी थी। इसलिए पुलिस अलग-अलग पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

अनूप के पिता के बयान से यह जरूर पता चलता है कि बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने कई सपने देखे थे। जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद अनूप ने पढ़ाई जारी रखी और वर्षों से आवासीय स्कूल में रहकर शिक्षा हासिल कर रहा था। वह दुनिया घूमने की इच्छा जताता था। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपने पैरों पर खड़ा होगा और अपने सपनों को पूरा करेगा।

लेकिन बुधवार की सुबह परिवार के सामने ऐसा सच आया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। स्कूल से बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद पिता और परिजन बदहवास हालत में वहां पहुंचे। उन्होंने स्कूल के कर्मचारियों और छात्रों से घटना की जानकारी ली। पिता ने स्कूल में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी देखा।

इस घटना ने आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे बच्चे लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर स्कूल में रहते हैं। इसलिए उनकी पढ़ाई के साथ-साथ भावनात्मक जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी लगातार ध्यान देना जरूरी है। किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो शिक्षक और अभिभावक मिलकर उसकी स्थिति समझने की कोशिश कर सकते हैं।

दृष्टिबाधित बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण होता है। अनूप भी कई वर्षों से इसी स्कूल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिवार ने उसे शिक्षा दिलाने के लिए आवासीय स्कूल में भेजा था ताकि वह आगे बढ़ सके। पिता के अनुसार उसके मन में घूमने और दुनिया को जानने की इच्छा थी, जो उसके जीवंत सपनों को दिखाती है।

घटना के बाद स्कूल प्रबंधन और प्रशासन के सामने भी कई सवाल हैं। यह जांच जरूरी है कि छात्र की मौत से पहले की गतिविधियां क्या थीं, रात में उसकी स्थिति कैसी थी और स्कूल में उसकी निगरानी की व्यवस्था किस तरह की थी। हालांकि अभी किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की जांच जारी है।

एसपी सिटी निमिष पाटील और एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार भी घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्कूल की स्थिति का जायजा लिया और जांच की प्रगति के बारे में जानकारी ली। पुलिस ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

छात्र की मौत के बाद स्कूल में भी शोक का माहौल है। जिन बच्चों के साथ अनूप पढ़ता और रहता था, उनके लिए भी यह घटना किसी सदमे से कम नहीं होगी। आवासीय स्कूल में बच्चे लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ रहते हैं, इसलिए किसी साथी की अचानक मौत का असर बाकी छात्रों पर भी पड़ सकता है। स्कूल प्रबंधन को बच्चों से बातचीत कर उन्हें भावनात्मक सहयोग देने की जरूरत होगी।

अनूप की मौत का कारण अभी जांच का विषय है। पुलिस ने आत्महत्या की आशंका जताई है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम, मोबाइल जांच, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्ष जानकारी को जोड़ना जरूरी होगा। पुलिस इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

परिवार के लिए इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बेटे के भविष्य को लेकर जो सपने थे, वे अचानक खत्म हो गए। पिता अपने बेटे को दुनिया घूमते देखना चाहते थे और बेटा भी दुनिया घूमने की इच्छा जताता था। लेकिन अब वही बातें परिवार के लिए दर्दनाक याद बन गई हैं।

गोरखपुर के इस मामले ने एक बार फिर यह भी दिखाया है कि बच्चों की सुरक्षा केवल शारीरिक निगरानी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ नियमित संवाद, उनकी परेशानियों को समझना और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे बच्चों के लिए जो परिवार से दूर रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं, भावनात्मक सहयोग उनकी दिनचर्या का जरूरी हिस्सा होना चाहिए।

फिलहाल पुलिस इस मामले में हर पहलू की जांच कर रही है। मोबाइल से मिलने वाली जानकारी, सीसीटीवी फुटेज, स्कूल के छात्रों और कर्मचारियों से पूछताछ तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। परिवार भी चाहता है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आए और यह पता चले कि उनके बेटे के साथ आखिर क्या हुआ था।

अनूप के पिता की दुनिया घूमने की बात इस पूरी घटना को और भावुक बना देती है। जन्म से आंखों की रोशनी नहीं होने के बावजूद उसके सपने बड़े थे। वह पढ़ाई कर रहा था और भविष्य में दुनिया घूमना चाहता था। अब परिवार के पास उसकी यादें और उसके सपने ही रह गए हैं। गोरखपुर के दृष्टिबाधित स्कूल में हुई इस घटना ने परिवार के साथ-साथ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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