गोरखपुर के सिकरीगंज क्षेत्र में दाह संस्कार के लिए जा रहे लोगों के साथ मंगलवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते बच गया। कुआनो घाट की ओर जा रही शवयात्रा में शामिल दो लोग रास्ते में गिरे बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगने के बाद दोनों मौके पर ही तड़पने लगे। यह देखकर शवयात्रा में शामिल अन्य लोगों में अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह लोगों ने लाठी-डंडों की मदद से दोनों को बिजली के तार से अलग किया और उनकी जान बचाई। घटना के बाद बिजली निगम को सूचना दी गई। अधिकारियों ने कर्मचारियों को मौके पर भेजकर मामले की जांच कराने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार सिकरीगंज क्षेत्र के अवधेश भुज का बीती रात निधन हो गया था। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे परिवार और रिश्तेदार उनका पार्थिव शरीर लेकर अंतिम संस्कार के लिए कुआनो नदी के घाट की ओर जा रहे थे। शवयात्रा जैसे ही घाट से पहले वाले रास्ते पर पहुंची, वहां पहले से गिरा हुआ बिजली का पोल और उससे जुड़ा तार दिखाई दिया। रास्ते में पड़ा यह तार काफी समय से लोगों के लिए खतरा बना हुआ था।
बताया गया कि जमीन पर गिरा बिजली का पोल एरियल बंच कंडक्टर से जुड़ा था। यह केबल कई जगह से कटा हुआ भी था। रास्ते से गुजर रहे लोगों को तार हटाने की जरूरत महसूस हुई। इसी दौरान कुरी बाजार निवासी 42 वर्षीय हरिनंद और सिकरीगंज निवासी 52 वर्षीय शिवकुमार भुज तार की चपेट में आ गए। करंट लगते ही दोनों बुरी तरह झटके खाने लगे और मदद के लिए आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें बचाने की कोशिश शुरू कर दी।
शवयात्रा में शामिल लोगों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सीधे तार को हाथ लगाने के बजाय लाठी-डंडों का सहारा लिया। लोगों ने लाठी-डंडे से तार हटाकर दोनों को करंट के संपर्क से अलग किया। इस प्रयास के बाद दोनों की जान बचाई जा सकी। घटना ने वहां मौजूद लोगों को डरा दिया। अगर समय रहते दोनों को तार से अलग नहीं किया जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया कि जिस रास्ते से लोग लगातार गुजर रहे थे, वहां कई दिनों से बिजली का पोल और तार गिरा हुआ कैसे पड़ा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में बिजली के जर्जर पोल और तारों की समस्या लगातार बनी हुई है। कहीं पोल झुके हुए हैं तो कहीं तार नीचे लटकते दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में बारिश या नमी के दौरान खतरा और बढ़ जाता है।
घटना के बाद लोगों ने बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि कोई बिजली का पोल गिर जाता है या तार जमीन पर आ जाता है तो उसे तत्काल हटाना चाहिए। खासकर सार्वजनिक रास्ते पर पड़े बिजली के तार को लंबे समय तक उसी स्थिति में छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। इस मामले में भी लोगों का आरोप है कि गिरा हुआ पोल और तार कई दिनों से वहीं पड़ा था।
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि क्षेत्र में जर्जर बिजली व्यवस्था की समस्या नई नहीं है। कई स्थानों पर पुराने पोल और तारों की हालत खराब बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कई बार समय पर कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। मंगलवार की घटना ने एक बार फिर इस समस्या को सामने ला दिया है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद बिजली निगम के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। सिकरीगंज के एसडीओ विनोद कुमार ने कर्मचारियों को मौके पर भेजने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अब यह देखा जाएगा कि पोल और तार कब से गिरे हुए थे, बिजली की आपूर्ति किस स्थिति में थी और शिकायत मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
दाह संस्कार के लिए निकली शवयात्रा के बीच इस तरह का हादसा होने से लोगों में नाराजगी भी है। एक तरफ परिवार अपने मृत रिश्तेदार के अंतिम संस्कार के लिए जा रहा था, वहीं रास्ते में बिजली के तार ने दो लोगों की जान जोखिम में डाल दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
कुआनो नदी के घाट की ओर जाने वाले रास्ते पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में वहां बिजली का पोल या तार गिरा रहने की स्थिति में केवल शवयात्रा में शामिल लोगों को ही नहीं, बल्कि आम राहगीरों को भी खतरा हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए जमीन पर पड़ा करंटयुक्त तार विशेष रूप से जानलेवा साबित हो सकता है।
लोगों का कहना है कि बिजली निगम को केवल इस घटना के बाद तार हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे क्षेत्र में जर्जर पोल और तारों का सर्वे कराना चाहिए। जहां भी पोल कमजोर हैं या तार लटक रहे हैं, वहां समय रहते मरम्मत या बदलने की कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
बिजली के तार से जुड़े हादसों में सबसे खतरनाक स्थिति तब पैदा होती है जब जमीन पर गिरा तार सामान्य दिखाई देता है। कई बार लोग यह समझ नहीं पाते कि तार में करंट प्रवाहित हो रहा है या नहीं और उसे हाथ से हटाने की कोशिश कर बैठते हैं। सिकरीगंज की घटना में भी यदि शवयात्रा में शामिल लोगों ने बिना सोचे सीधे तार को पकड़ लिया होता तो बचाव करने वाले लोग भी करंट की चपेट में आ सकते थे। लाठी-डंडों से तार हटाकर दोनों को अलग करना तत्काल बचाव की कोशिश थी।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि बिजली से जुड़ी आपात स्थिति में आसपास मौजूद लोगों की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों व्यक्ति करंट की चपेट में आने के बाद खुद को तार से अलग नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में साथ चल रहे लोगों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उनकी जान बचाई। हालांकि किसी भी व्यक्ति को करंट की स्थिति में सीधे पीड़ित को छूने से बचना चाहिए और पहले बिजली की आपूर्ति बंद कराने की कोशिश करनी चाहिए।
फिलहाल बिजली निगम की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण कर रही है। विभागीय जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली का पोल और तार कितने समय से गिरा था और उसे हटाने में देरी क्यों हुई। अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों को मौके पर भेजे जाने के बाद उम्मीद है कि रास्ते से खतरनाक तार और पोल को हटाकर आवागमन सुरक्षित किया जाएगा।
सिकरीगंज क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इलाके में बिजली के पोल और तारों की स्थिति की व्यापक जांच कराई जाए। यदि कहीं पोल जर्जर हैं या तार बहुत नीचे लटक रहे हैं तो उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए। लोगों का कहना है कि बिजली आपूर्ति जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी यह है कि बिजली का नेटवर्क सुरक्षित तरीके से संचालित हो।
मंगलवार की यह घटना किसी बड़ी जनहानि में बदल सकती थी, लेकिन शवयात्रा में मौजूद लोगों की तत्परता से दोनों लोगों की जान बच गई। अब स्थानीय लोगों की नजर बिजली निगम की कार्रवाई पर है। हादसे के बाद यदि विभाग जर्जर पोल और तारों को लेकर व्यापक अभियान चलाता है तो इससे भविष्य में ऐसे जोखिम को कम किया जा सकता है।











