गुजरात ने समान नागरिक संहिता (UCC) बिल 2026 पारित किया। अब राज्य में सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण पर समान कानून लागू होगा। महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है।
New Delhi: गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। यह उत्तराखंड के बाद देश में दूसरा राज्य बन गया है, जिसने सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की दिशा में यह कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया और गुजरात की राज्य सरकार की सराहना की।
शाह ने कहा कि भाजपा की स्थापना से ही यह संकल्प रहा है कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान कानून हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का संचालन तुष्टीकरण (appeasement) के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) और विधेयक का समर्थन करने वाले सभी विधायकों को बधाई दी।
विधेयक के पारित होने का महत्व
गुजरात में UCC विधेयक के पारित होने के साथ ही राज्य धर्म या समुदाय की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण (adoption) से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से राज्य में सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान अधिकार प्राप्त हों।
महिलाओं के अधिकार
भूपेंद्र पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि UCC विधेयक विशेष रूप से सभी धर्मों और जातियों की महिलाओं के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करता है। इसका सीधा लाभ महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा में होगा।

उन्होंने कहा कि अब किसी भी महिला को किसी व्यक्तिगत कानून या धर्म के आधार पर अलग व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे महिलाओं की कानूनी सुरक्षा मजबूत होगी और उन्हें समाज में समान सम्मान मिलेगा।
भाजपा का संकल्प
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में राज्य सरकारें लगातार समान कानूनों की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात और उत्तराखंड ने यह कदम उठाकर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी का प्राथमिक लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है।
शाह ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह कदम केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में सामाजिक समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भाजपा का संकल्प है कि हर नागरिक को कानून के समक्ष बराबरी का दर्जा मिले और कोई भी धर्म या समुदाय इसके बाहर न रहे।
विधेयक के लागू होने के बाद प्रभाव
UCC के लागू होने से गुजरात में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से जुड़े विवादों को एक ही कानूनी ढांचे में हल किया जाएगा। इससे विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाले जटिलताओं और अनिश्चितताओं को समाप्त किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि इस विधेयक से न केवल नागरिकों के लिए कानून को सरल और सुलभ बनाया जाएगा, बल्कि महिलाओं के अधिकारों को भी कानूनी रूप से मजबूत किया जाएगा। इससे समाज में लैंगिक समानता (gender equality) को बढ़ावा मिलेगा और पारिवारिक मामलों में समानता सुनिश्चित होगी।










