गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी को देने के प्रस्ताव पर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने जनसुनवाई पूरी कर ली है। कर्मचारी संगठनों, इंजीनियर संघों और इनेलो ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे जनहित के खिलाफ बताया।
चंडीगढ़: गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जनसुनवाई पूरी कर ली है। अब आयोग जल्द ही इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला ले सकता है। इस बीच कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों और इनेलो ने निजीकरण का खुलकर विरोध किया है।
जनसुनवाई के बाद आयोग लेगा अंतिम फैसला
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हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर विस्तृत जनसुनवाई हुई। प्रस्ताव के अनुसार, यदि मंजूरी मिलती है तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ निजी कंपनी भी इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति कर सकेगी। कंपनी ने अपनी याचिका में विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 14 का हवाला देते हुए एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरण लाइसेंस जारी करने का प्रावधान बताया है।
निजी कंपनी ने बेहतर सेवाओं का किया दावा
प्रस्ताव के तहत अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने गुरुग्राम में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस मांगा है। वहीं दूसरी कंपनी ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली नेटवर्क विकसित करने के लिए करीब 4,716.73 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना पेश की है। कंपनी का कहना है कि लाइसेंस मिलने पर वह कृषि, घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और कम आय वर्ग सहित सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से बिजली उपलब्ध कराएगी।
कर्मचारी संगठनों और इनेलो ने जताई आपत्ति
जनसुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री और इनेलो नेता संपत सिंह ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करेगी। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा और कई अन्य संगठनों ने भी प्रस्ताव को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
विरोध के समर्थन में गुरुग्राम और नूंह की विभिन्न बिजली डिवीजनों में कर्मचारियों ने दो घंटे तक प्रदर्शन भी किया। संगठनों का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा का निजीकरण उपभोक्ताओं और कर्मचारियों, दोनों के हितों के खिलाफ है।
राजस्व और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आयोग के सामने दायर आपत्ति में कहा कि आवेदन करने वाली कंपनी का गठन हाल ही में हुआ है और उसकी वित्तीय क्षमता सीमित है। एसोसिएशन का तर्क है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे बड़े वितरण क्षेत्र के संचालन के लिए मजबूत तकनीकी ढांचा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक नियंत्रण प्रणाली और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसका स्पष्ट प्रमाण कंपनी ने प्रस्तुत नहीं किया है।
संगठन ने यह भी कहा कि गुरुग्राम और नूंह से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को कुल राजस्व का लगभग 27.5 प्रतिशत प्राप्त होता है। यदि लाभकारी उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर जाते हैं तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और भविष्य में अन्य उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका बढ़ सकती है। अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग द्वारा लिया जाएगा।









