गुरुग्राम के सोहना एलिवेटेड रोड पर लोहे के गार्डर से लदा एक ट्रैक्टर बीच सड़क पर खराब हो गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। ट्रैक्टर पर सुरक्षा संबंधी इंतजाम नहीं होने से पीछे आ रहे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
गुरुग्राम: द्वारका एक्सप्रेसवे पर हाल ही में हुए सड़क हादसे के बाद भी गुरुग्राम में यातायात नियमों के पालन को लेकर लापरवाही थमती नजर नहीं आ रही है। शुक्रवार को सोहना एलिवेटेड रोड पर लोहे के गार्डर लेकर जा रहा एक ट्रैक्टर बीच सड़क पर खराब हो गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और एक बड़ा हादसा टल गया।
बीच सड़क पर खराब हुआ ट्रैक्टर, पीछे वाहनों की लगी कतार

शुक्रवार दोपहर सोहना एलिवेटेड रोड पर राजीव चौक की ओर जा रहा एक ट्रैक्टर अचानक बीच सड़क पर खराब हो गया। ट्रैक्टर की ट्रॉली में लंबे लोहे के गार्डर लदे हुए थे, जो ट्रॉली से काफी बाहर तक निकले हुए थे। वाहन के बीच सड़क पर रुक जाने से पीछे आ रहे तेज रफ्तार वाहनों को अचानक ब्रेक लगाने पड़े, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। हालांकि सतर्कता के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी आई सामने
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक्टर पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। वाहन पर रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेत या ट्रैफिक को सतर्क करने की कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दी। ट्रॉली से बाहर निकले गार्डरों पर केवल एक लाल कपड़ा बांधा गया था। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहन चालकों के लिए स्थिति जोखिमपूर्ण बन गई। मोटर वाहन नियमों के अनुसार इस तरह के सामान का सुरक्षित ढंग से परिवहन और आवश्यक चेतावनी संकेत लगाना अनिवार्य होता है।
स्थानीय लोगों ने उठाए निगरानी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोहना रोड, द्वारका एक्सप्रेसवे और एनएच-48 जैसे व्यस्त मार्गों पर अक्सर ओवरलोड या असुरक्षित तरीके से सामान ढोने वाले वाहन दिखाई देते हैं। उनका आरोप है कि नियमों के पालन को लेकर निगरानी और जांच पर्याप्त प्रभावी नहीं है, जिससे इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
हालिया हादसे के बाद भी बरकरार है जोखिम
कुछ दिन पहले द्वारका एक्सप्रेसवे पर सरिया लदे एक ई-रिक्शा से टक्कर में एक कैब चालक की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद संबंधित विभागों ने सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सख्ती की बात कही थी। ताजा घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और मालवाहक वाहनों के संचालन से जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारी और लंबे सामान का परिवहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए। समय पर जांच, स्पष्ट चेतावनी संकेत और नियमों का कड़ाई से पालन सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है












