Hardeep Gill Success Story: मां की मेहनत और खुद की लगन से सेना में लेफ्टिनेंट बने

Hardeep Gill Success Story: मां की मेहनत और खुद की लगन से सेना में लेफ्टिनेंट बने

हरियाणा के जींद जिले के हरदीप गिल ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून से पास आउट होकर सिख लाइट इन्फैंट्री की 14वीं बटालियन में लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया। उनके संघर्ष और लगातार प्रयास, नौवीं बार एसएसबी इंटरव्यू पास करना और मां की मेहनत उन्हें इस मुकाम तक ले आई। यह कहानी कठिनाइयों में भी मेहनत और लगन का उदाहरण है।

Lieutenant HarDeep Gill Success Story: हरियाणा के जींद जिले के अलीपुर गांव के रहने वाले हरदीप गिल ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून से पास आउट होकर सिख लाइट इन्फैंट्री की 14वीं बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन हासिल किया। यह उपलब्धि शनिवार को हुई परेड में आईएमए की पास आउट लिस्ट में नौवीं बार एसएसबी इंटरव्यू पास करने और ऑल-इंडिया मेरिट लिस्ट में 54वां स्थान हासिल करने के बाद मिली। उनके इस सफर में मां संतरो देवी का संघर्ष, खेतों में मजदूरी और पढ़ाई के दौरान हरदीप का निरंतर प्रयास मुख्य कारण रहे।

सेना में लेफ्टिनेंट बने हरदीप गिल

हरियाणा के जींद जिले के अलीपुर गांव के रहने वाले हरदीप गिल अब इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून से पास आउट होकर सिख लाइट इन्फैंट्री की 14वीं बटालियन में लेफ्टिनेंट बने हैं। यह सफलता उनके लगातार प्रयास और कठिन संघर्ष का नतीजा है। आईएमए की हालिया परेड में शामिल होने वाले हरदीप ने नौवीं बार एसएसबी इंटरव्यू पास कर ऑल-इंडिया मेरिट लिस्ट में 54वां स्थान हासिल किया।

उनकी कहानी इस बात का सबूत है कि कठिनाइयों के बावजूद मेहनत और लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने चार साल तक CDS परीक्षा की तैयारी की और IGNOU से ग्रेजुएशन पूरा किया, ताकि वे सेना में अपनी जगह बना सकें।

मां की मेहनत और संघर्ष ने दिया सहारा

हरदीप के पिता का दो साल की उम्र में निधन हो गया था। उनकी मां संतरो देवी ने स्कूल में मिड-डे मील वर्कर के तौर पर काम किया और खेतों में मजदूरी कर बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया। महीने में केवल 800 रुपये कमाने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।

हरदीप ने भी अपनी मां की मदद के लिए पढ़ाई के दौरान खेतों में काम किया और अपने परिवार का खर्च चलाया। यह संघर्ष और कठिन परिश्रम उन्हें लेफ्टिनेंट बनने तक लेकर गया।

शिक्षा और तैयारी का लंबा सफर

गांव के स्कूल से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, हरदीप ने एयरमैन के लिए पहली बार चयन पास किया था, लेकिन अग्निपथ योजना के कारण उनका सपना टूट गया। इसके बाद उन्होंने CDS परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार आठ बार एसएसबी इंटरव्यू में प्रयास करते हुए नौवीं बार सफलता हासिल की।

उनकी कहानी यह दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय, शिक्षा और सतत प्रयास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

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