उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर क्यों है खास? जानिए शक्तिपीठ से जुड़ी रहस्यमयी कथा और मान्यताएं

उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। जानें माता सती की कोहनी से जुड़ी कथा, दीप स्तंभ और मंदिर की मान्यताएं।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। मंदिर अपनी पौराणिक कथाओं और दीप स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है।

उज्जैन: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास स्थित हरसिद्धि माता मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। नवरात्रि और विशेष पर्वों पर मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और दीप स्तंभों की भव्य रोशनी आकर्षण का केंद्र बनती है।

माता सती की कोहनी गिरने से बना शक्तिपीठ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव जब माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग अलग किए। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

माना जाता है कि उज्जैन में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। इसी स्थान पर हरसिद्धि माता मंदिर की स्थापना की गई, जिसे शक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

स्कंद पुराण में मिलता है उल्लेख

हरसिद्धि माता मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर एकांत में थे, तब चंड और प्रचंड नाम के दो राक्षस वहां पहुंच गए।

भगवान शिव ने देवी चंडी का आह्वान किया। देवी चंडी ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी को “हरसिद्धि” की उपाधि दी, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं पर विजय पाने वाली देवी।

मंदिर में विराजमान हैं तीन देवियां

उज्जैन के इस पवित्र मंदिर में महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनके बीच में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति विराजमान है। मंदिर परिसर में स्थापित श्री यंत्र की भी विशेष पूजा की जाती है।

मान्यता है कि यहां श्रद्धा से पूजा करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

दीप स्तंभों की रोशनी बनती है आकर्षण

हरसिद्धि माता मंदिर की सबसे खास पहचान यहां मौजूद विशाल दीप स्तंभ हैं। मंदिर परिसर में बने दो बड़े स्तंभों पर शाम के समय सैकड़ों दीपक जलाए जाते हैं।

नवरात्रि के दौरान जब ये दीप स्तंभ पूरी तरह रोशन होते हैं, तब मंदिर का दृश्य बेहद भव्य दिखाई देता है। इस नजारे को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

मराठा काल में हुआ था पुनर्निर्माण

इतिहासकारों के अनुसार हरसिद्धि माता मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा शासनकाल में कराया गया था। मंदिर की वास्तुकला में प्राचीन भारतीय और मराठा शैली की झलक देखने को मिलती है।

महाकाल मंदिर के पास स्थित होने के कारण यह स्थान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक आकर्षण बना हुआ है।

Leave a comment