हेनले पासपोर्ट इंडेक्स हर साल दुनिया के देशों के पासपोर्ट की रैंकिंग जारी करता है। इस रैंकिंग से यह पता चलता है कि किस देश के पासपोर्ट धारक को दुनियाभर में कितनी यात्रा स्वतंत्रता मिलती है और वे कितने देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकते हैं।
नई दिल्ली: हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रैंकिंग जारी हो गई है, जिसमें भारत का पासपोर्ट 80वें स्थान पर है। भारत ने पिछले साल के मुकाबले पांच पायदान की बढ़त दर्ज की है, लेकिन वैश्विक औसत से अभी भी काफी पीछे है। रैंकिंग से यह भी पता चलता है कि किस देश के पासपोर्ट धारक कितने देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं।
इस साल की रैंकिंग में एशिया के नौ देशों को दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट की सूची में शामिल किया गया है। इसमें भारत से सटे चार देशों – बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान – के पासपोर्ट सबसे कमजोर पाए गए हैं।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स क्या है?
Henley Passport Index हर साल दुनिया भर के पासपोर्ट की ताकत और कमजोरियों का विश्लेषण करता है। यह रैंकिंग International Air Transport Association (IATA) के आंकड़ों पर आधारित होती है और यह बताती है कि किसी देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं। इस सूचकांक से यह भी पता चलता है कि किसी देश के पासपोर्ट की वैश्विक यात्रा आज़ादी कितनी है।
दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट

Henley Passport Index 2026 के अनुसार दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट की टॉप 10 लिस्ट में शामिल देश इस प्रकार हैं:
- उत्तर कोरिया (North Korea)
- फिलिस्तीनी क्षेत्र (Palestinian Territories)
- बांग्लादेश (Bangladesh)
- नेपाल (Nepal)
- सोमालिया (Somalia)
- पाकिस्तान (Pakistan)
- यमन (Yemen)
- इराक (Iraq)
- सीरिया (Syria)
- अफगानिस्तान (Afghanistan)
इस सूची में केवल सोमालिया अफ्रीका का देश है, जबकि बाकी सभी एशियाई देश हैं। भारत से जुड़े चार देश – बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान – की पासपोर्ट ताकत काफी कमजोर मानी गई है, जिससे इन देशों के नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
भारत का पासपोर्ट और वीजा-फ्री देशों की संख्या
भारत का पासपोर्ट 80वें स्थान पर है। भारतीय पासपोर्ट धारक 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं। पिछले साल भारत इस सूची में 85वें स्थान पर था। हालांकि भारत ने पांच पायदान की बढ़त हासिल की है, लेकिन यह अभी भी यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे विकसित देशों के मुकाबले काफी पीछे है।
विकसित देशों के पासपोर्ट धारकों को 180 से अधिक देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा प्राप्त है। कमजोर पासपोर्ट होने का मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पहले से वीजा आवेदन करना अनिवार्य है। इसके लिए:
- वीजा अपॉइंटमेंट
- दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification)
- लंबी प्रक्रिया और प्रतीक्षा समय
इन कारणों से अचानक या कम समय में यात्रा करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा एप्लीकेशन फीस, दूतावास या वाणिज्य दूतावास की यात्रा और अतिरिक्त पेपरवर्क से यात्रा की कुल लागत बढ़ जाती है।










