एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार ने स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम में शामिल हिमाचल की चार खिलाड़ियों पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर को 33.33-33.33 लाख रुपये देने की घोषणा की है। चारों खिलाड़ियों को मिलाकर यह राशि करीब 1.33 करोड़ रुपये होती है। पुरस्कार की घोषणा के बाद खिलाड़ियों ने इस राशि पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश की खेल नीति में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए चार करोड़ रुपये का प्रावधान है, ऐसे में टीम स्पर्धा में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने वाली चारों खिलाड़ियों के बीच उस राशि को समान रूप से बांटा जाना चाहिए।
हिमाचल की महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने पुरस्कार राशि को लेकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी है। खिलाड़ियों की ओर से कहा गया है कि उन्होंने देश के लिए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए लंबे समय तक मेहनत की है। उनका सवाल यह है कि जब राज्य सरकार की नीति में एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए चार करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित है तो टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली हिमाचल की खिलाड़ियों के लिए राशि का निर्धारण किस आधार पर किया गया है। खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और खेल मंत्री से इस मामले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है।
सरकार की ओर से पुरस्कार राशि का जो आधार बताया गया है, वह टीम स्पर्धा में खिलाड़ियों की भागीदारी से जुड़ा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक हिमाचल प्रदेश खेल परिषद नकद पुरस्कार नियम, 2024 के तहत 12 सदस्यीय भारतीय महिला कबड्डी टीम में शामिल हिमाचल की चार खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार राशि उनकी भागीदारी के अनुपात में तय की गई है। इसी गणना के आधार पर पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर को 33.33 लाख रुपये प्रत्येक देने की घोषणा की गई। चारों के लिए कुल राशि करीब 1.33 करोड़ रुपये बनती है।
यही गणना अब खिलाड़ियों के सवाल का मुख्य आधार बन गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि एशियन गेम्स में कबड्डी एक टीम स्पर्धा है और स्वर्ण पदक पूरी टीम ने मिलकर जीता है। ऐसे में हिमाचल की चारों खिलाड़ियों का तर्क है कि राज्य की ओर से स्वर्ण पदक के लिए तय चार करोड़ रुपये की राशि को हिमाचल की चारों खिलाड़ियों के बीच बराबर बांटा जा सकता है। इस हिसाब से प्रत्येक खिलाड़ी के हिस्से में एक-एक करोड़ रुपये आएंगे। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक चारों खिलाड़ियों ने इसी तरह पुरस्कार राशि बांटने की मांग रखी है।
पुष्पा राणा और उनकी साथी खिलाड़ियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी मांग व्यक्तिगत रूप से दूसरे राज्यों की तरह करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि हासिल करने की नहीं है। उनका कहना है कि वे हिमाचल सरकार की अपनी खेल नीति में एशियन गेम्स स्वर्ण पदक के लिए निर्धारित चार करोड़ रुपये की राशि के आधार पर सम्मान चाहती हैं। खिलाड़ियों के मुताबिक यदि यह राशि हिमाचल से जुड़ी चारों स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों के बीच बराबर बांटी जाती है तो प्रत्येक खिलाड़ी को एक करोड़ रुपये मिलेंगे।
यह विवाद इसलिए भी चर्चा में आया है क्योंकि हिमाचल सरकार ने हाल ही में एशियन गेम्स के पदक विजेताओं के लिए कुल करीब 5.33 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि घोषित की है। इसमें मंडी के सावन बरवाल को पुरुष मैराथन में रजत पदक के लिए 2.50 करोड़ रुपये और चंबा की सीमा कुमारी को महिलाओं की 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक के लिए 1.50 करोड़ रुपये देने की घोषणा हुई है। वहीं महिला कबड्डी टीम की हिमाचल से जुड़ी चार खिलाड़ियों के लिए कुल करीब 1.33 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है।
सरकार ने पुरस्कार राशि की घोषणा करते हुए अपनी खेल नीति में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार एशियन गेम्स और पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेताओं के लिए चार करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 2.50 करोड़ रुपये और कांस्य पदक के लिए 1.50 करोड़ रुपये का प्रावधान है। ओलंपिक, शीतकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक के लिए पांच करोड़ रुपये, रजत के लिए तीन करोड़ और कांस्य के लिए दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि का प्रावधान बताया गया है।
टीम स्पर्धा और व्यक्तिगत स्पर्धा के बीच पुरस्कार राशि की गणना का अंतर ही मौजूदा विवाद का सबसे अहम पहलू है। व्यक्तिगत स्पर्धा में खिलाड़ी के नाम पर सीधे पदक दर्ज होता है, जबकि कबड्डी जैसे टीम खेल में पूरा दल एक साथ पदक जीतता है। हिमाचल सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों के तहत टीम पुरस्कार खिलाड़ियों की भागीदारी के अनुपात में वितरित किया गया है। दूसरी तरफ खिलाड़ियों का कहना है कि टीम की सफलता में शामिल खिलाड़ियों के योगदान को देखते हुए उनके लिए अलग तरीके से सम्मान तय किया जाना चाहिए।
पुष्पा राणा ने खिलाड़ियों के संघर्ष का भी जिक्र किया है। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने सीमित संसाधनों और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में भी अभ्यास जारी रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। उनका कहना है कि खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए खिलाड़ियों को लंबे समय तक प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और शारीरिक मेहनत से गुजरना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में वे पुरस्कार राशि को अपने संघर्ष और उपलब्धि के सम्मान से जोड़कर देख रही हैं।
चारों खिलाड़ियों की मांग केवल पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं है। पुष्पा राणा पहले भी खिलाड़ियों के लिए रोजगार और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा उठा चुकी हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ियों का युवा जीवन खेल को समर्पित हो जाता है और खेल करियर खत्म होने के बाद रोजगार तथा आर्थिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने एक बार फिर इस विषय को उठाया है।
पिछले वर्ष भारत की महिला कबड्डी टीम ने विश्व कप में भी खिताबी सफलता हासिल की थी। उस टीम में हिमाचल की खिलाड़ी भी शामिल थीं। पुष्पा राणा की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया है कि विश्व कप में देश को खिताब दिलाने वाली हिमाचल की खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार और रोजगार से जुड़े मामलों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। इस तरह एशियन गेम्स की पुरस्कार राशि का मौजूदा विवाद खिलाड़ियों की पुरानी मांगों से भी जुड़ गया है।
पुरस्कार राशि को लेकर खिलाड़ियों ने पड़ोसी राज्य हरियाणा का उदाहरण भी सामने रखा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक हरियाणा में 2023 एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेताओं के लिए तीन-तीन करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि घोषित की गई थी। 2026 के एशियन गेम्स को लेकर भी हरियाणा में कबड्डी खिलाड़ियों के लिए तीन करोड़ रुपये प्रति खिलाड़ी देने की बात सामने आई है। हालांकि अलग-अलग राज्यों की खेल पुरस्कार नीतियां और उनके नियम अलग होते हैं, इसलिए सीधे तौर पर राशि की तुलना करने के बजाय संबंधित राज्य की नीति और पात्रता शर्तों को देखना जरूरी है।
हिमाचल सरकार का कहना है कि खेल क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में पुरस्कार राशि में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने या पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को कुल 17.44 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इसके अलावा तीन प्रतिशत खेल कोटे के तहत 99 खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार मिलने की जानकारी भी सरकार की ओर से दी गई है।
सरकार ने खिलाड़ियों के लिए डाइट और यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी की बात भी कही है। राज्य से बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को प्रतिदिन 500 रुपये तक डाइट अलाउंस, राज्य स्तर पर 400 रुपये, जिला स्तर पर 300 रुपये और ब्लॉक स्तर पर 240 रुपये का प्रावधान बताया गया है। यात्रा को लेकर भी 200 किलोमीटर तक एसी थ्री-टियर रेल किराया और उससे अधिक दूरी पर इकोनॉमी क्लास हवाई किराये की सुविधा का उल्लेख किया गया है।
अब इस मामले में खिलाड़ियों की मांग और सरकार के नियम के बीच अंतर सामने आ गया है। खिलाड़ी चार करोड़ रुपये की पूरी राशि को चार हिमाचली खिलाड़ियों के बीच बराबर बांटने की मांग कर रही हैं, जबकि सरकार ने 2024 के खेल पुरस्कार नियमों के आधार पर टीम स्पर्धा की राशि को खिलाड़ियों की भागीदारी के अनुपात में तय किया है। ऐसे में यदि सरकार खिलाड़ियों की मांग पर विचार करती है तो नियमों की व्याख्या या पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया में बदलाव का सवाल भी सामने आ सकता है।
कबड्डी की चारों खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आती हैं और भारतीय महिला टीम की एशियन गेम्स की स्वर्णिम सफलता में शामिल रही हैं। पुष्पा राणा टीम की कप्तान हैं। उनके साथ रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर भी भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम के स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमाचल में इन खिलाड़ियों के स्वागत और सम्मान का दौर भी चला। पुरस्कार राशि को लेकर उठे सवाल ने अब इस उपलब्धि के बाद खेल नीति और पुरस्कार वितरण की चर्चा को केंद्र में ला दिया है।
खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने देश और हिमाचल का नाम रोशन करने के लिए अपने करियर का बड़ा हिस्सा खेल को दिया है। उनके अनुसार पदक जीतने के बाद सम्मान केवल समारोह या प्रशंसा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पुरस्कार नीति में भी टीम के खिलाड़ियों के योगदान को उचित महत्व मिलना चाहिए। हालांकि पुरस्कार राशि का अंतिम वितरण सरकार द्वारा लागू नियमों के अनुसार ही होगा और उसमें बदलाव का निर्णय भी संबंधित विभाग या सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।
इस पूरे मामले में सरकार और खिलाड़ियों के पक्ष अलग-अलग आधार पर सामने आए हैं। सरकार की ओर से घोषित राशि नियमों के अनुसार टीम में खिलाड़ियों की भागीदारी के आधार पर तय की गई है, जबकि खिलाड़ियों का कहना है कि चारों हिमाचली खिलाड़ियों ने टीम की स्वर्णिम सफलता में योगदान दिया और उन्हें राज्य के चार करोड़ रुपये के स्वर्ण पदक पुरस्कार में समान हिस्सा मिलना चाहिए। अब देखना होगा कि सरकार खिलाड़ियों की इस मांग पर कोई संशोधित निर्णय लेती है या मौजूदा नियमों के तहत घोषित राशि ही लागू रहती है।
फिलहाल हिमाचल की चारों कबड्डी खिलाड़ियों को 33.33-33.33 लाख रुपये देने की घोषणा की गई है। चारों की कुल राशि करीब 1.33 करोड़ रुपये है। खिलाड़ियों ने इसे लेकर मुख्यमंत्री और खेल मंत्री के सामने अपनी मांग रखी है। उनका आग्रह है कि एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के लिए निर्धारित चार करोड़ रुपये की राशि को चारों खिलाड़ियों में बराबर बांटा जाए, जिससे प्रत्येक खिलाड़ी को एक करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार की ओर से फिलहाल टीम स्पर्धा के लिए नियमों के अनुसार राशि तय किए जाने की बात कही गई है।












