वियतनाम में हादसे में मारे गए योग शिक्षक राजा कुमार का शव भारत लाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका

वियतनाम सड़क हादसे में मृत रांची के योग शिक्षक राजा कुमार का शव भारत लाने की मांग हाईकोर्ट पहुंची। भाई ने याचिका दी, सांसद के विदेश मंत्रालय पत्र का हवाला दिया।
वियतनाम में हादसे में मारे गए योग शिक्षक राजा कुमार का शव भारत लाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका
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वियतनाम में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रांची के योग शिक्षक राजा कुमार का पार्थिव शरीर भारत लाने का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। राजा कुमार के भाई की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द झारखंड लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में वियतनाम में फंसे पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में सरकारी स्तर पर मदद उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। मामले में राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार वर्मा की ओर से विदेश मंत्रालय को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार राजा कुमार की मौत वियतनाम के दा लात शहर में हुए सड़क हादसे में हुई थी। वह वियतनाम में योग शिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे। हादसे के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने की बनी हुई है। विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मृत्यु के बाद शव को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावास या मिशन, दस्तावेज और परिवहन से जुड़े कई औपचारिक चरण शामिल होते हैं। परिवार का कहना है कि वह जल्द से जल्द अपने बेटे का पार्थिव शरीर घर लाना चाहता है।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका अधिवक्ता आकाश अजीत कुमार के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि राजा कुमार का पार्थिव शरीर अभी वियतनाम में है और उसे जल्द झारखंड लाने के लिए संबंधित स्तर पर जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। परिवार की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटाने का उद्देश्य यही बताया गया है कि प्रक्रिया में तेजी आए और पार्थिव शरीर को भारत लाने में सरकारी स्तर पर आवश्यक सहयोग मिले।

मामले में राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार वर्मा की ओर से विदेश मंत्रालय को भेजे गए पत्र का भी उल्लेख किया गया है। सांसद ने मंत्रालय से राजा कुमार के पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था। परिवार की ओर से इसी पत्र को भी हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के संदर्भ में रखा गया है, ताकि मामले में पहले से किए जा रहे सरकारी प्रयासों की जानकारी अदालत के सामने रहे।

राजा कुमार मूल रूप से रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के कुम्हार टोली, चूना भट्ठा, श्री नारायण प्रजापति पथ के रहने वाले बताए गए हैं। वह पिछले कुछ समय से वियतनाम में योग शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार वह वहां आदि योग अकादमी में योग प्रशिक्षण से जुड़े हुए थे। उनके साथ जमशेदपुर के विनय कुमार यादव भी योग शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। दोनों झारखंड के रहने वाले थे और वियतनाम में अपने काम के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रहे थे।

25 सितंबर को दा लात शहर में दोनों के साथ सड़क हादसा हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दोनों एक स्कूटी पर सवार होकर काम से लौट रहे थे, तभी उनकी स्कूटी की एक कार से टक्कर हो गई। हादसे में राजा कुमार की मौत हो गई, जबकि विनय कुमार यादव गंभीर रूप से घायल हुए। विनय को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन दो दिन बाद उनकी भी मौत हो गई। इस तरह एक ही हादसे में झारखंड के दो परिवारों ने अपने बेटों को खो दिया।

राजा कुमार की मौत की खबर रांची स्थित परिवार तक पहुंचने के बाद से घर में मातम का माहौल है। परिवार के सदस्य अब उनके पार्थिव शरीर के भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं। विदेश में मौत होने के कारण परिवार के लिए यह स्थिति सामान्य से कहीं अधिक कठिन है, क्योंकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं हो सकती जब तक पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंच जाता और संबंधित औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं।

परिवार की परेशानी केवल भावनात्मक नहीं है, बल्कि विदेश से पार्थिव शरीर वापस लाने की प्रक्रिया में आने वाला खर्च भी चिंता का विषय बना हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राजा कुमार के परिवार को शव भारत लाने की प्रक्रिया में करीब 20 लाख रुपये तक खर्च आने की जानकारी दी गई थी। परिवार और वियतनाम में मौजूद उनके परिचित इस प्रक्रिया के लिए पैसे और जरूरी कागजात जुटाने में लगे हैं।

राजा कुमार के परिजन चाहते हैं कि सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप कर प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। इसी वजह से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद की अपील की गई। सांसद की ओर से विदेश मंत्रालय को पत्र लिखे जाने के बाद अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। परिवार को उम्मीद है कि न्यायालय में याचिका के बाद संबंधित एजेंसियों के स्तर पर प्रक्रिया में तेजी आ सकती है।

राजा कुमार के साथ काम करने वाले जमशेदपुर के विनय यादव के परिवार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही बताई गई है। दोनों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जमशेदपुर से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार विनय यादव के पार्थिव शरीर को भारत लाने में भी लाखों रुपये का खर्च बताया गया था और परिवार ने सरकार तथा भारतीय मिशन से मदद मांगी थी।

वियतनाम में काम करने वाले दोनों युवकों के परिवारों के लिए यह हादसा बेहद दुखद रहा। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों योग प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे। उनके परिवारों को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी के जरिए उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन सड़क हादसे ने अचानक दोनों परिवारों की जिंदगी बदल दी। अब परिवार अपने बेटों के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए घर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मुख्य मांग पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराने की है। यह मामला सीधे तौर पर परिवार की मानवीय और कानूनी जरूरत से जुड़ा है। अदालत में याचिका दाखिल होने के बाद अब संबंधित पक्षों से जवाब और मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल परिवार की प्राथमिकता राजा कुमार का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द रांची लाना है।

विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मौत होने के बाद पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए कई स्तरों पर समन्वय करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर मृत्यु से जुड़े दस्तावेज, पोस्टमार्टम या अन्य कानूनी औपचारिकताएं, मृत्यु प्रमाणपत्र, पासपोर्ट और संबंधित अनुमति जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इसके बाद एयर कार्गो के जरिए पार्थिव शरीर को भारत भेजने की व्यवस्था की जाती है। ऐसे मामलों में भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास परिवार को प्रक्रिया में सहायता करता है।

राजा कुमार के मामले में भी परिवार इसी प्रक्रिया के जल्द पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहा है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब यह देखा जाना है कि सरकार और संबंधित अधिकारी पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। सांसद के पत्र का हवाला भी इसी संदर्भ में दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि परिवार ने सरकारी स्तर पर सहायता के लिए पहले भी प्रयास किए हैं।

रांची में राजा कुमार के परिजनों के लिए हर गुजरता दिन भारी है। परिवार अंतिम बार अपने बेटे का चेहरा देखने और अपने रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार करने की प्रतीक्षा कर रहा है। विदेश में हुई मौत के बाद पार्थिव शरीर के वापस आने में देरी होने से परिवार की पीड़ा और बढ़ गई है। इसी वजह से परिवार ने अदालत के माध्यम से भी जल्द कार्रवाई की मांग की है।

यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले भारतीय युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचता है। विदेश में काम करने वाले लोगों के परिवारों के लिए किसी दुर्घटना की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और भारतीय मिशन से तत्काल सहायता मिलना महत्वपूर्ण होता है। खासकर मृत्यु की स्थिति में पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया परिवार के लिए बेहद कठिन हो सकती है।

राजा कुमार और विनय यादव दोनों योग प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार वे दा लात स्थित आदि योग अकादमी से जुड़े थे। 25 सितंबर की दुर्घटना के बाद एक की मौके पर मौत हुई और दूसरे ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अब दोनों परिवारों की चिंता उनके पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने की है।

फिलहाल राजा कुमार के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है। याचिका में उनके भाई ने पार्थिव शरीर को जल्द झारखंड लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। सांसद प्रदीप कुमार वर्मा के विदेश मंत्रालय को लिखे पत्र को भी याचिका में संदर्भित किया गया है। अब अदालत और संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से होने वाली कार्रवाई पर परिवार की नजर है।

राजा कुमार के परिवार की मांग स्पष्ट है कि विदेश में जरूरी औपचारिकताओं को जल्द पूरा कराया जाए और पार्थिव शरीर को भारत लाने की व्यवस्था की जाए। परिवार अपने बेटे को अंतिम विदाई अपने घर और अपने लोगों के बीच देना चाहता है। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब इस प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद परिवार कर रहा है।

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