हिमाचल में 50 करोड़ की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी का आरोप पत्नी के गहने भी गिरवी रखे IIT मंडी के स्टाफ से भी करोड़ों का निवेश

मंडी में गौरव अनिल धोते पर ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप है। IIT मंडी स्टाफ के निवेश और पत्नी के गहने गिरवी रखने का मामला भी सामने आया।
हिमाचल में 50 करोड़ की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी का आरोप पत्नी के गहने भी गिरवी रखे IIT मंडी के स्टाफ से भी करोड़ों का निवेश
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है। महाराष्ट्र निवासी गौरव अनिल धोते पर पद्धर और मंडी के आसपास बड़ी संख्या में लोगों को निवेश के नाम पर रकम दोगुनी करने और हर महीने भारी रिटर्न देने का झांसा देकर पैसे लेने का आरोप है। ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरे मामले में ठगी की रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि पुलिस के पास अभी तक दर्ज शिकायतों में सामने आई रकम इससे कम है और जांच आगे बढ़ने के साथ वास्तविक राशि स्पष्ट होने की उम्मीद है।

गौरव अनिल धोते पर आरोप है कि उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर लोगों को हर महीने पांच से 10 प्रतिशत तक ब्याज और कुछ वर्षों में पैसा दोगुना करने का भरोसा दिया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बाद में निवेशकों को 60 से 70 दिनों में रकम दोगुनी होने का लालच भी दिया गया। शुरुआती निवेशकों के खातों में बढ़ी हुई रकम दिखाकर भरोसा कायम करने और इसके बाद बड़े निवेश के लिए लोगों को तैयार करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस जांच में इस कथित निवेश नेटवर्क के कई पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

इस मामले में IIT मंडी का नाम सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। रिपोर्टों के अनुसार धोते ने संस्थान से जुड़े कार्यक्रम में करीब 15 लाख रुपये की स्पॉन्सरशिप देकर वहां के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अपनी पहचान मजबूत की। इसके बाद IIT मंडी के कुछ प्रोफेसरों, फैकल्टी और स्टाफ के लोग भी कथित निवेश योजना के संपर्क में आए। आरोपी को संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के साथ कई कार्यक्रमों में देखा गया था। वह करीब तीन महीने तक IIT मंडी के गेस्ट हाउस में भी ठहरा था।

पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी ने सेराफिना नाम से कई कंपनियां संचालित कीं और निवेशकों के सामने इन कंपनियों को ट्रेडिंग तथा निवेश से जुड़ी गतिविधियों के तौर पर प्रस्तुत किया। कमांद में कार्यालय खोले जाने की भी जानकारी सामने आई है। आरोप है कि कार्यालय का माहौल इस तरह बनाया गया था कि वहां पहुंचने वाले लोगों को कंपनी की गतिविधियां व्यवस्थित और भरोसेमंद लगें। कुछ रिपोर्टों में कार्यालय में बाउंसर रखने और धार्मिक गतिविधियों के जरिए लोगों का विश्वास जीतने की बात भी शिकायतकर्ताओं के हवाले से कही गई है।

पद्धर पुलिस के पास अब तक कई शिकायतें पहुंच चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 23 शिकायतकर्ताओं से करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, पुलिस और अन्य रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि शिकायतों की संख्या बढ़ने पर ठगी की कुल रकम 40 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। ताजा दैनिक जागरण रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है। इसलिए फिलहाल 50 करोड़ रुपये को जांच में सामने आया अंतिम आंकड़ा नहीं बल्कि आरोप और अनुमान के तौर पर देखना उचित होगा।

आरोपी पर केवल बाहरी निवेशकों को ही निशाना बनाने का आरोप नहीं है। ताजा रिपोर्ट में उसकी पत्नी के साथ भी धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक गौरव अनिल धोते की शादी जून 2025 में मनाली के एक रिजॉर्ट में हुई थी। शादी का पैकेज करीब 18 लाख रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि शादी के अगले दिन होटल का भुगतान किए बिना वह पत्नी के साथ वहां से निकल गया और होटल का बकाया चुकाने के लिए पत्नी के सोने के गहने बेचने की बात कही।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने होटल प्रबंधन के सामने पत्नी के गहनों को 22 कैरेट सोने का बताया था। बाद में जब कथित तौर पर भुगतान नहीं हुआ और गहने बेचे गए तो वे 18 कैरेट के निकले। होटल प्रबंधन को इन गहनों से करीब 1.80 लाख रुपये मिले। इस मामले को भी आरोपी के खिलाफ सामने आए आरोपों की कड़ी में देखा जा रहा है, हालांकि इसके कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

शादी से जुड़े इस मामले में यह भी सामने आया कि टेंट, फूल, घोड़ी और अन्य व्यवस्थाओं के भुगतान को लेकर होटल का बिल बकाया रह गया था। होटल प्रबंधन के अनुसार संपर्क करने पर आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह ओल्ड मनाली गया है और पत्नी के गहने बेचकर बकाया राशि का भुगतान करेगा। बाद में मामला अलग दिशा में चला गया। यह घटनाक्रम उस समय का है जब आरोपी के खिलाफ मंडी में ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी की शिकायतें सामने आने लगी थीं।

मंडी में कथित निवेश घोटाले का नेटवर्क केवल एक गांव या एक पंचायत तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पुलिस में दर्ज शिकायतों के अनुसार आरोपी ने IIT मंडी के आसपास की कई पंचायतों में संपर्क बनाया था। कमांद और कटौला क्षेत्र में कार्यालय और रहने की व्यवस्था के जरिए लोगों तक पहुंच बनाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक उसका प्रभाव मंडी सदर, सरकाघाट, जोगिंदरनगर और बल्ह विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की शिकायतें मिली हैं।

आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने लोगों को क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। निवेशकों को रकम बढ़ने और कम समय में पैसा दोगुना होने का लालच दिया जाता था। जब शुरुआती लोगों को कथित तौर पर भुगतान या बढ़ी हुई रकम दिखाई गई तो दूसरे लोगों का भरोसा भी बढ़ा। इसी भरोसे के आधार पर बड़ी रकम निवेश कराए जाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में IIT मंडी ने अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट रूप से दूरी बनाई है। संस्थान के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे ने कहा है कि कथित वित्तीय गतिविधियों का संस्थान से कोई संबंध नहीं है। संस्थान के अनुसार किसी व्यक्ति को निवेश के लिए पैसा जुटाने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था। IIT ने पुलिस जांच में सहयोग की बात कही है। संस्थान ने लोगों को यह सलाह भी दी है कि केवल IIT से जुड़े होने के दावे के आधार पर किसी निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करें और संस्थान के नाम, अधिकारियों की तस्वीरों या परिसर में आयोजित कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर किए जा रहे किसी वित्तीय दावे की आधिकारिक पुष्टि करें।

दरअसल आरोपी ने IIT मंडी से जुड़े कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी और संस्थान के अधिकारियों से परिचय का इस्तेमाल लोगों का विश्वास जीतने के लिए किया या नहीं, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक उसने एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के लिए 15 लाख रुपये की स्पॉन्सरशिप दी थी। इसके बाद संस्थान के परिसर में उसकी मौजूदगी बढ़ी और उसे कई कार्यक्रमों में अधिकारियों के साथ देखा गया। आरोप है कि इसी सामाजिक और संस्थागत संपर्क का प्रभाव दिखाकर उसने बाहर के लोगों को निवेश के लिए तैयार किया।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि निवेश के नाम पर कुल कितनी रकम ली गई और वह रकम किन खातों में पहुंची। इसके साथ ही यह भी जांचना होगा कि सेराफिना समेत जिन कंपनियों का नाम सामने आया है, उनकी वास्तविक गतिविधियां क्या थीं और निवेशकों से मिली राशि का इस्तेमाल किस तरह किया गया। बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, कंपनी दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

मामले में एक और अहम बात आरोपी का अचानक गायब होना है। रिपोर्टों के अनुसार जब निवेशकों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की और कार्यालय में पहुंचना शुरू किया तो वहां ताला मिला। फोन भी बंद बताए गए। इसके बाद लोगों को ठगी की आशंका हुई और शिकायतें पुलिस तक पहुंचने लगीं। पुलिस आरोपी की लोकेशन और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने में लगी है।

कुछ रिपोर्टों में आरोपी के नेपाल भागने की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस की ओर से उसकी वर्तमान स्थिति और सटीक लोकेशन की अंतिम आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। इसलिए इसे पुलिस जांच में सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इस मामले में कथित ठगी का शिकार केवल निवेशक ही नहीं, बल्कि आरोपी की कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के कर्मचारियों को भी करीब छह महीने तक वेतन नहीं मिला था। यदि यह बात जांच में सही पाई जाती है तो इससे कंपनी के संचालन और आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई सवाल उठ सकते हैं।

मंडी के पद्धर और कमांद क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने ऑनलाइन ट्रेडिंग और क्रिप्टोकरेंसी में तेज रिटर्न के दावों को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ाई है। निवेश के नाम पर कम समय में रकम दोगुनी करने का दावा अक्सर लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन किसी भी निवेश योजना की वैधता और कंपनी के पंजीकरण की जांच किए बिना बड़ी रकम लगाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

जांच एजेंसियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग आरोपी के संपर्क में थे और क्या किसी ने निवेश जुटाने या लोगों को जोड़ने में उसकी मदद की। कुछ रिपोर्टों में स्थानीय स्तर पर उसके संपर्कों और कथित मददगारों की जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका केवल संपर्क में होने से साबित नहीं होती और इसके लिए पुलिस को ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे।

मामले में प्रवर्तन निदेशालय की संभावित जांच को लेकर भी कुछ मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं, लेकिन मंडी के पुलिस अधीक्षक ने ऐसी जांच की आधिकारिक जानकारी होने से इनकार किया है। इसलिए फिलहाल इस पहलू को पुष्ट कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। प्राथमिक जांच पद्धर पुलिस के स्तर पर चल रही है और शिकायतों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया जा रहा है।

IIT मंडी की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद अब जांच में यह अलग करना भी जरूरी होगा कि संस्थान की वास्तविक भूमिका क्या थी और आरोपी ने संस्थान से जुड़े अपने संपर्कों का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी व्यक्ति को लोगों से निवेश के लिए धन जुटाने की अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में निवेशकों से की गई बातचीत और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच से तस्वीर साफ हो सकती है।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल कथित ठगी की वास्तविक रकम को लेकर है। शुरुआती शिकायतों में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि सामने आई है, लेकिन पुलिस को और शिकायतें मिलने पर यह रकम बढ़ सकती है। मीडिया रिपोर्टों में 40 करोड़ से लेकर 50 करोड़ रुपये तक के अनुमान सामने आए हैं। अंतिम रकम पुलिस जांच और सभी शिकायतों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

गौरव अनिल धोते पर लगे आरोपों की जांच जारी है और अभी अदालत में आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए निवेशकों से पैसा लेने, कंपनियों के जरिए कथित नेटवर्क चलाने, पत्नी के गहने गिरवी रखने या IIT मंडी के संपर्कों का दुरुपयोग करने जैसे सभी मामलों को जांच और शिकायतों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की जांच, वित्तीय रिकॉर्ड और अदालत की प्रक्रिया से ही यह तय होगा कि किन आरोपों की पुष्टि होती है।

मंडी में सामने आया यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि किसी निवेश योजना पर भरोसा करने से पहले उसके दस्तावेज, कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय स्थिति और बैंकिंग विवरण की जांच जरूरी है। खासकर जब किसी योजना में बहुत कम समय में रकम दोगुनी करने या असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का दावा किया जाए तो निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस शिकायतकर्ताओं के बयान और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। आने वाले दिनों में और लोगों के सामने आने की संभावना है, जिससे कथित नेटवर्क और रकम का वास्तविक आकार स्पष्ट हो सकता है। दूसरी ओर IIT मंडी ने अपने स्तर पर आरोपी से दूरी स्पष्ट कर दी है और संस्थान की ओर से किसी तरह के निवेश के लिए लोगों को अधिकृत किए जाने से इनकार किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम में अब पुलिस जांच की दिशा और आरोपी की गिरफ्तारी अहम होगी। यदि आरोपी और उससे जुड़े लोगों के बैंक खातों, कंपनियों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी सामने आती है तो कथित निवेश नेटवर्क की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सैकड़ों लोगों से जुड़ी शिकायतों और करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय लेनदेन ने मंडी के इस मामले को गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों वाले मामलों में ला दिया है।

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