हिमाचल प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए सियासी परीक्षा बन गया है। कांग्रेस के पास विधानसभा में 40 सीटें होने के बावजूद पार्टी चिंतित है, क्योंकि पिछली बार बहुमत के बावजूद चुनाव हार का सामना करना पड़ा था।
शिमला: राज्यसभा का चुनाव अब कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गया है। कांग्रेस के पास 40 सीटें हैं, फिर भी पार्टी चिंता में है। प्रदेश के नेताओं के अलावा कई राष्ट्रीय नेता भी इस सीट पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। साल 2024 में कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को प्रत्याशी बनाया था और बहुमत होने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा। उस समय कांग्रेस के छह विधायकों और तीन निर्दलीय, जो सरकार का समर्थन दे रहे थे, ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया था।
पिछली हार की यादें
2024 में कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया था। उस समय कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था, लेकिन क्रॉस-वोटिंग और गुटबाजी के कारण भाजपा के हर्ष महाजन ने जीत हासिल कर ली थी। उस चुनाव में कांग्रेस के छह विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के पक्ष में वोट किया था। इस घटना ने कांग्रेस में राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया था और पार्टी हाईकमान की भी चिंता बढ़ गई थी।
वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में कांग्रेस के 40 और भाजपा के 28 विधायक हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन का कार्यकाल 2030 में और डॉ. सिकंदर कुमार का 2028 में समाप्त हो रहा है। इस बार कांग्रेस हाईकमान की निगरानी में पार्टी की एकजुटता बनाए रखने और किसी बाहरी उम्मीदवार को जीतने से रोकने का दावा कर रही है।
कांग्रेस में गुटबाजी अब भी एक चुनौती बनी हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव से पहले हाईकमान पदाधिकारियों की तैनाती और उम्मीदवारों पर सहमति सुनिश्चित करेगी, ताकि पिछली बार जैसी गलतियां दोबारा न हों। कांग्रेस नेता इस बार क्रॉस-वोटिंग और अंदरूनी मतभेदों को रोकने पर जोर दे रहे हैं।
![]()
भाजपा की रणनीति
भाजपा इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पर निगरानी रखे हुए है। पार्टी का मानना है कि विधानसभा चुनाव अगले साल प्रस्तावित हैं, इसलिए इस बार कोई बड़ा उलटफेर नहीं हो सकता। भाजपा नेता पूर्व अनुभव और विधायकों की स्थिति का लाभ उठाकर अपने पत्ते खोलने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन पार्टी हाईकमान से चर्चा के बाद किया जाएगा। वहीं पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने दावा किया कि कांग्रेस के कई विधायक अभी भी घुटन महसूस कर रहे हैं और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।
वहीं, कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं और जीत कांग्रेस प्रत्याशी की होगी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी लोकतंत्र और नियमों के खिलाफ धनबल और खरीद फरोख्त पर भरोसा करती है, जो इस बार सफल नहीं होगा।











