एल्युमीनियम और कॉपर बनाने वाली कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के 220 मेगावाट वाले भारत स्मॉल रिएक्टर्स (BSRs) प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव जमा करने वाली एकमात्र कंपनी बन गई है।
Hindalco Nuclear Power Project: भारत के न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के 220 MW भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR) प्रोजेक्ट के लिए एकमात्र प्रस्ताव जमा किया है।
हिंडाल्को के अलावा शुरुआत में कई बड़ी कंपनियों ने इस परियोजना में रुचि दिखाई थी, जिनमें टाटा पावर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिंदल स्टील और अन्य प्रमुख उद्योग समूह शामिल थे। हालांकि, प्रस्ताव जमा करने की अंतिम प्रक्रिया में केवल हिंडाल्को ही आगे आई। यह परियोजना भारत में उद्योगों को अपनी जरूरत के लिए स्वच्छ और भरोसेमंद परमाणु ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। खासतौर पर स्टील, एल्युमीनियम और मेटल सेक्टर जैसी ऊर्जा-गहन इंडस्ट्रीज के लिए यह मॉडल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत स्मॉल रिएक्टर प्रोजेक्ट क्या है?
भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR) 220 मेगावाट क्षमता वाले प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) हैं। इन रिएक्टरों को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि इन्हें बड़े औद्योगिक केंद्रों के नजदीक स्थापित किया जा सके। परंपरागत बिजली संयंत्रों की तुलना में परमाणु ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है। ऐसे में BSR मॉडल का उद्देश्य उद्योगों को कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में मदद करना है।
इन रिएक्टरों का उपयोग मुख्य रूप से कैप्टिव पावर प्लांट के रूप में किया जाएगा, यानी जिस कंपनी के लिए रिएक्टर लगाया जाएगा, वह अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल करेगी।
किन कंपनियों ने दिखाई थी दिलचस्पी?

हिंडाल्को के अलावा कई बड़े कॉरपोरेट समूहों ने इस परियोजना में शुरुआती रुचि दिखाई थी। इनमें:
- टाटा पावर
- रिलायंस इंडस्ट्रीज
- जिंदल स्टील
- JSW एनर्जी
- अदाणी पावर
जैसी कंपनियों के नाम शामिल रहे हैं। NPCIL के अनुसार, फरवरी 2025 में आयोजित प्री-प्रपोजल मीटिंग में करीब 27 उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इससे पता चलता है कि निजी क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा आधारित कैप्टिव पावर मॉडल को लेकर काफी उत्साह है।
प्रोजेक्ट का खर्च कौन उठाएगा?
NPCIL के प्रस्तावित बिजनेस मॉडल के अनुसार, परमाणु रिएक्टर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी NPCIL संभालेगी, लेकिन परियोजना से जुड़ी वित्तीय जरूरतों को बिजली उपयोग करने वाली कंपनी को पूरा करना होगा। इस मॉडल में उद्योगों को निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी:
- परियोजना के लिए जमीन
- कूलिंग वॉटर की व्यवस्था
- आवश्यक पूंजी निवेश
वहीं NPCIL डिजाइन, तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, संचालन और रखरखाव का काम संभालेगी। रिएक्टर से उत्पन्न बिजली में से कंपनी अपनी जरूरत पूरी करने के बाद बची हुई बिजली के उपयोग का अधिकार भी रख सकेगी। प्रस्तावित मॉडल के तहत NPCIL परमाणु रिएक्टरों के निर्माण और संचालन में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगी।
कंपनी से संबंधित सभी प्रमुख गतिविधियां जैसे ईंधन प्रबंधन, सुरक्षा मानक, परमाणु कचरा प्रबंधन और प्लांट के जीवन चक्र से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी तय नियमों के अनुसार होगी। इस मॉडल में यूजर कंपनी को परियोजना की पूंजी लागत और संचालन खर्च वहन करना होगा। इसके बदले NPCIL को विशेषज्ञता और संचालन सेवाओं के लिए शुल्क दिया जाएगा।










