मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और दीपदान से जुड़ी मान्यताओं में अलग-अलग तेलों का विशेष महत्व बताया गया है। आस्था के अनुसार चमेली, सरसों, तिल और घी का दीपक मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। यह परंपरा भक्तों को भरोसा और संबल देती है।
हनुमान जी पूजा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने और विशेष तेल से दीपक जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह पूजा भारत भर के मंदिरों और घरों में की जाती है। भक्त मानते हैं कि मंगलवार को दीपदान करने से डर, मानसिक तनाव और आर्थिक बाधाओं से राहत मिलती है। चमेली, सरसों, तिल और घी के दीपक अलग-अलग इच्छाओं से जोड़े जाते हैं। यह उपाय आस्था, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है।
मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार मंगलवार का संबंध शक्ति, साहस और ऊर्जा से माना गया है। हनुमान जी को बल, बुद्धि और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि मंगलवार को उनकी पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
कई भक्त मानते हैं कि मंगलवार को हनुमान जी की सच्चे मन से की गई पूजा मन से डर को दूर करती है और व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। पूजा के दौरान दीपक जलाना एक अहम हिस्सा होता है, क्योंकि दीपक को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक माना जाता है।
दीपदान का महत्व और उसका भाव
पूजा में दीपदान को केवल एक कर्मकांड नहीं माना जाता, बल्कि इसे भाव और एकाग्रता से जोड़ा जाता है। दीपक जलाने का अर्थ है मन के भीतर फैले असमंजस, भय और नकारात्मकता को दूर करने का प्रयास।
कई लोगों को यह स्पष्ट नहीं होता कि किस दिन कौन सा दीपक या किस तेल का प्रयोग किया जाए। परंपराओं के अनुसार अलग-अलग तेलों का अलग महत्व बताया गया है। खास तौर पर मंगलवार को हनुमान जी के सामने जलाया गया दीपक भक्तों को मानसिक शांति का अनुभव कराता है।
डर और मानसिक तनाव से राहत की मान्यता
मान्यता के अनुसार मंगलवार के दिन चमेली के तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना गया है। जिन लोगों को बात-बात पर डर लगता है, मन अशांत रहता है या अनावश्यक चिंता घेरे रहती है, वे इस उपाय को अपनाते हैं।
आस्था रखने वाले लोगों का कहना है कि चमेली के तेल से दीपदान करने से मन शांत होता है और भीतर एक सकारात्मक भाव पैदा होता है। इसे हनुमान जी के संरक्षण से भी जोड़ा जाता है। कई भक्त मानते हैं कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और मन को स्थिरता मिलती है।
रुकावटों और आर्थिक परेशानियों से जुड़ी मान्यता
अगर जीवन में काम बार-बार रुक रहा हो, आर्थिक परेशानियां बनी रहती हों या अचानक संकट सामने आ जाते हों, तो सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है।
मान्यता है कि सरसों का तेल नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है और वातावरण को शुद्ध करता है। मंगलवार के दिन हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने से बाधाएं दूर होती हैं और कामों में गति आती है। हालांकि इसे वैज्ञानिक प्रमाण से नहीं जोड़ा जाता, लेकिन आस्था रखने वाले लोग इसे मनोबल बढ़ाने वाला उपाय मानते हैं।

शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक
तिल के तेल को शांति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। जब जीवन में बार-बार अस्थिरता महसूस हो, फैसले लेने में दुविधा हो या मन लगातार बेचैन रहता हो, तब तिल के तेल का दीपक जलाने की सलाह दी जाती है।
मान्यता के अनुसार तिल के तेल से किया गया दीपदान व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। कई भक्त इसे आत्मसंयम और मानसिक संतुलन से जोड़कर देखते हैं। मंगलवार के दिन इस तेल से दीपक जलाने को मन को स्थिर करने का एक माध्यम माना जाता है।
सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना
हनुमान जी को गाय के शुद्ध घी का दीपक अति प्रिय बताया गया है। सुख, समृद्धि और अच्छे भाग्य की कामना के लिए घी का दीपक जलाने की परंपरा है।
मान्यता है कि घी का दीपक घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और वातावरण को शुभ बनाता है। कई लोग मानते हैं कि इससे परिवार में शांति बनी रहती है और आपसी संबंधों में मधुरता आती है। मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा में घी का दीपक विशेष महत्व रखता है।
आस्था और संतुलन का संदेश
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े हुए हैं। इन्हें किसी चमत्कारी समाधान के रूप में नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच के सहारे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
धार्मिक विशेषज्ञ भी यही मानते हैं कि पूजा-पाठ का असली उद्देश्य मन को शांत करना और आत्मविश्वास बढ़ाना है। अगर व्यक्ति मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े, तो आस्था उसे मानसिक मजबूती जरूर दे सकती है।
मंगलवार के दिन हनुमान जी को दीपक जलाने की परंपरा इसी विश्वास का हिस्सा है। सही भाव और श्रद्धा के साथ किया गया दीपदान कई लोगों के लिए उम्मीद और संबल का स्रोत बनता है।











