ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए नया ट्रैफिक सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है। ईरान ने कहा कि सहयोगी देशों को ही विशेष सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही UAE और ओमान को कड़ी चेतावनी भी दी गई है।
ईरान/अमेरिका वॉर: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नया ट्रैफिक सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने कहा कि यह नई व्यवस्था ईरान की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिस्टम का लाभ केवल उन्हीं देशों और कारोबारी जहाजों को मिलेगा जो ईरान के साथ सहयोगात्मक संबंध बनाए रखेंगे। साथ ही, विशेष समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क या टैक्स भी लिया जाएगा। ईरान के इस कदम को वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है।
UAE और खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाड़ी देशों ने अपने क्षेत्रों को ईरान विरोधी ताकतों के उपयोग के लिए खुला छोड़ दिया है।
मोखबर ने कहा कि ईरान ने लंबे समय तक इन देशों को “दोस्त और भाई” माना, लेकिन अब उन्होंने अपनी स्वतंत्रता तक “बेच” दी है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान का तनाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकते हैं और तेल बाजार पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
भारत ने कहा- होर्मुज में शिपिंग रोकना अस्वीकार्य
भारत ने भी होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार की नौवहन बाधा पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग को रोकना और नागरिक जहाजों को खतरे में डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट से ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत ने वैश्विक सहयोग और स्थायी समाधान की आवश्यकता बताई।
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान लगातार होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बढ़ाने की बात कर रहा है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, इसलिए इस क्षेत्र में अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती है।
रूस और चीन ईरान के रुख के करीब
होर्मुज संकट को लेकर रूस और चीन का रुख भी अमेरिका से अलग दिखाई दे रहा है। वियना में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लिए रूस के स्थायी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने कहा कि रूस, चीन के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस संकट का समाधान केवल स्थायी युद्धविराम और कूटनीतिक बातचीत से संभव है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत में कहा कि सैन्य शक्ति से समस्याओं का समाधान नहीं निकलता।
रूस और चीन दोनों ही पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा मान रहे हैं।
ईरान ने कहा- दुश्मनों के हथियार अब होर्मुज से नहीं गुजरेंगे
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अब उन देशों के सैन्य उपकरणों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिन्हें ईरान “दुश्मन” मानता है।
उन्होंने दावा किया कि पहले ईरान अपने खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों को भी इस समुद्री मार्ग से गुजरने देता था, लेकिन अब उसकी नीति बदल चुकी है। यह बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
यदि ईरान वास्तव में सैन्य उपकरणों की आवाजाही पर रोक लगाने की कोशिश करता है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ सीधा टकराव बढ़ सकता है।
ट्रम्प का बयान- 20 साल तक परमाणु कार्यक्रम रोके ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नया प्रस्ताव रखा है। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान कम से कम 20 वर्षों तक अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए तैयार हो जाए, तो अमेरिका इसे स्वीकार कर सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो हालात “बहुत खराब” हो सकते हैं। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है, जबकि ईरान अपनी क्षेत्रीय ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है।
तेहरान में हमलों से भारी तबाही
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, तेहरान में हालिया अमेरिकी और इजराइली हमलों में 1260 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 51 हजार से ज्यादा घर, 10 हजार वाहन और सैकड़ों मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन ईरान लगातार इन हमलों को “आक्रामक कार्रवाई” बता रहा है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में सरकार और सेना के समर्थन में बड़े पैमाने पर रैलियां भी निकाली गईं।
लेबनान में सीजफायर के बावजूद जारी हमले
इजराइल और लेबनान के बीच संघर्षविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिका की मध्यस्थता में यह फैसला लिया गया, लेकिन इसके बावजूद दक्षिण लेबनान में हमले जारी हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने कई इलाकों में एयरस्ट्राइक और गोलाबारी की है, जिसके चलते हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। दक्षिण लेबनान से बेरूत की ओर पलायन बढ़ गया है।
इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट की आशंका बढ़ा दी है।
ब्रिटेन ने तैनात किया नया एंटी-ड्रोन सिस्टम
मध्य पूर्व में बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच ब्रिटेन ने नया लो-कॉस्ट एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया है। यह सिस्टम RAF टाइफून फाइटर जेट्स पर लगाया जाएगा और दुश्मन के ड्रोन को सटीक तरीके से नष्ट करने में सक्षम होगा।
ब्रिटेन का कहना है कि यह तकनीक कम लागत में अधिक सुरक्षा प्रदान करेगी। हाल के महीनों में खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसके बाद कई पश्चिमी देश अपनी सैन्य तैयारी मजबूत कर रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता खतरा
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को चिंतित कर दिया है। यदि इस समुद्री मार्ग में व्यवधान आता है, तो तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। इससे दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक समाधान बेहद जरूरी है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा।











