हूतियों का दावा- अरामको तेल प्रतिष्ठान पर हमला, सऊदी अरब ने सना पर किए 26 हमले

रियाद : यमन के हूतियों ने रियाद में अरामको तेल प्रतिष्ठान पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया। सऊदी अरब पर सना में 26 हवाई हमले करने का आरोप लगाया।

यमन के हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद में अरामको के तेल प्रतिष्ठान को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इसके बाद सना में 26 सऊदी हवाई हमलों की खबर सामने आई। संघर्ष से यमन का मानवीय संकट और गहरा गया।

रियाद: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के दक्षिण में स्थित अरामको के एक तेल प्रतिष्ठान को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। शनिवार दोपहर रियाद के दक्षिण में स्थित एक अरामको सुविधा के आसपास आग और धुआं उठता दिखाई दिया। मौके पर मौजूद एक एएफपी पत्रकार के अनुसार, प्रतिष्ठान के आसपास आग बुझाने के लिए दमकलकर्मी पहुंचे थे। इलाके में एंबुलेंस और पुलिस वाहन भी मौजूद थे।

हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से इस हमले पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। बाद में हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि समूह ने रियाद में एक तेल प्रतिष्ठान को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया और हमले के बाद वहां आग लग गई।

सना में 26 सऊदी हमलों का हूतियों ने लगाया आरोप

हूती समर्थित चैनल अल-मसीरा टीवी ने दावा किया कि शनिवार को सना में “सऊदी दुश्मन के विमानों” ने 26 हवाई हमले किए। इससे पहले चैनल ने यमनी राजधानी के खिलाफ “सऊदी आक्रामकता” की खबर दी थी।

रिपोर्ट में हमलों के संभावित लक्ष्यों या हताहतों की संख्या के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई। सना में मौजूद दो संवाददाताओं ने तेज धमाकों की आवाज सुनने और युद्धक विमानों को शहर की ओर मिसाइलें दागते देखने की बात कही।

हूती समर्थित मीडिया ने शनिवार को यमन के उत्तर-पश्चिमी सादा प्रांत में दूरसंचार नेटवर्क पर मिसाइल हमलों की भी जानकारी दी। सादा को हूतियों का प्रमुख गढ़ माना जाता है।

जुलाई में फिर शुरू हुई थी लड़ाई

यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित सरकार के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद कुछ वर्षों तक अपेक्षाकृत शांति रही थी। हालांकि, जुलाई में चार साल पुराना नाजुक संघर्षविराम टूटने के बाद लड़ाई दोबारा तेज हो गई।

हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है और वे यमन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का मुख्यालय अदन में है और उसका नियंत्रण देश के दक्षिण तथा पूर्व के बड़े हिस्से पर है।

दक्षिण और पूर्व का क्षेत्र भौगोलिक रूप से बड़ा है, लेकिन वहां आबादी का घनत्व उत्तर-पश्चिमी इलाकों की तुलना में कम है।

सऊदी अरब के हवाई हमले के बाद बढ़ा तनाव

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा संघर्ष की एक बड़ी वजह सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव का फिर बढ़ना है। करीब चार साल की नाजुक शांति के बाद ईरान ने एक विमान सना भेजा था, जिसमें हूती प्रतिनिधिमंडल सवार था।

इस उड़ान के लिए सऊदी अरब से अनुमति नहीं ली गई थी। यह उस व्यवस्था के विपरीत था, जो करीब एक दशक से लागू थी।

इसके बाद रियाद ने सना हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए। जवाब में हूतियों ने 2022 के बाद पहली बार सऊदी अरब के क्षेत्र को निशाना बनाया।

इसके बाद संघर्ष तेजी से बढ़ा। हूतियों ने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास यमन के तटीय इलाकों पर कब्जा करने के लिए तेजी से सैन्य अभियान चलाया।

बाब अल-मंदब पर नियंत्रण से बढ़ी रणनीतिक चिंता

हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करने के साथ बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर भी अपना प्रभाव बढ़ाया है।

यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हूतियों ने सऊदी अरब के कई ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इनमें तेल प्रतिष्ठान और राजधानी रियाद शामिल हैं।

हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाजों की आवाजाही के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा भी की है।

इस घटनाक्रम ने यमन के संघर्ष को केवल घरेलू युद्ध तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी दबाव बढ़ाया है।

ताइज में भीषण लड़ाई, दर्जनों लड़ाकों की मौत

हाल के दिनों में संघर्ष का केंद्र ताइज बना हुआ है। शुक्रवार को दोनों पक्षों के सूत्रों ने यहां दर्जनों लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी दी।

हूतियों ने दावा किया कि उनके 55 लड़ाके मारे गए हैं। वहीं, यमनी सरकार से जुड़े सूत्रों ने 26 सैनिकों की मौत की जानकारी दी।

ताइज की लड़ाई कई मोर्चों पर चल रही है। इनमें वे ऊंचाई वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां से हाल में हूतियों के कब्जे में आए तटीय इलाकों पर नजर रखी जा सकती है।

हूतियों ने यमन के बड़े भूभाग पर कब्जा किया है, लेकिन वे अभी तक ताइज शहर पर नियंत्रण हासिल नहीं कर पाए हैं। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। इससे बड़े शहरों में सना और अदन शामिल हैं।

24 घंटे में 94 हमलों का भी दावा

हूतियों ने शुक्रवार को यह भी दावा किया कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले इलाकों में पिछले 24 घंटों के दौरान 94 हवाई हमले किए।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल उपलब्ध नहीं थी।

दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों ने बताया कि हूतियों की ओर से दागे गए एक प्रोजेक्टाइल से यमन सीमा के पास स्थित नाजरान शहर में एक स्कूल को नुकसान पहुंचा।

दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले और जवाबी हमले जारी रहने से संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।

सऊदी अरब ने अमेरिका से मांगी मदद

रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने यमन में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका से मदद मांगी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है।

शनिवार को अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सिओस ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष कैबिनेट सदस्यों ने एक दिन पहले यमन और ईरान संघर्ष को लेकर बैठक की थी।

इस बैठक की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बैठक में यमन की स्थिति के साथ-साथ ईरान से जुड़े संघर्ष पर भी चर्चा हुई।

यमन का मानवीय संकट और गहरा

लंबे समय से जारी युद्ध और नए सिरे से शुरू हुई हिंसा ने यमन की पहले से गंभीर मानवीय स्थिति को और खराब कर दिया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यमन की करीब तीन-चौथाई आबादी अपनी बुनियादी खाद्य जरूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं है।

यमन दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है और वर्षों से जारी संघर्ष के कारण वहां आम लोगों की स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है। नए सैन्य हमलों, विस्थापन और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे असर से मानवीय संकट और बढ़ने की आशंका है।

सऊदी अरब और हूतियों के बीच ताजा संघर्ष ने क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ा दिया है। अरामको प्रतिष्ठान पर कथित हमला, सना पर हवाई हमलों के आरोप, ताइज में लड़ाई और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां बताती हैं कि यमन का संघर्ष एक बार फिर गंभीर चरण में पहुंच गया है।

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