IceBoost v2.0: AI मॉडल ने दुनिया के ग्लेशियरों में बर्फ की मात्रा का सटीक अनुमान लगाया

IceBoost v2.0 AI मॉडल ने 70 लाख से अधिक मापों के आधार पर दुनिया के ग्लेशियरों की मोटाई और बर्फ की मात्रा का अनुमान लगाया, जो जलवायु अध्ययन में अहम है।

इटली के शोधकर्ताओं ने IceBoost v2.0 मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किया है। 70 लाख से अधिक मापों पर प्रशिक्षित यह मॉडल दुनिया के ग्लेशियरों की मोटाई और बर्फ की मात्रा का अनुमान लगाने में मदद करेगा।

वेनिस: IceBoost v2.0 ने दुनिया के ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई और कुल आयतन का विस्तृत अनुमान तैयार किया है। वेनिस की का' फोस्करी यूनिवर्सिटी और इटली के नेशनल रिसर्च काउंसिल के शोधकर्ताओं ने इसे 70 लाख से अधिक ग्लेशियर मापों के आधार पर विकसित किया है। इसका डेटा भविष्य में ग्लेशियरों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के आकलन में उपयोगी हो सकता है।

70 लाख से ज्यादा मापों से तैयार हुआ IceBoost v2.0

दुनिया के अलग-अलग ग्लेशियरों में कितनी बर्फ मौजूद है, इसका सटीक अनुमान लगाना वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से चुनौती रहा है। ग्लेशियरों की भौगोलिक स्थिति, मोटाई और संरचना में काफी अंतर होने के कारण हर क्षेत्र का आकलन करना आसान नहीं होता।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वेनिस की का' फोस्करी यूनिवर्सिटी और इटली के नेशनल रिसर्च काउंसिल के शोधकर्ताओं ने IceBoost v2.0 मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल दुनियाभर के ग्लेशियरों की मोटाई और उनके कुल आयतन का अनुमान लगाने के लिए बड़े पैमाने पर वास्तविक आंकड़ों का इस्तेमाल करता है।

मॉडल को ग्लेशियरों की मोटाई से जुड़े 70 लाख से अधिक मापों पर प्रशिक्षित किया गया है। इसमें जमीन की ढलान, सतह की बनावट, बर्फ की गति और तापमान समेत 26 अलग-अलग मानकों को शामिल किया गया है।

दुनिया के ग्लेशियरों में कितनी बर्फ मिली?

IceBoost v2.0 के अनुमान के मुताबिक, अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की मुख्य बर्फ की चादरों को अलग रखने पर दुनिया के ग्लेशियरों में करीब 1.5 लाख क्यूबिक किलोमीटर बर्फ मौजूद है।

शोध से यह भी अनुमान सामने आया है कि अगर ये सभी ग्लेशियर पूरी तरह पिघल जाएं, तो वैश्विक समुद्र स्तर करीब 32.3 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। यह आंकड़ा ग्लेशियरों के जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर पर संभावित प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मॉडल ने पूर्वी ग्रीनलैंड के 'गीकी पठार' जैसे क्षेत्रों में भी ग्लेशियरों की मोटाई को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। यहां कुछ ग्लेशियर करीब 2 किलोमीटर तक मोटे पाए गए हैं और मॉडल के अनुसार कुछ पुराने अनुमानों की तुलना में यहां बर्फ की मात्रा लगभग दोगुनी हो सकती है।

हिमालय से पैटागोनिया तक मिले अहम आंकड़े

IceBoost v2.0 की खासियत यह है कि इससे दुनिया के अलग-अलग और संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्रों का आकलन किया जा सकता है। इसमें हिमालय, काराकोरम और पैटागोनिया के बर्फीले क्षेत्र भी शामिल हैं।

ग्लेशियरों की मौजूदा स्थिति को समझना केवल जलवायु अनुसंधान के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में ग्लेशियर पिघलने और पानी की उपलब्धता के बीच सीधा संबंध है। ऐसे में भविष्य में ग्लेशियरों में मौजूद बर्फ और उसके संभावित बदलाव का अनुमान जल संसाधनों की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस डेटासेट का इस्तेमाल वर्ष 2100 तक ग्लेशियरों में होने वाले बदलावों के अनुमान के लिए आधार के रूप में किया जा सकता है। इससे वैज्ञानिक अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में ग्लेशियरों के संभावित भविष्य का अध्ययन कर सकेंगे।

शोधकर्ताओं ने आम लोगों और वैज्ञानिकों के लिए IceBoost का वेब ऐप भी उपलब्ध कराया है। इसके जरिए अलग-अलग ग्लेशियरों से जुड़ी बर्फ की स्थिति और उपलब्ध आंकड़ों को देखा जा सकता है। इस तरह AI आधारित मॉडल ग्लेशियर अनुसंधान को अधिक व्यापक और डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकता है।

Leave a comment