टॉड ब्लांश बने अमेरिका के नए अटॉर्नी जनरल, 50-49 वोट से सीनेट ने दी मंजूरी

वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व निजी वकील टॉड ब्लांश अमेरिका के नए अटॉर्नी जनरल बने। सीनेट ने 50-49 वोट से उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी।

डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व निजी वकील टॉड ब्लांश को अमेरिकी सीनेट ने 50-49 वोट से अटॉर्नी जनरल पद के लिए मंजूरी दे दी। दो रिपब्लिकन सांसदों ने उनका विरोध किया। ब्लांश अप्रैल से कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व निजी वकील टॉड ब्लांश को देश का नया अटॉर्नी जनरल नियुक्त कर दिया गया है। अमेरिकी सीनेट ने लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद 50-49 के बेहद करीबी अंतर से उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। ब्लांश अप्रैल से कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के रूप में न्याय विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब सीनेट की औपचारिक मंजूरी के बाद उन्हें देश के शीर्ष कानून प्रवर्तन अधिकारी की पूर्ण जिम्मेदारी मिल गई है।

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल न्याय विभाग के प्रमुख होते हैं और संघीय कानूनों को लागू कराने, प्रमुख कानूनी मामलों की निगरानी तथा देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ब्लांश की नियुक्ति को ट्रंप प्रशासन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, उनके पुराने संबंधों और ट्रंप के निजी वकील के रूप में उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज है।

50-49 के करीबी अंतर से हुआ मतदान

सीनेट में ब्लांश के नामांकन पर हुए मतदान में उन्हें 50 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 49 सांसदों ने विरोध में वोट किया। रिपब्लिकन पार्टी के दो सांसद सुसान कॉलिन्स और लिसा मुर्कोव्स्की ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ब्लांश के खिलाफ मतदान किया।

लुइसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी का समर्थन इस प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुआ। कैसिडी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पहले कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने ब्लांश के पक्ष में मतदान करने का फैसला किया।

कैसिडी ने कहा कि यह मतदान राष्ट्रपति ट्रंप के पक्ष या विपक्ष में जनमत संग्रह नहीं है, बल्कि टॉड ब्लांश की नियुक्ति से जुड़ा अलग फैसला है। उन्होंने कहा कि सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद वह ब्लांश को इस पद के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं।

बिल कैसिडी का फैसला क्यों रहा महत्वपूर्ण?

कैसिडी का ब्लांश के पक्ष में मतदान इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने जनवरी 2021 में कैपिटल हिंसा के बाद ट्रंप के दूसरे महाभियोग के दौरान उन्हें दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान किया था। उस समय ट्रंप पर 6 जनवरी की हिंसा से जुड़े आरोपों को लेकर महाभियोग चलाया गया था।

हालांकि, महाभियोग प्रस्ताव सीनेट में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया। इसके बाद ट्रंप और कैसिडी के संबंधों में राजनीतिक तनाव बना रहा। ऐसे माहौल में कैसिडी का ब्लांश के पक्ष में मतदान करना वॉशिंगटन की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया।

कैसिडी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति न्याय विभाग की दिशा और प्राथमिकताओं को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं, लेकिन सीनेट की मंजूरी से ब्लांश को ऐसे मामलों में राष्ट्रपति को अपनी पेशेवर और कानूनी राय देने के लिए अधिक प्रभाव मिल सकता है।

जेफ्री एप्स्टीन दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल

ब्लांश के नामांकन के दौरान कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने उनकी कार्यशैली को लेकर चिंता जताई। इनमें जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का मुद्दा भी शामिल था। एप्स्टीन से संबंधित दस्तावेजों की पारदर्शिता लंबे समय से अमेरिका में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय रही है।

कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि न्याय विभाग इस मामले से संबंधित दस्तावेजों और सूचनाओं को किस तरह संभालेगा। ब्लांश के सामने पुष्टि प्रक्रिया के दौरान इन सवालों का जवाब देना एक महत्वपूर्ण चुनौती रही।

इसके अलावा ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक प्रस्तावित 1.8 अरब डॉलर के तथाकथित एंटी-वेपनाइजेशन फंड को लेकर भी विवाद सामने आया। इस फंड का उद्देश्य कथित सरकारी उत्पीड़न के पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़ा था।

विवादित फंड से पीछे हटने का किया वादा

ब्लांश के प्रस्तावित फंड को लेकर कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी चिंता जताई। सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की सहित आलोचकों को आशंका थी कि इस फंड का लाभ उन लोगों तक भी पहुंच सकता है जिन पर 6 जनवरी 2021 के कैपिटल हमले में शामिल होने के आरोप लगे थे और जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी।

सीनेट में पुष्टि सुनवाई के दौरान बढ़ते दबाव के बाद ब्लांश ने इस योजना से पीछे हटने की प्रतिबद्धता जताई। हालांकि, अब भी यह सवाल बना हुआ है कि उनका यह वादा कानूनी रूप से कितना बाध्यकारी है और क्या भविष्य में ट्रंप प्रशासन किसी अन्य नाम या व्यवस्था के जरिए इसी तरह की योजना को आगे बढ़ा सकता है।

लिसा मुर्कोव्स्की ने किया विरोध

रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने ब्लांश के खिलाफ मतदान करते हुए न्याय विभाग के संभावित राजनीतिकरण को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि वह यह सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं कि ब्लांश प्रशासन की उन नीतियों पर पर्याप्त रोक लगा पाएंगे जिन्हें वह गलत मानती हैं।

मुर्कोव्स्की ने विशेष रूप से न्याय विभाग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए। उनके अनुसार, देश की सबसे महत्वपूर्ण कानून प्रवर्तन संस्था को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखना जरूरी है।

रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने भी ब्लांश के कुछ पिछले कानूनी कार्यों पर सवाल उठाए। इनमें ट्रंप और अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा यानी IRS से जुड़े लगभग 10 अरब डॉलर के विवाद के निपटारे में उनकी भूमिका शामिल थी। हालांकि, कॉलिन्स ने अंततः ब्लांश को समर्थन नहीं दिया।

ट्रंप के निजी वकील से अटॉर्नी जनरल तक का सफर

टॉड ब्लांश का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी परिचय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व निजी वकील के रूप में रहा है। 2024 में ट्रंप के हश-मनी मामले में ब्लांश उनके प्रमुख वकील थे। उन्होंने उस मामले में ट्रंप की कानूनी टीम का नेतृत्व किया था।

बाद में ट्रंप प्रशासन में ब्लांश को न्याय विभाग में उप अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी मिली। अप्रैल से वह कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के रूप में काम कर रहे थे। अब सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद वह औपचारिक रूप से न्याय विभाग के प्रमुख बन गए हैं।

उनकी नियुक्ति का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि ट्रंप के पूर्व निजी वकील के रूप में उनकी भूमिका और अटॉर्नी जनरल के रूप में उनकी संवैधानिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनेगा।

डेमोक्रेट्स ने नियुक्ति की आलोचना की

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने ब्लांश की नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लांश ने ट्रंप की राजनीतिक और कानूनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है और उनकी नियुक्ति न्याय विभाग की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल पैदा करती है।

डेमोक्रेट्स का कहना है कि अटॉर्नी जनरल को राष्ट्रपति से पर्याप्त पेशेवर दूरी बनाए रखते हुए कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना चाहिए। उनका तर्क है कि ट्रंप के पूर्व निजी वकील को न्याय विभाग की कमान सौंपने से हितों के टकराव और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

रिपब्लिकन नेताओं ने किया स्वागत

दूसरी ओर, रिपब्लिकन नेताओं ने ब्लांश की नियुक्ति का स्वागत किया। सीनेट न्यायपालिका समिति के अध्यक्ष चक ग्रासली ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ब्लांश के धैर्य, संवेदनशीलता और दृढ़ता की प्रशंसा की।

ग्रासली ने कहा कि ब्लांश इस पद के लिए योग्य हैं। रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि उनके पास न्याय विभाग का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक कानूनी अनुभव मौजूद है।

नियुक्ति के बाद ब्लांश ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा उन पर जताए गए भरोसे के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी से बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

अब ब्लांश के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

अटॉर्नी जनरल के रूप में ब्लांश के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय विभाग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता बनाए रखना होगी। उन्हें एक तरफ ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करना होगा, वहीं दूसरी तरफ यह भी साबित करना होगा कि विभाग कानून को राजनीतिक दबाव से ऊपर रखता है।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राजनीति में न्याय विभाग की भूमिका को लेकर पहले से ही तीखी बहस चल रही है। ट्रंप के साथ उनके पुराने पेशेवर संबंधों के कारण उनके हर बड़े फैसले पर राजनीतिक और कानूनी नजर रहेगी।

50-49 के करीबी मतदान से यह भी साफ है कि ब्लांश की नियुक्ति को लेकर सीनेट में पूरी राजनीतिक सहमति नहीं थी। अब उनका वास्तविक परीक्षण न्याय विभाग के संचालन, राष्ट्रपति के साथ उनके संबंधों और विवादित कानूनी मामलों में उनके फैसलों से होगा।

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