इजराइल–लेबनान सीजफायर लागू करने पर सहमति, अमेरिका ने की घोषणा

इजराइल और लेबनान ने सीजफायर लागू करने पर सहमति दी, लेकिन यह हिज़्बुल्लाह के हमले बंद करने पर निर्भर है। अमेरिका ने मध्यस्थता कर नई सुरक्षा योजना पेश की।

इजराइल और लेबनान ने अमेरिका की मध्यस्थता में सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई है, लेकिन यह हिज़्बुल्लाह के हमले रोकने की शर्त पर निर्भर है। दक्षिण लेबनान में हिंसा के बीच यह समझौता क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश है।

इज़राइल/लेबनान वॉर: अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि इजराइल और लेबनान ने संघर्ष विराम (सीजफायर) को लागू करने पर सहमति जताई है। यह समझौता पूरी तरह इस शर्त पर आधारित है कि ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिज़्बुल्लाह (Hezbollah) अपनी ओर से सभी हमले पूरी तरह बंद करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर हिंसा लगातार जारी थी और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था।

सीजफायर की शर्तें और अमेरिका की भूमिका

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह समझौता कई शर्तों के अधीन लागू होगा। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि हिज़्बुल्लाह को अपने सभी ऑपरेटिव्स को दक्षिण लेबनान के उस क्षेत्र से हटाना होगा, जो इजराइल के नियंत्रण में है और जो लितानी नदी से लेकर सीमा तक फैला हुआ है।

समझौते में यह भी कहा गया है कि अमेरिका “पायलट ज़ोन” स्थापित करने में मदद करेगा, जहां लेबनानी सेना (Lebanese Armed Forces) को पूर्ण नियंत्रण दिया जाएगा और किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं होगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि इस योजना का उद्देश्य लेबनान की सुरक्षा व्यवस्था को हिज़्बुल्लाह के प्रभाव से अलग करना और एक स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा तैयार करना है।

इजराइल और लेबनान के बीच जारी तनाव

यह समझौता उस स्थिति के बाद आया है जब हाल ही में इजराइल के हवाई हमलों में दक्षिण लेबनान में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट दागे थे। इस तरह दोनों पक्षों ने अप्रैल में बने एक अस्थायी युद्धविराम को बार-बार चुनौती दी।

इजराइली सेना ने दावा किया कि उसने कई ड्रोन और प्रोजेक्टाइल को सीमा पार करने से पहले ही रोक दिया, जबकि हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने इजराइली सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया।

बीते युद्धविराम की कमजोरी

सोमवार को पहले एक आंशिक सीजफायर समझौता हुआ था, जिसके तहत यह तय किया गया था कि इजराइल बेरूत पर बमबारी नहीं करेगा, बशर्ते हिज़्बुल्लाह इजराइल पर हमले बंद रखे। लेकिन यह समझौता कुछ ही दिनों में कमजोर पड़ गया और दोनों पक्षों ने फिर से हमले शुरू कर दिए।

लेबनान सरकार के अनुसार, इस अस्थायी समझौते का उद्देश्य केवल बेरूत पर बड़े हमलों को रोकना था, न कि पूरे देश में युद्धविराम लागू करना। इसी कारण यह समझौता प्रभावी नहीं हो सका।

22 जून को अगली वार्ता

अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों देशों के प्रतिनिधि 22 जून को फिर से बैठक करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य एक “व्यापक और स्थायी समझौता” तैयार करना है, जिससे सीमा पर स्थायी शांति स्थापित की जा सके।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कहा कि लक्ष्य लेबनान में सुरक्षा का एक ऐसा ढांचा बनाना है जो हिज़्बुल्लाह के प्रभाव से स्वतंत्र हो।

युद्ध के दौरान मानवीय संकट

पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष में लेबनान में भारी मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 3,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, एक मिलियन से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। दक्षिण लेबनान और बेरूत के कई इलाकों में लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है।

मेडिकल स्टाफ और नागरिकों पर हमले

हालिया घटनाओं में सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब दक्षिण लेबनान के चेहूर क्षेत्र में एक एंबुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें दो पैरामेडिक्स की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया।

लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इजराइली हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हैं, जो चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में 120 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं।

इजराइल की ओर से कहा गया कि कई बार एंबुलेंस का उपयोग सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है, हालांकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इजराइल का सैन्य रुख

इजराइली सेना ने चेतावनी दी है कि यदि हिज़्बुल्लाह ने हमले जारी रखे, तो वह बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर फिर से बड़े हमले शुरू कर सकती है। इजराइल का कहना है कि वह अपने उत्तरी क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकता है।

इजराइल के अनुसार, इस युद्ध में अब तक उसके 26 सैनिक और चार नागरिक मारे जा चुके हैं।

ट्रम्प और वैश्विक कूटनीति की भूमिका

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने दावा किया कि उन्होंने इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, इसलिए समझौता जरूरी है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि वह इजराइल और ईरान से जुड़े कूटनीतिक मुद्दों को अलग-अलग देखना चाहते हैं ताकि बातचीत अधिक प्रभावी हो सके।

हिज़्बुल्लाह की प्रतिक्रिया और राजनीतिक विवाद

हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ताओं को मान्यता नहीं देते और उन्हें किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं मानते।

संगठन ने आरोप लगाया कि यह वार्ता लेबनान की संप्रभुता को प्रभावित कर सकती है। वहीं इजराइल ने कहा है कि जब तक हिज़्बुल्लाह सीमा पार हमले करता रहेगा, सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।

आगे की राह: क्या शांति संभव है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब सभी पक्ष शर्तों का पालन करें।

यदि हिज़्बुल्लाह और इजराइल दोनों अपनी सैन्य गतिविधियां रोकते हैं, तो यह सीजफायर लंबे समय तक टिक सकता है। लेकिन यदि किसी भी पक्ष ने उल्लंघन किया, तो संघर्ष फिर से तेज हो सकता है।

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