इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। इजराइली नेताओं ने कहा कि वे लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे और सुरक्षा जोनों में सेना तैनात रहेगी, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।
ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। इजराइल ने इस संभावित डील को मानने से साफ इनकार कर दिया है। इजराइली सरकार का कहना है कि यह समझौता उसके सुरक्षा हितों के अनुरूप नहीं है और देश अपनी रणनीति में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने स्पष्ट किया है कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी और लेबनान, सीरिया तथा गाजा में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी। इस बयान ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
नेतन्याहू सरकार का कड़ा संदेश: “हम अमेरिका के गुलाम नहीं”
इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने अमेरिका-ईरान समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजराइल एक स्वतंत्र राष्ट्र है और वह किसी बाहरी समझौते को स्वतः स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है।
उन्होंने विवादित बयान में कहा कि इजराइल “किसी का गुलाम नहीं” है और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा समर्थित यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होगा। इस बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है।
अमेरिका-ईरान समझौते की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस समझौते का पहला आधिकारिक ऐलान करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
अगर यह बैठक सफल रहती है तो यह पिछले कई दशकों में पहली उच्च स्तरीय अमेरिका-ईरान वार्ता होगी, जो क्षेत्रीय कूटनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
ईरान की शर्तें
ईरान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर से पहले तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी के अनुसार, अमेरिका को पहले तीन कदम उठाने होंगे:
ईरान का कहना है कि इन शर्तों के बिना किसी भी समझौते पर आगे बढ़ना संभव नहीं है।
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अमेरिका-ईरान डील पर क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया
कई देशों ने इस प्रस्तावित समझौते का स्वागत किया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम बताया है।
UAE ने कहा कि यह समझौता सुरक्षा, आर्थिक विकास और शांति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि कुवैत ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की भूमिका की सराहना की है।
ट्रंप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि यह समझौता “दुनिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम” हो सकता है, हालांकि उन्होंने इजराइली हमलों के कारण प्रक्रिया में देरी की भी बात कही।
उन्होंने यह भी दावा किया कि समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होगी, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।
इजराइल की सैन्य नीति: पीछे न हटने का ऐलान
इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने दोहराया कि सेना सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगी। उनका कहना है कि इन इलाकों में मौजूद सैन्य तैनाती इजराइल की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों से संभावित आतंकी ढांचों को पूरी तरह खत्म किया जाएगा और स्थानीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयास
ईरान, मिस्र, इराक और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की है। सभी पक्षों ने कूटनीतिक समाधान और संघर्ष विराम का समर्थन किया है।
हालांकि, इजराइल के कड़े रुख के कारण स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
वैश्विक प्रतिक्रिया: भारत सहित कई देशों का समर्थन
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस समझौते के प्रयासों का स्वागत किया है। भारत ने कहा कि यदि यह समझौता लागू होता है तो इससे क्षेत्र में शांति, व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।










