चीन के जियांगयोउ शहर में एक अंडरग्राउंड चर्च के दो नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान दर्जनों श्रद्धालुओं को भी पूछताछ के लिए ले जाया गया। मामला धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा बताया जा रहा है।
बीजिंग: चीन के दक्षिण-पश्चिमी शहर जियांगयोउ में एक अंडरग्राउंड प्रोटेस्टेंट चर्च की रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। इस दौरान चर्च के दर्जनों श्रद्धालुओं को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे। इस घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य नियंत्रण को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है।
अर्ली रेन कोवेनेंट चर्च के दो नेता हिरासत में
प्रभावशाली अंडरग्राउंड चर्च Early Rain Covenant Church ने दावा किया है कि उसके दो प्रमुख नेताओं, यान होंग और वू वुकिंग को पुलिस ने हिरासत में लिया है। चर्च के अनुसार यह कार्रवाई उस समय की गई जब रविवार सुबह प्रार्थना सभा चल रही थी। हालांकि, चीनी प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सशस्त्र पुलिस ने सभा स्थल पर की घेराबंदी
चर्च द्वारा जारी बयान के अनुसार, लगभग 50 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और पूरे स्थल को घेर लिया। उस समय प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों को एक होटल के बॉलरूम में रखा गया, जहां स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिकल यूनिट (SWAT) के जवानों ने निगरानी की। कई श्रद्धालुओं को अलग-अलग पुलिस वाहनों में ले जाकर पूछताछ केंद्र में रखा गया।
दर्जनों श्रद्धालुओं से पूछताछ, बच्चों और बुजुर्गों की मौजूदगी
रिपोर्ट्स के अनुसार, 30 से अधिक लोगों को पुलिस वाहनों में ले जाकर जियांगयोउ डिटेंशन सेंटर में पूछताछ की गई। इनमें चर्च के सदस्य और नेता दोनों शामिल थे। चर्च का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई लोग प्रार्थना करते रहे और भजन गाते रहे, जब तक कि अधिकांश लोगों को बाद में रिहा नहीं कर दिया गया।
बॉलरूम में घंटों निगरानी और पहचान जांच
शेष श्रद्धालुओं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे, को बॉलरूम में ही रखा गया और उनकी पहचान जांच की गई। चर्च द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा गया कि कुछ लोग पुलिस की मौजूदगी में भी भजन गा रहे थे, जबकि एक अधिकारी उन्हें रुकने के लिए लगातार निर्देश दे रहा था। इस दृश्य ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
![]()
रिहाई के बदले शपथपत्र पर हस्ताक्षर का आरोप
चर्च ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को रिहा करने के बदले एक शपथपत्र (affidavit) पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, हालांकि इसमें क्या लिखा था, यह स्पष्ट नहीं किया गया। चर्च के अनुसार, श्रद्धालुओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बाद में उन्हें शाम तक रिहा कर दिया गया।
पहले भी निशाने पर रहा चर्च नेतृत्व
Early Rain Covenant Church पहले भी चीनी प्रशासन के निशाने पर रहा है। इसके संस्थापक पादरी वांग यी को 2018 में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें “राज्य सत्ता को कमजोर करने की साजिश” जैसे आरोपों में नौ साल की सजा सुनाई गई थी। यह मामला चीन में धार्मिक संगठनों पर नियंत्रण की नीति का एक प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
बार-बार हिरासत और निगरानी की घटनाएं
चर्च के अनुसार, हिरासत में लिए गए नेता यान होंग और वू वुकिंग को पहले भी कई बार पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है। जनवरी में भी उन्हें “झगड़ा करने और अशांति फैलाने” के आरोप में हिरासत में लिया गया था। यह दर्शाता है कि इन धार्मिक समूहों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।
चीन में धार्मिक नियंत्रण और राज्य मान्यता प्राप्त चर्च नीति
चीन में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लाखों ईसाई नागरिक हैं, लेकिन सरकार केवल उन चर्चों को मान्यता देती है जो राज्य द्वारा अनुमोदित पादरियों के तहत संचालित होते हैं। इसके विपरीत, स्वतंत्र या अंडरग्राउंड चर्चों को अक्सर “हाउस चर्च” कहा जाता है और उन्हें कानूनी दबाव और निगरानी का सामना करना पड़ता है।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाले संगठनों ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह छापेमारी शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों पर राज्य नियंत्रण का उदाहरण है। उनका आरोप है कि चीन में अंडरग्राउंड चर्चों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
पिछले वर्षों में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई
पिछले वर्ष अक्टूबर में भी चीन में ज़ायन चर्च के लगभग 30 नेताओं को कई शहरों में एक साथ हिरासत में लिया गया था। इसके संस्थापक एज़रा जिन अभी भी हिरासत में हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अंडरग्राउंड चर्चों पर कार्रवाई एक व्यापक नीति का हिस्सा है।









