मधयप्रदेश के एक्सिस बैंक की पूर्व मैनेजर ने अधिकारियों पर मानसिक और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने धमकी, बोनस रोकने और दुर्व्यवहार की शिकायत की है। पीड़िता ने कलेक्टर से न्याय की मांग की है।
इंदौर: MP में एक निजी बैंक की पूर्व महिला मैनेजर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी और वेतन-बोनस रोकने के आरोप शामिल हैं। पीड़िता ने कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामला अब प्रशासनिक और श्रम विभाग की जांच के दायरे में आ गया है।
दो साल का कार्यकाल और ‘उपलब्धियों’ के पीछे छिपा तनाव
पीड़िता निहारिका (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह फरवरी 2023 से मई 2025 तक बैंक की चोइथराम मंडी शाखा में ‘ऑपरेशन हेड’ के पद पर कार्यरत थीं। इस दौरान उनका प्रदर्शन अच्छा रहा और उन्हें कई आंतरिक पुरस्कार भी मिले। लेकिन उनके अनुसार, यह सफलता लगातार मानसिक दबाव और कार्यस्थल पर असहज माहौल के बीच हासिल हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर व्यवहारिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया जाता था और कई बार उन्हें असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर व्यवहार संबंधी आरोप
शिकायत में कहा गया है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें केबिन में बुलाकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे और अश्लील इशारे करते थे। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में कई बार अनुचित भाषा और दोहरे अर्थ वाली बातचीत का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा, आरोप है कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों के साथ व्यवहारिक संवेदनशीलता का पालन नहीं किया जाता था और व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी नजरअंदाज किया जाता था।
स्वास्थ्य और कार्यस्थल नीतियों की अनदेखी का आरोप
पीड़िता के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान भी उन्हें आराम नहीं दिया जाता था और कई घंटों तक खड़े रहकर बैठकों में शामिल होना पड़ता था। उनका यह भी कहना है कि बैंक की अनिवार्य छुट्टियां भी समय पर नहीं दी जाती थीं।
इन आरोपों के अनुसार, कार्यस्थल पर मानव संसाधन नीतियों का पालन ठीक से नहीं किया गया, जिससे कर्मचारी कल्याण प्रभावित हुआ।
इस्तीफे के बाद भी जारी रहा विवाद
पीड़िता ने बताया कि लगातार मानसिक दबाव के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने तीन महीने का नोटिस पीरियड भी पूरा किया, लेकिन इस दौरान भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
उनका आरोप है कि इस्तीफे के बाद भी उनका बकाया बोनस और अन्य भुगतान रोक दिया गया। जब उन्होंने भुगतान की मांग की, तो कथित तौर पर उन्हें विभिन्न बहानों से टाल दिया गया।

धमकी और दबाव के आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई, तो उन्हें धमकी दी गई। आरोप है कि उन्हें कहा गया कि उनकी शिकायत के कारण उनका करियर प्रभावित किया जा सकता है।
पीड़िता ने यह भी बताया कि लेबर ऑफिस और अन्य मंचों पर शिकायत करने के बावजूद उन्हें लगातार प्रक्रियात्मक जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
शी-बॉक्स पोर्टल और प्रशासन से उम्मीद
अब पीड़िता ने सरकार के शी-बॉक्स पोर्टल और प्रशासनिक तंत्र से न्याय की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि कार्यस्थल पर हुई कथित घटनाओं के कारण उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी साधी, लेकिन अब वे न्याय के लिए आगे आई हैं।
उन्होंने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
बैंक प्रबंधन का पक्ष
वहीं बैंक के एचआर विभाग से जुड़े अधिकारियों ने आरोपों को नकारा है। उनका कहना है कि उन्हें इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
प्रबंधन का यह भी कहना है कि बोनस भुगतान और अन्य दावों के संबंध में बैंक की नीतियों के अनुसार ही निर्णय लिया गया है।
कार्यस्थल सुरक्षा और महिला अधिकारों पर सवाल
यह मामला एक बार फिर कॉरपोरेट सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता और महिला कर्मचारियों के अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर शिकायत निवारण और पारदर्शी जांच व्यवस्था बेहद जरूरी है।
जांच की निगरानी पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है। कलेक्टर कार्यालय और संबंधित श्रम विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वे तथ्यों की जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या












