त्रिपुरा यूनिवर्सिटी समर्थित InstaWater ने Portable Water Purification Technology विकसित की है, जो बाढ़ के दूषित पानी को मौके पर शुद्ध करने में मदद करती है। यह तकनीक राहत क्षेत्रों में साफ पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित है।
Portable Water Purification Technology: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी की समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। त्रिपुरा यूनिवर्सिटी समर्थित InstaWater ने एक portable और patented purification system तैयार किया है, जिसे जरूरत के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर ले जाया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, इसकी मदद से असम में अब तक 2,000 लीटर तक दूषित पानी को शुद्ध किया जा चुका है।
बाढ़ के बाद साफ पानी की कमी बनती है बड़ी चुनौती
बाढ़ के दौरान सिर्फ घरों और सड़कों को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि पीने के पानी के स्रोत भी दूषित हो जाते हैं। कुएं, तालाब और स्थानीय जलस्रोतों में सीवेज, मिट्टी, कचरा और दूसरे contaminants मिल जाने से साफ पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे हालात में राहत शिविरों और दूर-दराज के गांवों तक बोतलबंद पानी पहुंचाना भी मुश्किल और महंगा हो सकता है।

दूषित पानी का इस्तेमाल करने से water-borne diseases का खतरा बढ़ जाता है। खासकर डायरिया और हैजा जैसी बीमारियां बाढ़ प्रभावित इलाकों में तेजी से फैल सकती हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए InstaWater ने portable purification system विकसित किया है।
InstaWater की Portable Purification Technology क्या है?
InstaWater को त्रिपुरा यूनिवर्सिटी का समर्थन प्राप्त है और इसकी purification technology को portable बनाया गया है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इस सिस्टम को बाढ़ प्रभावित इलाके में ले जाकर वहीं पानी को process किया जा सकता है।
इस तकनीक में एक pump के जरिए बाढ़ के दूषित पानी को सिस्टम के अंदर पहुंचाया जाता है। इसके बाद पानी को कई purification और filtration stages से गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य पानी में मौजूद मिट्टी, कीचड़ और दूसरे suspended particles के साथ हानिकारक contaminants को कम करना है।
कंपनी के अनुसार, सिस्टम को WHO के drinking-water standards को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। हालांकि, किसी भी emergency setting में तैयार पानी को स्थानीय water-quality testing और लागू regulatory standards के अनुसार जांचना जरूरी होता है।
असम में 2,000 लीटर पानी किया गया शुद्ध
इस तकनीक का इस्तेमाल असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, InstaWater की टीम ने अमगुरी में अपनी purification unit के जरिए करीब 2,000 लीटर दूषित पानी को process किया। इससे 30 से ज्यादा परिवारों को साफ पानी उपलब्ध कराने में मदद मिली।
इस initiative में InstaWater के संस्थापक प्रोफेसर हरजीत नाथ के साथ M.Tech छात्र असीम और technician शांतनु भी शामिल थे। टीम का उद्देश्य ऐसे इलाकों में मौके पर पानी उपलब्ध कराना था, जहां सामान्य water supply और bottled-water distribution प्रभावित हो जाता है।
राहत कार्यों में Portable Water Purifier क्यों उपयोगी?
Portable purification systems की सबसे बड़ी खासियत उनकी mobility है। इन्हें स्थायी water-treatment plant की तरह एक जगह स्थापित करने के बजाय जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में ले जाया जा सकता है।
अगर ऐसे सिस्टम को flood-prone क्षेत्रों में emergency preparedness के तौर पर पहले से उपलब्ध रखा जाए, तो बाढ़ के बाद स्थानीय जलस्रोतों से पानी लेकर उसे treatment process से गुजारने में मदद मिल सकती है। इससे राहत एजेंसियों पर bottled water की supply का दबाव कम हो सकता है और प्रभावित लोगों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
हालांकि, इस तरह की तकनीक को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने के लिए water-quality verification, maintenance, बिजली या अन्य power requirements और field conditions जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखना जरूरी होगा। फिर भी, बाढ़ जैसी आपदा के दौरान मौके पर पानी को treat करने की क्षमता इसे disaster-relief operations के लिए उपयोगी technology बना सकती है।












