लोकसभा में आज पेश होंगे 4 अहम बिल, अमित शाह केरल का नाम बदलने वाला विधेयक रखेंगे; राज्यसभा में बैंकिंग बिल पर चर्चा

संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में चार अहम बिल पेश होंगे। अमित शाह केरल नाम बदलाव और सहकारी क्षेत्र से जुड़े बिल रखेंगे, राज्यसभा में बैंकिंग बिल पर चर्चा होगी।

संसद के मानसून सत्र में सोमवार को लोकसभा में चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। अमित शाह केरल के नाम में बदलाव और सहकारी क्षेत्र से जुड़े बिल रखेंगे। राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पर चर्चा होगी, जबकि FCRA संशोधन को लेकर विपक्ष विरोध करेगा।

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों के साथ आगे बढ़ेगी। सदन में चार नए विधेयक पेश किए जाने हैं। इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केरल के नाम में बदलाव से जुड़े विधेयक के साथ सहकारी क्षेत्र से संबंधित संशोधन विधेयक पेश करेंगे। वहीं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी खनन क्षेत्र से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखेंगे। दूसरी ओर राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पर चर्चा होगी।

लोकसभा में चार विधेयक पेश करने की तैयारी

मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में सरकार चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने वाली है। इनमें प्रशासनिक सुधार, सहकारिता, खनन और राज्यों के नाम से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार इन विधेयकों के जरिए संबंधित कानूनों में बदलाव और मौजूदा व्यवस्थाओं को संशोधित करने की कोशिश करेगी।

गृह मंत्री अमित शाह सदन में दो विधेयक पेश करेंगे। इनमें पहला केरल (अल्टरेशन ऑफ नेम) बिल, 2026 है। इसके जरिए केरल के आधिकारिक नाम में बदलाव से जुड़ा प्रस्ताव संसद के सामने रखा जाएगा। दूसरा विधेयक नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट, 1962 में संशोधन से संबंधित है।

ट्रिब्यूनल और खनन कानून में भी बदलाव का प्रस्ताव

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पेश करेंगे। इस विधेयक का संबंध देश में विभिन्न न्यायाधिकरणों से जुड़े प्रावधानों और उनके कामकाज में सुधार से है।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में संशोधन से जुड़ा विधेयक सदन में रखेंगे। खनन क्षेत्र से जुड़े इस कानून में प्रस्तावित बदलावों को लेकर संसद में आगे चर्चा होने की संभावना है।

चारों विधेयकों का संसद में पेश होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मौजूदा कानूनों में बदलाव का रास्ता तैयार होगा। विधेयकों के पेश होने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के सांसद इन पर अपनी राय रख सकते हैं।

राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पर चर्चा

लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी सोमवार की कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को सदन में पेश करेंगी और इस पर चर्चा होगी।

बैंकिंग रिकॉर्ड और उनसे जुड़े दस्तावेजों की कानूनी स्वीकार्यता से संबंधित यह विधेयक बैंकिंग व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा के दौरान सरकार इस प्रस्ताव के उद्देश्य और संभावित प्रभावों को स्पष्ट कर सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी से मिल सकते हैं NCP-SP के 8 सांसद

संसद की कार्यवाही के बीच राजनीतिक मुलाकातों का दौर भी जारी रहेगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार गुट यानी NCP (SP) के सभी आठ सांसद सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक, सांसदों की ओर से प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है। इस संभावित बैठक को संसद में चल रही राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक का अंतिम समय और एजेंडा औपचारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी है।

NCP (SP) के सांसदों की प्रधानमंत्री से संभावित मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब संसद में कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की रणनीति

इस बीच विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर विपक्ष ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि उनकी पार्टी FCRA संशोधन विधेयक का विरोध करेगी।

विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार FCRA संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश कर सकती है।

सरकार की ओर से इस प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी चंदे से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है। हालांकि विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।

कई विपक्षी दल कर चुके हैं विरोध

FCRA में बदलाव को लेकर कई विपक्षी दल पहले ही अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस कानून से जुड़े छह मुद्दे उठाए थे।

लालदुहोमा के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि प्रस्तावित बदलावों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। बाकी मुद्दों पर संसद में 12 अगस्त से चर्चा होने की बात कही गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए FCRA से जुड़े प्रावधान विशेष रूप से संवेदनशील माने जा रहे हैं, क्योंकि कई सामाजिक और गैर-सरकारी संस्थाएं विदेशी सहायता पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में कानून में होने वाला कोई भी बदलाव उनके कामकाज और फंडिंग व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

DMK और NCP-SP भी बिल के खिलाफ

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन भी प्रस्तावित FCRA बदलावों का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने और FCRA की धारा 15 को समाप्त करने की मांग की है।

NCP (SP) ने भी प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है। विपक्ष का तर्क है कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के नाम पर गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।

वहीं केंद्र सरकार का रुख है कि विदेशी वित्तीय सहायता से जुड़े नियमों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

मानसून सत्र में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

सोमवार की कार्यवाही से साफ है कि मानसून सत्र के आगे बढ़ने के साथ विधायी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो रही हैं। एक तरफ सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष FCRA जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

केरल के नाम से जुड़े विधेयक से लेकर ट्रिब्यूनल सुधार और खनन कानून में संशोधन तक, लोकसभा में पेश होने वाले प्रस्तावों का दायरा काफी व्यापक है। दूसरी ओर राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पर चर्चा के दौरान बैंकिंग और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं।

संसद के भीतर विधेयकों पर चर्चा के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP (SP) सांसदों की संभावित बैठक भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन सकती है। आने वाले दिनों में FCRA संशोधन विधेयक पर विपक्ष की आपत्तियां और सरकार का जवाब मानसून सत्र की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल हो सकता है।

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