अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देशों ने हमलों और जवाबी कार्रवाई के दावे किए हैं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते विवाद का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है।
ईरान/अमेरका वॉर: मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर सैन्य तनाव के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित किया है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि ईरान ने इसके जवाब में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। हालांकि, दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका के हमलों का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों पर व्यापक कार्रवाई की। जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है उनमें बंदर अब्बास, बुशेहर, अहवाज, देजफुल, अबादान, खुर्रमशहर और अन्य रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य क्षेत्र में संभावित सुरक्षा खतरों को कम करना था।
कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में 300 से अधिक सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन दावों के संबंध में स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की पुष्टि का इंतजार है।
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और अहमद अल-जाबेर एयरबेस को निशाना बनाया। संगठन के अनुसार इन हमलों में ईंधन भंडारण, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार सुविधाओं को लक्ष्य बनाया गया।
इसके अलावा ईरान ने बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर भी हमले का दावा किया। हालांकि अमेरिका, कुवैत और बहरीन की ओर से इन दावों की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावों की पुष्टि स्वतंत्र स्रोतों से होना आवश्यक है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना तनाव का केंद्र
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज स्ट्रेट है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि विदेशी सैन्य हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इस क्षेत्र की रक्षा की जाएगी।
दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और वहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक हित का विषय है।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और ईंधन कीमतों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
नागरिक जहाज भी बने चिंता का विषय
हाल के दिनों में ओमान के पास एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले ने भी चिंता बढ़ा दी है। इस जहाज पर कई भारतीय नागरिक सवार थे, जिनमें से अधिकांश को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। भारत ने नागरिक जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।










