ISRO चेयरमैन वी. नारायणन बोले- 'रॉकेट लॉन्चिंग के बाद शुरू होता है असली मिशन ऑपरेशन'

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने मिशन ऑपरेशन की अहमियत पर जोर दिया। उनके अनुसार रॉकेट लॉन्चिंग केवल शुरुआत है, असली काम मिशन संचालन के दौरान शुरू होता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी. नारायणन ने हाल ही में बताया कि भारत के स्पेस मिशन की असली परीक्षा रॉकेट लॉन्चिंग के तुरंत बाद ही शुरू होती है। 

ISRO News: भारत के अंतरिक्ष मिशनों की शुरुआत अक्सर लॉन्च के समय सुर्खियों में होती है, लेकिन उनकी असली परीक्षा तो तब शुरू होती है जब रॉकेट शांत हो जाता है और मिशन ऑपरेशंस का चरण शुरू होता है। V Narayanan ने कहा कि यह लंबा और अदृश्य चरण है, जो उपग्रहों को सालों तक सक्रिय और कार्यशील बनाए रखता है। इस चरण के माध्यम से ही देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के अगले चरण को परिभाषित किया जाता है और तकनीकी दक्षता की वास्तविक परीक्षा सामने आती है।

मिशन ऑपरेशंस: सालों की चुनौती

स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस (SMOPs) कॉन्फ्रेंस में नारायणन ने कहा कि मिशन ऑपरेशंस वह लंबा और अदृश्य चरण है, जिसमें उपग्रहों को ऑर्बिट में बनाए रखना और उनकी निगरानी करना शामिल होता है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी स्पेसक्राफ्ट को 15 साल तक विश्वसनीय रूप से संचालित रखना होता है। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग, सिमुलेशन और कमांड ऑपरेशंस की आवश्यकता होती है।

नारायणन ने कहा, “रॉकेट लॉन्चिंग केवल मिशन की शुरुआत है। असली कठिनाई तब आती है जब स्पेसक्राफ्ट अपने मिशन के अनुसार काम करता रहे। यही वह समय है, जब टीम की विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमता की असली परीक्षा होती है।”

प्रोजेक्ट में देरी और आलोचना

ISRO वर्तमान में कई महत्वाकांक्षी मिशनों पर काम कर रहा है, और कुछ लॉन्च में देरी और चुनौतियों के कारण संस्थान आलोचनाओं का सामना कर रहा है। नारायणन ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अब मील के पत्थर वाले मिशनों से हटकर लगातार चलने वाली अंतरिक्ष गतिविधियों की ओर बढ़ रहा है।नारायणन ने पिछली SMOPs कॉन्फ्रेंस के बाद हुई तीन बड़ी उपलब्धियों का जिक्र किया:

  • अंतरिक्ष में सफल डॉकिंग प्रयोग
  • चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग
  • आदित्य-L1 सौर मिशन

विशेष रूप से डॉकिंग प्रयोग को उन्होंने बहुत मुश्किल बताया। इस प्रयोग में 15,000 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चल रहे दो सैटेलाइट्स को पूरी सटीकता के साथ पास लाना शामिल था। नारायणन ने चेताया कि इसमें कोई भी गलत कमांड गंभीर परिणाम दे सकती थी। चंद्रयान-3 मिशन के बारे में उन्होंने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्वायत्त लैंडिंग अनुक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करना मिशन संचालन टीम की कड़ी मेहनत का नतीजा था। आदित्य-L1 मिशन के माध्यम से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो सूर्य का अध्ययन करने में सक्षम हैं।

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