जैसलमेर प्रशासन अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए व्यापक सर्वे कराएगा। सीमा से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों की जांच होगी, जबकि 41 सीमावर्ती गांवों का विस्तृत सुरक्षा मानचित्र भी तैयार किया जाएगा।
जैसलमेर: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। जैसलमेर जिला प्रशासन सीमा क्षेत्र में भूमि उपयोग, निर्माण गतिविधियों और अतिक्रमण की स्थिति का विस्तृत सर्वे कराएगा। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों का डेटा बैंक और सिक्योरिटी मैप तैयार कर सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
सीमा क्षेत्र में होगा व्यापक सर्वे
जैसलमेर जिला प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी की है। जिला कलेक्टर Anupama Jorwal के अनुसार सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इस दौरान भूमि की स्थिति, निर्माण गतिविधियों और संभावित अतिक्रमण से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।

प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट का उपयोग आगे की प्रशासनिक और सुरक्षा कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
अवैध निर्माण और कब्जों पर रहेगी नजर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्र में होने वाले अवैध कब्जों और नियमों के विपरीत निर्माण कार्यों की पहचान की जाएगी। सर्वे के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में बड़े स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों और उनकी वित्तीय पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ऐसे निर्माण किन स्रोतों से संचालित हो रहे हैं और क्या वे निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं।
मजबूत होगा स्थानीय सूचना तंत्र
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन स्थानीय स्तर पर सूचना नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बना रहा है। इसके तहत पुलिस, प्रशासन, सीमा सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर पटवारी, पशुपालक, पूर्व सैनिक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सूचना तंत्र से जोड़ने की पहल की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से सीमावर्ती क्षेत्रों में गतिविधियों पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी।
41 गांवों का तैयार होगा सिक्योरिटी डेटा बैंक
जैसलमेर प्रशासन 41 सीमावर्ती गांवों का विस्तृत सुरक्षा मानचित्र और डेटा बैंक तैयार करेगा। इसमें जमीन के उपयोग, आबादी की स्थिति, सामाजिक संरचना और वैध-अवैध निर्माण गतिविधियों से संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी।
इस कार्य के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इसके आधार पर सीमा क्षेत्र की सुरक्षा, निगरानी और विकास से जुड़ी आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद करेगी।












