झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों छात्रों ने रांची में विधानसभा घेराव मार्च निकाला। सरकार ने कुछ JPSC परीक्षाएं रद्द करने पर सहमति जताई है, लेकिन प्रदर्शनकारी JSSC-CGL मामले में CBI जांच की मांग पर अड़े हैं।
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। राज्य की राजधानी रांची में हजारों छात्र विधानसभा घेराव मार्च के लिए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है। प्रशासन ने विधानसभा परिसर के आसपास निषेधाज्ञा लागू करते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
दो सप्ताह से जारी है छात्रों का आंदोलन
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र संगठनों का प्रदर्शन दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
छात्र संगठनों ने सोमवार को विधानसभा घेराव मार्च का आह्वान किया था। राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राजधानी की ओर आने वाले कई छात्रों को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। प्रशासन ने विधानसभा परिसर और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई और प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई।
सरकार ने JPSC की कुछ परीक्षाएं रद्द करने पर सहमति जताई
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने रविवार को 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही 2023 और 2025 में आयोजित JPSC की बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात सामने आई।
यह निर्णय सरकार और प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के बीच करीब छह घंटे चली बातचीत के बाद आया। राज्य सरकार ने कहा कि छात्रों की कई मांगों पर सहमति बनी है। सभी तीन JPSC सदस्यों के इस्तीफे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से पारदर्शिता के साथ न्याय का आश्वासन दिए जाने के बावजूद छात्र संगठनों ने आंदोलन खत्म नहीं किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी मांग JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच है। जब तक इस मांग पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी
छात्र संगठनों के मुताबिक, JSSC-CGL और उससे जुड़ी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) और JPSC-JSSC Reforms Manch ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने उन परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग की है, जो TSR Data Processing Private Limited एजेंसी से जुड़ी बताई जा रही हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि संबंधित एजेंसी को पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। आंदोलनकारी चाहते हैं कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो, ताकि उम्मीदवारों के बीच भरोसा बहाल किया जा सके।
बैरिकेडिंग के सामने बढ़ा तनाव
विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए रोकने की कोशिश की। कुछ देर इंतजार करने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करने की कोशिश करते दिखाई दिए। बैरिकेडिंग के पास पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां भी तैनात की गई थीं। हालांकि, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्वयंसेवकों ने छात्रों से संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की अपील की। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से आयोजित किया जाएगा।
जगन्नाथ मंदिर के पास रोका गया मार्च
विधानसभा परिसर से करीब तीन किलोमीटर दूर जगन्नाथ मंदिर के पास पुलिस ने मार्च का नेतृत्व कर रहे स्वयंसेवकों को रोक दिया। करीब आधे घंटे तक आगे बढ़ने के बाद प्रदर्शनकारी वहां रुके। स्वयंसेवकों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक बैठने और स्थिति को नियंत्रण में रखने की अपील की। शुरुआती चरण में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सहयोग की स्थिति बनी रही। हालांकि, विधानसभा की ओर आगे बढ़ने को लेकर प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच तनाव की संभावना बनी रही। प्रशासन का प्रयास था कि प्रदर्शनकारी निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में प्रवेश न करें।

नौ दिन से भूख हड़ताल पर देवेंद्र नाथ महतो
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा घेराव मार्च में शामिल हुए। वह परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के विरोध में नौ दिन से भूख हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के बावजूद महतो एंबुलेंस के जरिए प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे और मार्च में शामिल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन करीब 10.5 किलोग्राम कम हुआ है।
मार्च के दौरान वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का चित्र भी लेकर चलते दिखाई दिए। उनके आंदोलन में शामिल होने से प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा भी तेज हुई है।
‘मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा’
मार्च में शामिल एक छात्र ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को एक स्थान पर रोका गया है, लेकिन वे शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा की ओर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। छात्र ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग CBI जांच है। उनका कहना है कि केवल कुछ JPSC परीक्षाओं को रद्द करने से उनकी सभी चिंताएं दूर नहीं होतीं। वे JSSC-CGL समेत अन्य विवादित परीक्षाओं की प्रक्रिया की भी स्वतंत्र जांच चाहते हैं। छात्रों का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सीधा असर हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए जांच ऐसी एजेंसी से कराई जानी चाहिए जिस पर उम्मीदवारों को भरोसा हो।
सरकार के सामने आंदोलन खत्म कराने की चुनौती
राज्य सरकार ने बातचीत के जरिए आंदोलन को समाप्त करने की कोशिश की है और कुछ प्रमुख मांगों पर कदम उठाने की घोषणा भी की है। इसके बावजूद CBI जांच की मांग पर छात्रों का रुख कठोर बना हुआ है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि परीक्षा रद्द करने और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव के फैसलों के बावजूद छात्रों को आंदोलन वापस लेने के लिए कैसे राजी किया जाए। वहीं, प्रदर्शनकारियों के लिए भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाना महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने विधानसभा परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनी बड़ा मुद्दा
झारखंड का मौजूदा छात्र आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, परीक्षा संचालन और उम्मीदवारों के भरोसे से जुड़े व्यापक सवालों को सामने ला रहा है। छात्र संगठनों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता से युवाओं के वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है। यदि CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल रांची में विधानसभा घेराव मार्च ने झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को एक बार फिर राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र में ला दिया है।












