भारत सरकार संसद में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के जरिए विदेश से मिलने वाले फंड के प्रबंधन को बेहतर बनाने और उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने का उद्देश्य बताया जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत में प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल को लेकर कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिल से जुड़ी प्रमुख गलतफहमियों और सरकार के पक्ष को विस्तार से समझाया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को रोकना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर नियमन सुनिश्चित करना है।
क्वात्रा के मुताबिक, FCRA से जुड़ा प्रस्ताव भारत के लिए कोई पूरी तरह नया प्रयोग नहीं है। दुनिया के कई देशों में विदेशी वित्तीय योगदान और विदेशी प्रभाव से जुड़े अलग-अलग कानून पहले से लागू हैं। उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत कई देशों के उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी विदेशी फंड के नियमन के लिए अपने कानूनी ढांचे को मजबूत कर रहा है।
क्या किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है?
FCRA Amendment Bill को लेकर एक प्रमुख सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या प्रस्तावित नियम किसी खास धार्मिक या सामाजिक समुदाय को प्रभावित करने के लिए लाए जा रहे हैं। क्वात्रा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि FCRA का दायरा किसी विशेष धर्म या विचारधारा तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, कानून सभी पात्र संगठनों पर समान रूप से लागू होता है।
धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थलों के रखरखाव और विभिन्न समुदायों की चैरिटेबल या कल्याणकारी गतिविधियां विदेशी फंडिंग के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रह सकती हैं। यानी केवल किसी संगठन की धार्मिक पहचान के आधार पर उसे विदेशी योगदान से बाहर करने का प्रावधान नहीं है।
NGO की संपत्ति जब्त करने का दावा कितना सही?
FCRA बिल को लेकर यह आशंका भी सामने आई है कि विदेशी फंड लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों, अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक संस्थानों या चैरिटेबल संस्थाओं की संपत्ति जब्त की जा सकती है। क्वात्रा के स्पष्टीकरण के मुताबिक, FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होने की स्थिति में विदेशी योगदान और उससे निर्मित संपत्तियों को लेकर नियम पहले से मौजूद हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और जिम्मेदार प्राधिकरण निर्धारित करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि संबंधित संगठन दोबारा पात्र होकर अपना FCRA रजिस्ट्रेशन हासिल करता है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपत्तियां और अप्रयुक्त धन वापस किए जाने का प्रावधान हो सकता है। धार्मिक स्थलों से संबंधित संपत्तियों के लिए भी उनकी धार्मिक गतिविधियां जारी रखने से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

भारत में विदेशी फंडिंग बढ़ी है
क्वात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में विदेशी योगदान का प्रवाह कम नहीं हुआ है। उनके अनुसार, FCRA के तहत पंजीकृत संगठनों को मिलने वाला विदेशी फंड 2010-11 में करीब 1.2 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.67 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में लाखों गैर-सरकारी संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन FCRA के तहत पंजीकृत संगठनों की संख्या इसकी तुलना में काफी कम है। इसका मतलब है कि अधिकांश NGOs FCRA के दायरे में नहीं आते और अपने घरेलू स्रोतों से काम करते हैं।
विदेशी चैरिटी और रिसर्च फंड पर रोक नहीं
प्रस्तावित कानून को लेकर यह धारणा भी सामने आई है कि भारत विदेशी चैरिटी, रिसर्च ग्रांट या मानवीय सहायता को रोकना चाहता है। क्वात्रा ने कहा कि FCRA का मूल उद्देश्य विदेशी योगदान को प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि उसे एक नियामक व्यवस्था के तहत लाना है। विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों को पंजीकरण, निर्धारित बैंकिंग प्रक्रिया और फंड के इस्तेमाल की रिपोर्टिंग जैसी शर्तों का पालन करना होता है। सरकार का तर्क है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विदेशी धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हो और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे।
भारत में FCRA का इतिहास
भारत में विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के लिए पहला FCRA कानून 1976 में लागू किया गया था। इसके बाद 2010 में इसे नए कानूनी ढांचे के साथ बदला गया। वर्ष 2016, 2018 और बाद के वर्षों में इसमें कई संशोधन किए गए। अब प्रस्तावित FCRA Amendment Bill 2026 को इसी नियामक व्यवस्था को आगे मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के पक्ष के अनुसार, बदलते वैश्विक वित्तीय माहौल, डिजिटल लेनदेन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच विदेशी फंडिंग की निगरानी के लिए स्पष्ट और आधुनिक नियम जरूरी हैं।












